{"_id":"593c13d74f1c1b106c8b46ca","slug":"maharashtra-s-farmers-will-protest-against-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"बातचीत से हल नहीं निकला तो MP की तर्ज पर महाराष्ट्र में उग्र आंदोलन करेंगे किसान","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बातचीत से हल नहीं निकला तो MP की तर्ज पर महाराष्ट्र में उग्र आंदोलन करेंगे किसान
सुरेंद्र मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली।
Updated Sat, 10 Jun 2017 09:14 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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महाराष्ट्र में किसान संगठनों की कोर कमेटी राज्य सरकार की ओर से गठित मंत्री समूह के साथ बैठक के लिए तैयार हो गई है। लेकिन, कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो मध्य प्रदेश और पंजाब की तरह महाराष्ट्र में भी उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। मुंबई में करीब तीन घंटे तक हुई किसान संगठन के कोर कमेटी की मैराथन बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
सूबे में एक जून से किसान आंदोलन शुरू है। किसान संगठनों की कोर कमेटी की बैठक के बाद स्वाभिमानी शेतकरी (किसान) संगठन के नेता व सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि संपूर्ण कर्जमाफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने, दूध की कीमत में वृद्धि और आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की हमारी मांगे जब तक पूरी नहीं होगी तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मंत्री समूह के साथ रविवार को होने वाली बैठक में सभी 35 किसान संगठन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस दौरान किसानों की मांगों के संदर्भ में मंत्री समूह की बैठक में चर्चा होगी। यह सरकार के रुख पर निर्भर है कि आंदोलन की दिशा क्या होगी। शेतकरी (किसान) कामगार पार्टी के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि हम अक्तूबर तक कर्जमाफी का इंतजार नहीं कर सकते। यदि सरकार ने मांगे नहीं मानी तो मध्य प्रदेश और पंजाब की तरह महाराष्ट्र के किसान उग्र आंदोलन करेंगे।
किसान आंदोलन के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्जमाफी के लिए अधिकारियों की उपसमिति गठित की है जो यूपी की योगी सरकार और तेलंगाना सरकार की कर्जमाफी योजना का अध्ययन करने के साथ ही राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति की रिपोर्ट पेश करेगी। इसके साथ ही सहकारिता मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह का गठन किया है, जिसमें शिवसेना के नेता व परिवहन मंत्री दिवाकर रावते को भी शामिल किया गया हैं।
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मंत्री समूह के साथ बैठक से पहले किसान संगठन में फूट
शनिवार को किसान संगठनों की बैठक से पहले ही कोर कमेटी में फूट पड़ गई। किसान आंदोलन के लिए 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की कोर कमेटी गठित की गई है। पर कोर कमेटी के सदस्य डॉ. गिरधर पाटिल, अनिल धनवट, रामचंद्र बापू पाटिल, विधायक बच्चू कड़ू और डॉ.बुधाजीराव पाटिल आदि ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इनका आरोप है कि किसान आंदोलन को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। इसलिए सारे फैसले अंधेरे में लिए जा रहे हैं। हालांकि शेट्टी और जयंत पाटिल ने कोर कमेटी में मतभेद से इनकार किया है।
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सूबे में एक जून से किसान आंदोलन शुरू है। किसान संगठनों की कोर कमेटी की बैठक के बाद स्वाभिमानी शेतकरी (किसान) संगठन के नेता व सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि संपूर्ण कर्जमाफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने, दूध की कीमत में वृद्धि और आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की हमारी मांगे जब तक पूरी नहीं होगी तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मंत्री समूह के साथ रविवार को होने वाली बैठक में सभी 35 किसान संगठन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस दौरान किसानों की मांगों के संदर्भ में मंत्री समूह की बैठक में चर्चा होगी। यह सरकार के रुख पर निर्भर है कि आंदोलन की दिशा क्या होगी। शेतकरी (किसान) कामगार पार्टी के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि हम अक्तूबर तक कर्जमाफी का इंतजार नहीं कर सकते। यदि सरकार ने मांगे नहीं मानी तो मध्य प्रदेश और पंजाब की तरह महाराष्ट्र के किसान उग्र आंदोलन करेंगे।
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किसान आंदोलन के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्जमाफी के लिए अधिकारियों की उपसमिति गठित की है जो यूपी की योगी सरकार और तेलंगाना सरकार की कर्जमाफी योजना का अध्ययन करने के साथ ही राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति की रिपोर्ट पेश करेगी। इसके साथ ही सहकारिता मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह का गठन किया है, जिसमें शिवसेना के नेता व परिवहन मंत्री दिवाकर रावते को भी शामिल किया गया हैं।
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मंत्री समूह के साथ बैठक से पहले किसान संगठन में फूट
शनिवार को किसान संगठनों की बैठक से पहले ही कोर कमेटी में फूट पड़ गई। किसान आंदोलन के लिए 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की कोर कमेटी गठित की गई है। पर कोर कमेटी के सदस्य डॉ. गिरधर पाटिल, अनिल धनवट, रामचंद्र बापू पाटिल, विधायक बच्चू कड़ू और डॉ.बुधाजीराव पाटिल आदि ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इनका आरोप है कि किसान आंदोलन को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। इसलिए सारे फैसले अंधेरे में लिए जा रहे हैं। हालांकि शेट्टी और जयंत पाटिल ने कोर कमेटी में मतभेद से इनकार किया है।