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Hindi News ›   Maharashtra ›   Maharashtra portfolios allocation: Deputy Chief Minister and NCP leader Ajit Pawar given same Finance Ministry

Maharashtra: अजित पवार ने ऐसे दी एकनाथ शिंदे को खुली चेतावनी! सीएम के हिस्से का भी मंत्रालय आया उनके पास

Fri, 14 Jul 2023 07:39 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 14 Jul 2023 07:39 PM IST
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सार
Maharashtra: सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार दोपहर बाद एकनाथ शिंदे गुट से जुड़े हुए करीब एक दर्जन विधायकों ने बैठक कर मंत्रालय बंटवारे पर नाराजगी जताई। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि वह नहीं चाहते थे कि अजित पवार को वित्त मंत्रालय मिले...
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Maharashtra portfolios allocation: Deputy Chief Minister and NCP leader Ajit Pawar given same Finance Ministry
Maharashtra portfolios allocation - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

आखिर महाराष्ट्र में मंत्रालय के बंटवारे में वही हुआ जिसका एकनाथ शिंदे गुट को डर था। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के नेता अजित पवार को वही वित्त मंत्रालय दिया गया है, जिसे लेकर एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों ने पुरानी सरकार में पवार के खिलाफ मोर्चा खोला था। उस विरोध का असर यह हुआ कि महाविकास आघाड़ी गठबंधन के साथ चल रही सरकार गिर गई और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हो गए। उस घटना के ठीक एक साल बाद अजित पवार पाला बदलकर सरकार में शामिल हो गए और शुक्रवार को हुए मंत्रालय के बंटवारे में उन्हें वित्त मंत्रालय ही दिया गया। यही नहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हिस्से में आने वाला मंत्रालय भी अब अजित पवार की पार्टी के मंत्री के हिस्से आ गया है। महाराष्ट्र में हुए मंत्रालय बंटवारे के बाद यहां की सियासत एक बार फिर से गर्म हो गई है। एकनाथ शिंदे गुट से जुड़े विधायकों ने शुक्रवार को ही मंत्रालय बंटवारे के बाद एक बड़ी बैठक तक कर डाली।

यह भी पढ़ें: Maharashtra: शिंदे सरकार में विभागों का बंटवारा, अजित पवार को वित्त मंत्रालय; जानें भुजबल समेत किसे क्या मिला

नहीं चाहते थे कि अजीत को मिले वित्त मंत्रालय

महाराष्ट्र में आखिर लंबी रस्साकशी के बाद में मंत्रालयों का बंटवारा कर दिया गया। इस बंटवारे में एनसीपी के नेता और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को वित्त मंत्रालय दिया गया है। अजित पवार को मिले वित्त मंत्रालय से महाराष्ट्र की सियासी गर्माहट और बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि सरकार में शामिल होने के बाद मंत्रालयों का बंटवारा इन्हीं कुछ मुद्दों पर फंसा हुआ था कि क्या वित्त मंत्रालय अजित पवार के पास आना चाहिए या नहीं। वह कहते हैं दरअसल इसके पीछे सियासी अदावत बड़ी वजह मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ आए विधायक और मंत्री चाहते थे कि उनके हिस्से के प्रमुख मंत्रालयों में बड़ी सेंधमारी भी न हो और वित्त मंत्रालय अजित पवार के पास बिल्कुल न जाए। काफी मशक्कत के बाद बहुत से मामलों में सुलह हुई, लेकिन अजित पवार को वही मंत्रालय दिया गया, जिसे लेकर एकनाथ शिंदे गुट न देने के लिए अड़ा हुआ था। महाराष्ट्र के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरीके से अजीत पवार को मिला हुआ वित्त मंत्रालय एकनाथ शिंदे के लिए चुनौती है। जिस मंत्रालय को लेकर खुद शिंदे और उनके विधायकों ने पिछली सरकार में मोर्चा खोल दिया था वही मंत्रालय वापस अजित पवार को मिल गया है।

कृषि मंत्रालय लेकर क्या और कमजोर किया शिंदे को?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र में कृषि मंत्रालय प्रमुख मंत्रालयों में गिना जाता है। यह मंत्रालय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास था। अब यह मंत्रालय बंटवारे में अजित पवार के साथ आए धनंजय मुंडे के हिस्से में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह कहते हैं कि मुख्यमंत्री से लिया गया अहम मंत्रालय भी एक तरीके से महाराष्ट्र की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। उनका कहना है जिस तरीके से मुख्यमंत्री और उनके साथ आए विधायक और नेताओं के विरोध के बाद भी अजीत पवार को वित्त मंत्रालय दिया गया। यही नहीं मुख्यमंत्री के हिस्से में रहने वाला प्रदेश का बड़ा कृषि मंत्रालय भी अजित पवार के साथ आए विधायक को दे दिया। वह बताता है कि अगले कुछ महीने में महाराष्ट्र की सियासी गणित किसी और दिशा में जाने वाली है।

भाजपा के हिस्से के कुछ मंत्रालय भी गए अजीत खेमे को

शुक्रवार को हुए मंत्रालय के बंटवारे में अजित पवार को वित्त और योजना विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। छगल भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। दिलीप वाल्से पाटिल को सहकारिता, अदिति तटकरे को महिला और बाल विकास, धनंजय मुंडे को कृषि की जिम्मा दिया गया है। इसके अलावा हसन मुशरीफ को स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय तथा अनिल पाटिल को राहत और पुनर्वास, आपदा प्रबंधन विभाग दिया गया है। भाजपा नेताओं के पास स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल मंत्रालय थे। धर्मराव बाबा आत्राम को खाद्य एवं औषधि मंत्रालय और संजय बनसोडे को खेल और युवा कल्याण दिया गया है

मंत्रालय बंटवारे के बाद शिंदे गुट की बैठक

सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार दोपहर बाद एकनाथ शिंदे गुट से जुड़े हुए करीब एक दर्जन विधायकों ने बैठक कर मंत्रालय बंटवारे पर नाराजगी जताई। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि वह नहीं चाहते थे कि अजित पवार को वित्त मंत्रालय मिले। इसके पीछे उनका तर्क था कि पिछली सरकार में वित्त मंत्रालय पवार के पास था और उनके नेता फंड ना देने का आरोप लगाकर विरोध कर रहे थे। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि अजित पवार को मिले वित्त मंत्रालय के साथ-साथ मुख्यमंत्री के हिस्से में रहने वाला कृषि मंत्रालय भी उनके पास से लेकर अजित पवार के साथ आए नेता को दे दिया गया। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि अगर जल्द ही उनके नेता इस मामले में अपनी आवाज मुखर नहीं करेंगे, तो उनके लिए दूसरे रास्ते भी बंद होने लगेंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से उद्धव ठाकरे की शिवसेना से जुड़े नेता लगातार कह रहे हैं कि एकनाथ शिंदे के साथ रहने वाले बड़े नेता उनके संपर्क में हैं। उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि महाराष्ट्र में हुए मंत्रालय के बंटवारे की चिंगारी किस तरह बड़ी आग की तरह लगने वाली है।

अजित पवार को लेकर ही गिराई थी शिंदे और उनके विधायकों ने सरकार

महाराष्ट्र में सियासी संकट पिछले साल तब आना शुरू हुआ था, जब एमवीए (महाविकास अघाड़ी) सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए अजित पवार के ऊपर शिवसेना के विधायकों ने बजट न देने का आरोप लगाना शुरू किया था। राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु शितोले कहते हैं कि पुरानी सरकार में बगावत की शुरुआत ही अजित पवार को लेकर शुरू हुई थी। वह कहते हैं कि कई विधायकों ने आरोप लगाने शुरू किए थे कि अजित पवार के वित्त मंत्री रहते हुए वह शिवसेना के विधायकों को विकास कार्य का बजट नहीं दे रहे हैं। जबकि एनसीपी के विधायकों को अजित पवार न सिर्फ समय रहते बजट जारी कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बजट भी देकर शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले को लेकर विरोध इतना ज्यादा बढ़ा कि एकनाथ शिंदे ने पार्टी में बगावत करते हुए अपने साथ 40 से ज्यादा विधायकों को जोड़कर एमवीए की सरकार को गिरा दिया था।

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