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Maharashtra Politics: 'क्या भाजपा सरकार कांग्रेस प्रवक्ता को जज बनाने की सिफारिश करेगी?' कांग्रेस नेता का सवाल

Sun, 10 Aug 2025 10:27 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 10 Aug 2025 10:27 AM IST
सार

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से वकील और पूर्व भाजपा प्रवक्ता आरती साठे को बॉम्बे हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश करने की खबरों पर विवाद खड़ा हो गया।

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Maharashtra Politics: Will BJP govt recommend Congress spokesperson as judge, asks Anant Gadgil
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस नेता अनंत गाडगिल ने पूछा है कि क्या भाजपा सरकार कभी उनकी पार्टी के किसी प्रवक्ता को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश करेगी? दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से वकील और पूर्व भाजपा प्रवक्ता आरती साठे को बॉम्बे हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश करने की खबरों पर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि वह 2023 में पार्टी से इस्तीफा दे चुकी हैं। इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता गाडगिल ने एक बयान में कहा कि कुछ कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिष्ठित वकील हैं। क्या भाजपा सरकार किसी कांग्रेस प्रवक्ता को न्यायाधीश बनाने की सिफारिश करेगी?

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'पूर्व पार्टी प्रवक्ता की नियुक्ति चिंताजनक'
अन्ना मैथ्यू बनाम सर्वोच्च न्यायालय और कृष्णमूर्ति बनाम भारत संघ जैसे ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए गाडगिल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि केवल राजनीतिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी उम्मीदवार को न्यायिक पद के लिए अनुशंसित किए जाने से अयोग्य नहीं ठहराया जाना चाहिए, लेकिन एक पूर्व पार्टी प्रवक्ता की नियुक्ति के नैतिक निहितार्थ बेहद चिंताजनक हैं।
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कांग्रेस सरकारों ने अतीत में ऐसी सिफारिशें की थीं?
भाजपा के इस तर्क पर कि कांग्रेस सरकारों ने अतीत में ऐसी सिफारिशें की थीं, गाडगिल ने कहा कि किसी भी कांग्रेस सरकार ने न्यायिक पद के लिए अपने प्रवक्ता की सिफारिश कभी नहीं की। उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश करने के इच्छुक सेवानिवृत्त सैन्य और सिविल सेवा अधिकारियों के लिए 'कूलिंग-ऑफ' अवधि लागू करने और हाल ही में सेवानिवृत्त हुए न्यायाधीशों को संसदीय पदों पर नियुक्त करने की अनुमति देने में विरोधाभास की ओर भी इशारा किया।
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'आम नागरिकों में बेचैनी की भावना बढ़ रही'
उन्होंने दावा किया, 'जब से नरेंद्र मोदी सरकार ने बिना किसी कूलिंग-ऑफ अवधि के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को संसद में नियुक्त करना शुरू किया है, आम नागरिकों में बेचैनी की भावना बढ़ रही है।' गाडगिल ने आश्चर्य जताया कि क्या यह स्वीकार्य है कि एक व्यक्ति जो किसी राजनीतिक दल का चेहरा रहा हो, न्यायपालिका का चेहरा बन जाए। उन्होंने पूछा, 'क्या यह नैतिक रूप से सही है कि एक व्यक्ति जो किसी राजनीतिक दल का चेहरा रहा हो, न्यायपालिका का चेहरा हो सकता है?'

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