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Maharashtra: मुंबई की जर्जर इमारतों के मरम्मत में गड़बड़ियों का आरोप, कम लागत वाले टेंडरों की होगी जांच

Wed, 10 Dec 2025 11:06 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 10 Dec 2025 11:06 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार ने दक्षिण मुंबई की सिस्ड इमारतों की मरम्मत में अनुमान से काफी कम लागत वाले टेंडरों पर गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद जांच के आदेश दिए। 

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Maharashtra Orders Low-Cost Tenders for Repair of Mumbai Cessed Buildings Amid Irregularity Allegations
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई की पुरानी और जर्जर ‘सिस्ड इमारतों’ की मरम्मत के लिए जारी किए गए टेंडरों में अनुमानित लागत से 100 से 140 प्रतिशत कम बोली लगने के मामले पर महाराष्ट्र सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। यह कदम विधानसभा में हुई बहस के बाद उठाया गया, जहां मरम्मत कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया।

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16,000 सिस्ड इमारतों पर चिंता, कांग्रेस विधायक ने उठाया मुद्दा
दक्षिण मुंबई की लगभग 16,000 सिस्ड इमारतों के मामले पर कॉलिंग अटेंशन मोशन के दौरान कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि एमएचएडीए द्वारा जारी टेंडरों में असामान्य रूप से कम बोलियां आ रही हैं, जो संभावित भ्रष्टाचार और घटिया गुणवत्ता का संकेत है। पटेल ने आरोप लगाया कि ठेकेदार मरम्मत के नाम पर अवैध मंजिलें खड़ी कर देते हैं और नए फ्लैट बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। सात मंजिला इमारतों में दो या अधिक अवैध मंजिलें जोड़ दी जाती हैं।
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'जांच होगी, दोषी ठेकेदारों की छुट्टी'
गृह राज्य मंत्री शंभूराज देसाई ने स्वीकार किया कि उन्हें भी ऐसे मामलों की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता इस पूरे मामले की जांच करेंगे और दोषी पाए गए ठेकेदारों के टेंडर तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे।


सुधार की मांग:- 79A संशोधन से हटे स्टे को लेकर चिंता
अमीन पटेल ने सरकार से मांग की कि महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट एक्ट की धारा 79A में किए गए संशोधन पर लगी रोक को हटाने के लिए प्रयास बढ़ाए जाएं। यह संशोधन एमएचएडीए को बेहद जर्जर (C-1 श्रेणी) इमारतों को अधिग्रहित करने का अधिकार देता है। बंबई हाईकोर्ट ने इस संशोधन पर जुलाई में स्टे लगा दिया था। पटेल ने चेतावनी दी अगर इन इमारतों को अधिग्रहित नहीं किया गया तो आने वाले मानसून में इनके ढहने का खतरा है, जिससे सैकड़ों जानें जोखिम में पड़ सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 15 जनवरी को
मंत्री देसाई ने बताया कि एमएचएडीए ने अगस्त में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश होंगे। उन्होंने कहा हम सुप्रीम कोर्ट को बताएंगे कि 79A लागू करना जरूरी है, क्योंकि यह इंसानी जान बचाने से जुड़ा मामला है।

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