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महाराष्ट्र राजस्व विभाग का बड़ा फैसला: मामले की सुनवाई अब केवल मराठी में होगी, सरकार ने जारी की SOP
Fri, 15 May 2026 10:38 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 15 May 2026 10:38 PM IST
सार
महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व अदालतों में मराठी भाषा को अनिवार्य कर और ई-अर्ध न्यायिक न्यायालय प्रणाली लागू कर न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है। अब तारीखों का खेल खत्म होगा और किसानों को अपनी भाषा में त्वरित न्याय मिल सकेगा। क्या है पूरा मामला? विस्तार से जानिए...
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देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र
- फोटो : ANI Photos
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विस्तार
महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। शुक्रवार को राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। अब राजस्व विभाग की सभी अर्ध-न्यायिक कार्यवाहियों में मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य होगा। इसके तहत न केवल सुनवाई मराठी में की जाएगी, बल्कि अधिकारियों की ओर से पारित किए जाने वाले सभी आदेश भी इसी भाषा में लिखे जाएंगे।
नई मानक संचालन प्रक्रिया की घोषणा
राजस्व मंत्री चंद्रकांत बावनकुले ने इस नई व्यवस्था के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पेश की। सरकार ने इस संबंध में 29 पन्नों का एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया है। इसमें राजस्व अधिकारियों के समक्ष लंबित अर्ध-न्यायिक मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। बावनकुले ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राजस्व प्रशासन को अधिक गतिशील और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सुनवाई के लिए तय हुए दिन
नई नियमावली के अनुसार, सभी राजस्व अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन सुनवाई करना अनिवार्य होगा। इसके लिए प्राथमिकता के तौर पर मंगलवार और शुक्रवार के दिन तय किए गए हैं। प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सभी अंतरिम और अंतिम आदेशों को सिस्टम पर अपलोड करना होगा। ये सभी आदेश डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होने चाहिए।
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यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में बड़ा फेरबदल: दीपक साकोरे बने नवी मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त; 52 IPS अधिकारियों के तबादले
टलेगी नहीं तारीख, आठ हफ्ते में आएगा फैसला
प्रशासनिक देरी को रोकने के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। अब किसी भी मामले में स्थगन केवल एक बार और वैध कारण होने पर ही मिलेगा। बिना दोनों पक्षों की दलीलें सुने और ठोस तर्क दर्ज किए कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकेगा। विवादों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के लिए स्पीकिंग ऑर्डर अधिकतम आठ सप्ताह के भीतर जारी करने होंगे।
विभिन्न श्रेणियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
राजस्व विभाग ने मामूली खनिज, खेत तक पहुंचने वाले रास्ते याचिका मामले और लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए अलग से गाइडलाइन तैयार की है। यह पूरी प्रक्रिया महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के तहत संचालित होगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन नियमों से राजस्व अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में भारी कमी आएगी।
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नई मानक संचालन प्रक्रिया की घोषणा
राजस्व मंत्री चंद्रकांत बावनकुले ने इस नई व्यवस्था के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पेश की। सरकार ने इस संबंध में 29 पन्नों का एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया है। इसमें राजस्व अधिकारियों के समक्ष लंबित अर्ध-न्यायिक मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। बावनकुले ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राजस्व प्रशासन को अधिक गतिशील और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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सुनवाई के लिए तय हुए दिन
नई नियमावली के अनुसार, सभी राजस्व अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन सुनवाई करना अनिवार्य होगा। इसके लिए प्राथमिकता के तौर पर मंगलवार और शुक्रवार के दिन तय किए गए हैं। प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सभी अंतरिम और अंतिम आदेशों को सिस्टम पर अपलोड करना होगा। ये सभी आदेश डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होने चाहिए।
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टलेगी नहीं तारीख, आठ हफ्ते में आएगा फैसला
प्रशासनिक देरी को रोकने के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। अब किसी भी मामले में स्थगन केवल एक बार और वैध कारण होने पर ही मिलेगा। बिना दोनों पक्षों की दलीलें सुने और ठोस तर्क दर्ज किए कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकेगा। विवादों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के लिए स्पीकिंग ऑर्डर अधिकतम आठ सप्ताह के भीतर जारी करने होंगे।
विभिन्न श्रेणियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
राजस्व विभाग ने मामूली खनिज, खेत तक पहुंचने वाले रास्ते याचिका मामले और लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए अलग से गाइडलाइन तैयार की है। यह पूरी प्रक्रिया महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता के तहत संचालित होगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन नियमों से राजस्व अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में भारी कमी आएगी।