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औरंगजेब पर सियासी बवाल: एक-एक कर संभाजी महाराज के अंग कटवाता रहा मुगल शासक, ऐसी है 38 दिन चली क्रूरता की कहानी
Tue, 04 Mar 2025 01:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 04 Mar 2025 01:58 PM IST
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सार
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महाराष्ट्र में औरंगजेब पर विवाद।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे छत्रपति संभाजी पर बनी फिल्म छावा ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई है। फिल्म अब तक करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी है। हालांकि, इस फिल्म की चर्चा सिर्फ इसके कलेक्शन तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी रिलीज से पहले और रिलीज के दो हफ्ते बाद भी संभाजी महाराज और फिल्म में दिखाए गए उनके दुश्मन औरंगजेब को लेकर महाराष्ट्र में सियासी हलचल जारी है। ताजा विवाद समाजवादी पार्टी के नेता अबु आजमी के मुगल शासक को लेकर एक बयान से शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने औरंगजेब का बचाव करते हुए कहा कि वह क्रूर नहीं था। वह एक महान प्रशासक थे।अबु आजमी के इस बयान को लेकर पूरे महाराष्ट्र में विवाद की स्थिति है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने अबु आजमी को देशद्रोही तक करार दे दिया। शिंदे ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया और कहा कि अबु आजमी ने छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का अपमान किया। उन्होंने कहा कि अबु आजमी को सदन से निलंबित किया जाना चाहिए।
ऐसे में यह जानना अहम है कि औरंगजेब को लेकर ताजा विवाद किस बात पर उभरा है? सपा नेता और भाजपा के नेता ने क्या-क्या बयान दिए हैं? दोनों के बीच जिस घटना के जिक्र को लेकर टकराव की स्थिति बनी है, उसमें असल में हुआ क्या था? औरंगजेब की और किन क्रूरता की घटनाएं चर्चा में रही हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- महाराष्ट्र में ताजा विवाद की पूरी कहानी क्या है?
यह ताजा विवाद मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े बेटे छत्रपति संभाजी महाराज पर केंद्रित एक बॉलीवुड फिल्म छावा से पैदा हुआ है। इस फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेरकर ने किया है। इसमें संभाजी के जीवन, राज्याभिषेक और मुगल साम्राज्य, खासकर औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष को दिखाया गया है। विकी कौशल ने फिल्म में संभाजी की भूमिका निभाई है, जबकि रश्मिका मंदाना ने उनकी पत्नी येसुबाई भोंसले की भूमिका निभाई है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने औरंगजेब की भूमिका निभाई है।
यह ताजा विवाद मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े बेटे छत्रपति संभाजी महाराज पर केंद्रित एक बॉलीवुड फिल्म छावा से पैदा हुआ है। इस फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेरकर ने किया है। इसमें संभाजी के जीवन, राज्याभिषेक और मुगल साम्राज्य, खासकर औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष को दिखाया गया है। विकी कौशल ने फिल्म में संभाजी की भूमिका निभाई है, जबकि रश्मिका मंदाना ने उनकी पत्नी येसुबाई भोंसले की भूमिका निभाई है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने औरंगजेब की भूमिका निभाई है।
अबु आजमी ने इस फिल्म में औरंगजेब के चित्रण पर क्या कहा?
आजमी ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा था, 'सारा गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए...औरंगजेब क्रूर नहीं था।' एक समाचार चैनल के साथ इंटरव्यू में सपा नेता ने कहा था, 'मैंने औरंगजेब के बारे में जितना पढ़ा है, उसने कभी भी जनता का पैसा अपने लिए नहीं लिया, उसका शासन बर्मा (वर्तमान म्यांमार) तक फैला हुआ था, उस समय देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वह एक महान प्रशासक थे, उसकी सेना में कई हिंदू कमांडर थे।'
आजमी के इस बयान को लेकर सत्तासीन महायुति गठबंधन से लेकर महाविकास अघाड़ी की प्रमुख पार्टी- शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) तक ने सपा नेता को खरी-खरी सुनाई। इसके बाद खुद को गिरता देख अबु आजमी ने बचाव की कोशिश की। हालांकि, अपने अगले बयान से वे और ज्यादा घिर गए। उन्होंने कहा, "उस समय राजा सत्ता और संपत्ति के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन यह संघर्ष धार्मिक नहीं था। उसने (औरंगजेब ने) 52 साल तक शासन किया और अगर वह वाकई हिंदुओं को मुसलमान बना रहा था तो कल्पना कीजिए कि कितने हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन किया होगा।"
आजमी ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा था, 'सारा गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए...औरंगजेब क्रूर नहीं था।' एक समाचार चैनल के साथ इंटरव्यू में सपा नेता ने कहा था, 'मैंने औरंगजेब के बारे में जितना पढ़ा है, उसने कभी भी जनता का पैसा अपने लिए नहीं लिया, उसका शासन बर्मा (वर्तमान म्यांमार) तक फैला हुआ था, उस समय देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वह एक महान प्रशासक थे, उसकी सेना में कई हिंदू कमांडर थे।'
आजमी के इस बयान को लेकर सत्तासीन महायुति गठबंधन से लेकर महाविकास अघाड़ी की प्रमुख पार्टी- शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) तक ने सपा नेता को खरी-खरी सुनाई। इसके बाद खुद को गिरता देख अबु आजमी ने बचाव की कोशिश की। हालांकि, अपने अगले बयान से वे और ज्यादा घिर गए। उन्होंने कहा, "उस समय राजा सत्ता और संपत्ति के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन यह संघर्ष धार्मिक नहीं था। उसने (औरंगजेब ने) 52 साल तक शासन किया और अगर वह वाकई हिंदुओं को मुसलमान बना रहा था तो कल्पना कीजिए कि कितने हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन किया होगा।"
आजमी ने कहा, "अगर औरंगजेब रहमतुल्लाह ने मंदिर तोड़े थे तो उसने मस्जिदें भी तोड़ी थीं। अगर वह हिंदुओं के खिलाफ होता तो 34 फीसदी हिंदू उसके साथ नहीं होते और उसके सलाहकार हिंदू नहीं होते। इसे हिंदू-मुस्लिम कोण (एंगल) देने की कोई जरूरत नहीं है। यह देश संविधान से चलेगा और मैंने हिंदू भाइयों के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा है।"
मामले में एकनाथ शिंदे ने क्या जवाब दिया?
अबु आजमी के इस बयान पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उन्हें आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, "जिसने देशभक्त संभाजी को मारा, उस औरंगजेब को अच्छा शासक बताकर अबु आजमी ने बड़ा पाप किया है।" शिंदे ने कहा कि अबु आजमी का बयान गलत है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।
अबु आजमी के इस बयान पर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उन्हें आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, "जिसने देशभक्त संभाजी को मारा, उस औरंगजेब को अच्छा शासक बताकर अबु आजमी ने बड़ा पाप किया है।" शिंदे ने कहा कि अबु आजमी का बयान गलत है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।
क्या थी संभाजी महाराज के साथ हुई असल घटना जिसका शिंदे ने किया जिक्र, कितना सच?
मराठा साम्राज्य के अजेय शासक छत्रपति शिवाजी महाराज का 3 अप्रैल 1680 को निधन हो गया। उनके रहते हुए मुगल शासक औरंगजेब एक भी बार महाराष्ट्र की धरती पर संघर्ष नहीं जीत पाया। मुगल सेनाओं को दक्खन के पठारों में मराठा सेनाओं के खिलाफ लड़ते हुए बड़े नुकसान हुए। हालांकि, जब औरंगजेब को शिवाजी महाराज के निधन की खबर मिली तो उसने एक बार फिर दक्खन पर कब्जे की कोशिशों को तेज कर दिया।
यही वह समय था, जब छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी का उदय हुआ। युद्धकला में निपुण संभाजी महाराज ने पिता की तरह ही मुगलों से जंग जारी रखी। मराठा सेनान की गुरिल्ला युद्ध तकनीक की वजह से कई वर्षों तक औरंगजेब की सेना आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि, 1689 में संभाजी अपने ही करीबियों की साजिश का शिकार हो गए। दुश्मनों ने उनकी जासूसी शुरू कर दी और उनके खिलाफ साजिशें रचीं।
मराठा साम्राज्य के अजेय शासक छत्रपति शिवाजी महाराज का 3 अप्रैल 1680 को निधन हो गया। उनके रहते हुए मुगल शासक औरंगजेब एक भी बार महाराष्ट्र की धरती पर संघर्ष नहीं जीत पाया। मुगल सेनाओं को दक्खन के पठारों में मराठा सेनाओं के खिलाफ लड़ते हुए बड़े नुकसान हुए। हालांकि, जब औरंगजेब को शिवाजी महाराज के निधन की खबर मिली तो उसने एक बार फिर दक्खन पर कब्जे की कोशिशों को तेज कर दिया।
यही वह समय था, जब छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी का उदय हुआ। युद्धकला में निपुण संभाजी महाराज ने पिता की तरह ही मुगलों से जंग जारी रखी। मराठा सेनान की गुरिल्ला युद्ध तकनीक की वजह से कई वर्षों तक औरंगजेब की सेना आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि, 1689 में संभाजी अपने ही करीबियों की साजिश का शिकार हो गए। दुश्मनों ने उनकी जासूसी शुरू कर दी और उनके खिलाफ साजिशें रचीं।
औरंगजेब ने क्रूरता से करवाई संभाजी महाराज की हत्या?
1689 में मराठा नेताओं की एक बैठक के लिए जब संभाजी संगमेश्वर पहुंचे तो मुगलों की एक सेना ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया। संभाजी को बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, संभाजी नहीं माने। इसके बाद उनके हाथ और गर्दन को लकड़ी के तख्ते में फंसा दिया गया और उन्हें बेड़ियों में रखा जाने लगा। बताया जाता है कि एक मौके पर जब औरंगजेब ने उन्हें नजरें नीची करने को कहा तो संभाजी ने इससे इनकार करते हुए घूरना शुरू कर दिया। इसके बाद औरंगजेब ने उनकी आंखें निकलवा दीं।
1689 में मराठा नेताओं की एक बैठक के लिए जब संभाजी संगमेश्वर पहुंचे तो मुगलों की एक सेना ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया। संभाजी को बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, संभाजी नहीं माने। इसके बाद उनके हाथ और गर्दन को लकड़ी के तख्ते में फंसा दिया गया और उन्हें बेड़ियों में रखा जाने लगा। बताया जाता है कि एक मौके पर जब औरंगजेब ने उन्हें नजरें नीची करने को कहा तो संभाजी ने इससे इनकार करते हुए घूरना शुरू कर दिया। इसके बाद औरंगजेब ने उनकी आंखें निकलवा दीं।
इतिहासकार डेनिस किंकेड के मुताबिक, जब संभाजी ने कई बार इस्लाम मानने के प्रस्ताव से इनकार कर दिया तो औरंगजेब ने उनकी जुबान भी निकलवा ली। इस स्थिति में संभाजी कुछ दिन जिंदा रहे, लेकिन मुगल शासक ने उनकी यातनाएं बढ़ा दीं। संभाजी के एक-एक कर सभी अंग काटे गए और आखिर में 38 दिन बाद 11 मार्च 1689 को उनका सिर धड़ से जुदा कर उनकी हत्या कर दी गई। इस दौरान औरंगजेब ने संभाजी की पत्नी और बेटे को कैद कर दिया।
औरंगजेब ने मराठा साम्राज्य में अपना डर कायम करने के लिए संभाजी का सिर दक्षिण के कई अहम शहरों में घुमाया, लेकिन औरंगजेब की यह हरकत उल्टी पड़ गई। इस घटना के बाद मराठा साम्राज्य में जो शासक अलग-थलग पड़े थे, वह सभी साथ आ गए और मुगलों को कब्जे से दूर रखा।
औरंगजेब ने मराठा साम्राज्य में अपना डर कायम करने के लिए संभाजी का सिर दक्षिण के कई अहम शहरों में घुमाया, लेकिन औरंगजेब की यह हरकत उल्टी पड़ गई। इस घटना के बाद मराठा साम्राज्य में जो शासक अलग-थलग पड़े थे, वह सभी साथ आ गए और मुगलों को कब्जे से दूर रखा।
औरंगजेब की क्रूरता को लेकर क्या-क्या सामने आया है?
- औरंगजेब मुगल शासकों में सबसे क्रूर माना जाता है। धार्मिक मसलों पर वह शरिया का सबसे बड़ा समर्थक रहा। हरबंस मुखिया की किताब- द मुगल्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जब औरंगजेब को पता चला कि मुल्तान, थट्टा और वाराणसी में हिंदू ब्राह्मणों के शिक्षण संस्थान मुस्लिों को पढ़ने के लिए आकर्षित करते हैं, तो उसने इन स्कूलों को तबाह करवाया और हिंदुओं के मंदिरों को भी गिरवा दिया। इतना ही नहीं औरंगजेब ने उन मुस्लिमों को भी सजा दी, जो इस्लामिक वेशभूषा में नहीं रहते थे।
- इसी कड़ी में औरंगजेब ने सूफी संत सरमद खशानी और सिखों के नौवें गुरु- गुरु तेग बहादुर को मौत की सजा दी। गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब की जबरन धर्मांतरण करने की बात को मानने से इनकार कर दिया था।
- इतना ही नहीं औरंगजेब ने हिंदुओं और पारसियों के त्योहारों को भी रोक दिया। इनमें नवरोज भी शामिल था, जिसे औरंगजेब गैर-इस्लामिक त्योहार कहता था। इस दौरान इस्लाम न कबूलने वालों और इस्लाम की बातें न मानने वालों को औरंगजेब की तरफ से क्रूर सजा देने की भी कई घटनाओं का जिक्र मिलता है।
- औरंगजेब ने अपने शासन वाले क्षेत्र में लोगों पर जजिया कर लगाना शुरू कर दिया था। यह कर खासतौर पर गैर-मुस्लिमों पर लगाया जाता था।