महाराष्ट्र में नई नहीं है चाचा-भतीजे की लड़ाई, ये भतीजे भी कर चुके हैं बगावत
महाराष्ट्र के सियासी रण में अब लड़ाई चाचा और भतीजे के बीच शुरू हो गई है। भतीजे अजित पवार ने अपने ही चाचा शरद पवार को झटका देकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली।
अजित पवार को राजनीति की एबीसी उनके चाचा व एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ही सिखाई है। मगर आज वह उन्हीं के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा चुके हैं। हालांकि महाराष्ट्र में वह कोई पहले भतीजे नहीं है, जिन्होंने अपने चाचा के खिलाफ आवाज बुलंद की है। हालांकि अजित जैसा झटका किसी अन्य भतीजे ने फिलहाल नहीं दिया है। आइए आपको मिलवाते हैं बगावत करने वाले भतीजों से
राज ठाकरे ने बनाई अलग पार्टी
शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे को अपने ही भतीजे राज ठाकरे की बगावत देखनी पड़ी। 2006 में चाचा—भतीजे आमने सामने हो गए। राज ठाकरे को बाला साहेब द्वारा उद्धव को आगे बढ़ाना रास नहीं आया। उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से अपनी पार्टी बना ली और 2009 विधानसभा चुनाव में 13 सीट जीत लीं। मगर जल्द ही उन्होंने अपनी चमक खोनी शुरू कर दी।
धनंजय मुंडे ने भी लिया अलग होने का फैसला
धनंजय मुंडे ने भी भाजपा के पूर्व नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे के साथ अपनी राहें जुदा कर ली थीं। धनंजय को अपनी चचेरी बहन पंकजा मुंडे के बढ़ते कद से समस्या होने लगी थी। बाद में धनंजय ने एनसीपी का दामन थाम लिया और 2014 में विपक्ष के नेता बन गए। 2019 में उन्होंने अपनी बहन पंकजा को चुनाव में हराया।