Maharashtra Political Crisis: सियासत के खेल में क्या इतने कच्चे खिलाड़ी हैं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे?
एनसीपी प्रमुख शरद पवार की सांसद पुत्री सुप्रिया सुले के एक करीबी नेता का कहना है कि शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पवार ने कई बार ताकीद किया था। बताते हैं राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद भी उद्धव ठाकरे नहीं संभले...
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शिवसेना के सांसद संजय राउत बेपरवाही दिखाते हुए कहते हैं कि क्या होगा? बहुत होगा तो सत्ता जाएगी? इससे ज्यादा तो कुछ नहीं होगा? शिवसेना के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता का कहना है कि तेजी से स्थिति बदल रही है। एकनाथ शिंदे के साथ गए नितिन देशमुख वापस लौट आए हैं। आप इंतजार कीजिए। महाराष्ट्र के विधानसभा में मतदान (फ्लोर टेस्ट) तक स्थिति बहुत बदल जाएगी। इसके सामानांतर कांग्रेस और एनसीपी के भी कुछ नेता हैं। वह नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राजनीति के बड़े कच्चे खिलाड़ी निकले।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार की सांसद पुत्री सुप्रिया सुले के एक करीबी नेता का कहना है कि शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पवार ने कई बार ताकीद किया था। बताते हैं राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद भी उद्धव ठाकरे नहीं संभले। कांग्रेस के महाराष्ट्र में वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और उसके नेता देवेंद्र फडणवीस लगातार राज्य सरकार को अपदस्थ करने में लगे थे। सूत्र का कहना है कि बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हुआ है, लेकिन इसका कोई न कोई समाधान निकल आएगा।
उद्धव की अकड़ और शिंदे की महत्वाकांक्षा ने बिगाड़ा खेल
महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से देखने वालों का कहना है कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे शुरू से ही महत्वाकांक्षी रहे हैं। महाविकास अघाड़ी की सरकार में भी वह उपमुख्यमंत्री बनना चाहते थे। बताते हैं काफी समय से एकनाथ शिंदे नाराज चल रहे थे। वह राज्यसभा के लिए मतदान के बाद उद्धव ठाकरे से मिलने गए थे, लेकिन उद्धव ने उन्हें समय नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी के ठाणे से नेता ने बताया कि यह हमारी सहयोगी दल का आंतरिक मामला है। इस पर हमें कुछ नही बोलना है। कुरेदने पर वह कहते हैं कि उद्धव ठाकरे अपने विधायकों, सांसदों, कार्यकर्ताओं के लिए न के बराबर उपलब्ध रहते थे। इसलिए पार्टी के भीतर नाराज हो रहे विधायकों को वह भांप नहीं पाए। सूत्र का कहना है कि कई बार वह बड़े नेताओं का फोन उठाने से भी परहेज करते थे।
शिंदे के लिए बहुत आसान नहीं है राह
शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने खुद को असली और बाला साहब ठाकरे का असली वारिस बताया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी फेसबुक लाइव में शिवसेना को बाला साहब की ही शिवसेना बताया। ठाकरे ने कहा कि हम हिंदुत्व से भटके नहीं हैं। हमारे हिंदुत्व में कोई बदलाव नहीं आया है। उद्धव ने कहा कई विधायकों के उन्हें फोन आ रहे हैं। ठाकरे के सामानांतर लोकसभा में शिवसेना के एक सांसद का कहना है कि फ्लोर टेस्ट के आधार पर ही निर्णय होगा। यह स्थिति एकनाथ शिंदे के लिए बहुत आसान नहीं है। इसलिए अभी इंतजार कीजिए। सूत्र का कहना है कि एकनाथ शिंदे शिवसेना के दो फाड़ हो जाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति भी इतनी आसान नहीं है। माना जा रहा है कि शिवसेना भी वेट एंड वॉच की रणनीति पर चल रही है। इस दौरान उद्धव ठाकरे के सबसे बड़े सलाहकार शरद पवार हैं। एनसीपी प्रमुख ने बुधवार को भी उद्धव से बात की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी उद्धव से बात की और एकजुटता का वादा किया।
उद्धव ने कहा सामने आइए, मैं मातोश्री जाने के लिए तैयार हूं.....
उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। वह मातोश्री में जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन एकनाथ शिंद उनके मुख्यमंत्री होने का सवाल सूरत से क्यों उठा रहे हैं। उन्हें सामने आकर बैठना चाहिए। उद्धव ने कहा कि मैं इस्तीफा देता हूं, मैं इस्तीफा लिखकर तैयार रखता हूं, लेकिन पहले सामने आइए। गद्दारी क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह चुनौती का सामना करने वाले आदमी हैं। चुनौती से डरते नहीं। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री पद छोडऩे के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरे पद छोडऩे के बाद कोई शिवसैनिक ही महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने।
बाला साहब तो चाहते थे राज ठाकरे हों उत्तराधिकारी
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेताओं की यही टीस है। राज ठाकरे का दर्द भी। शिवसेना और बाला साहब ठाकरे को समझने वाले राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे अपने उत्तराधिकारी के तौर पर राज ठाकरे को तैयार कर रहे थे। शिवसेना संस्थापक की नजर में उद्धव ठाकरे उनके उत्तराधिकारी नहीं थे, लेकिन बाद में बदली परिस्थितियों और उद्धव ठाकरे के दबाव में बाला साहब ठाकरे को शांत रह जाना पड़ा।