BEST Credit Society Election: 'बड़ी बात नहीं, ट्रायल बॉल खेले'; नतीजों से लगे झटके पर बोले राज और आदित्य ठाकरे
मुंबई में बीईएसटी क्रेडिट सोसायटी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे की संयुक्त पैनल को करारी हार मिली, सभी 21 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। आदित्य ठाकरे ने इसे ट्रायल बॉल बताया, जबकि राज ठाकरे ने इसे छोटी बात कहा। दोनों नेताओं ने आगामी नगर निगम चुनावों को असली मुकाबला बताया, जहां दो भाइयों की जोड़ी साथ नजर आ सकती है।
मुंबई में बीईएसटी क्रेडिट सोसायटी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे की संयुक्त पैनल को करारी हार मिली, सभी 21 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। आदित्य ठाकरे ने इसे ट्रायल बॉल बताया, जबकि राज ठाकरे ने इसे छोटी बात कहा। दोनों नेताओं ने आगामी नगर निगम चुनावों को असली मुकाबला बताया, जहां दो भाइयों की जोड़ी साथ नजर आ सकती है।
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मुंबई में बीईएसटी कर्मचारियों की क्रेडिट सोसायटी के चुनाव में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की संयुक्त पैनल को करारी हार का सामना करना पड़ा। दोनों पार्टी 21 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई। हालांकि इसके बावजूद दोनों पार्टियों के नेताओं ने इसपर बेहद हल्की प्रतिक्रिया दी। एक तरफ जहां शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह तो सिर्फ एक ट्रायल बॉल थी और हमने उसी तरह खेला। शायद योजना में कुछ कमी रह गई थी, अब आंतरिक बदलाव किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी इस हार को ज्यादा तवज्जो नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है।
राज के बयान के बाद बोले आदित्य
राज ठाकरे ने आगे कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र का मूड आपको आगामी महानगरपालिका चुनावों में पता चलेगा, जब दो भाई एक साथ मैदान में उतरेंगे। असली मुकाबला तो अभी बाकी है। हालांकि मनसे प्रमुख के इस बयान पर जब आदित्य ठाकरे से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे उनके बयान की जानकारी नहीं है।
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क्या रहा चुनाव का परिणाण?
दरअसल शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे ने पहली बार एक साथ मिलकर बीईएसटी कर्मचारी सहकारी क्रेडिट सोसायटी चुनाव लड़ा था, लेकिन उनकी संयुक्त पैनल सभी 21 सीटों पर हार गई। शशांक राव की अगुवाई वाले पैनल ने 14 सीटों पर जीत हासिल की और बाकी सीटें अन्य उम्मीदवारों को मिलीं।
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गौरतलब है कि बीईएसटी मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की परिवहन और बिजली आपूर्ति शाखा है। शिवसेना ने बीएमसी पर करीब दो दशकों तक शासन किया था। साल 2022 से बीएमसी में प्रशासक नियुक्त है क्योंकि चुनाव अब तक नहीं हुए हैं। यह हार ऐसे समय में हुई है जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों के मिलकर मुंबई और महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर हैं।