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Maharashtra: अपहरण मामले में सात साल की बच्ची की मां को मिली जमानत, अदालत ने कहा- मां का ममत्व और स्नेह जरूरी

Sun, 17 Aug 2025 03:47 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 17 Aug 2025 03:47 PM IST
सार

मुंबई की दिंडोशी अदालत ने ने 2013 के अपहरण मामले में गिरफ्तार महिला को जमानत दी। अदालत ने कहा कि किसी बच्चे को उसके प्राकृतिक अभिभावक के स्नेह से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। महिला की अपनी सात वर्षीय बेटी तीन साल से अनाथालय में है और मां से नहीं मिली। हालांकि इस महिला पर भी एक बच्ची के अपहरण का आरोप है और इसीलिए वो जेल में है।

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Maharashtra mumbai court justice give bail to mother of seven years daughter for taking caring love affection
कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Freepik

विस्तार

मुंबई की एक अदालत ने कहा कि किसी भी बच्चे को उसके प्राकृतिक अभिभावक के स्नेह से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने अपहरण के गंभीर मामले में गिरफ्तार एक महिला को जमानत दे दी। हालांकि महिला पर 2013 में सात वर्षीय बच्ची के अपहरण का आरोप है। यह महिला खुद भी सात साल की बेटी की मां है। इस महिला की बेटी तीन साल से  अंधेरी के एक बाल भवन में रह रही है। 
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दरअसल, ये पूरा मामला साल 2013 का है, जब मुंबई के डीएन नगर थाने में एक महिला ने अपनी सात वर्षीय बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बच्ची स्कूल से घर नहीं लौटी थी। लगभग नौ साल तक वह बच्ची लापता रही। अगस्त 2022 में एक पड़ोसी को वीडियो कॉल के दौरान लापता बच्ची जैसी दिखने वाली लड़की नजर आई। इसके बाद पीड़िता की मां ने अपनी बेटी को पहचान लिया और पुलिस ने महिला और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया। 
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बच्ची का बयान और उत्पीड़न
बचाई गई लड़की ने बयान दिया कि 2013 में आरोपियों ने उसे आइसक्रीम का लालच देकर अपने साथ ले गए। पहले उसे गोवा ले जाया गया और कई महीने वहीं रखा गया। फिर वे मुंबई के विले पार्ले में चार महीने तक रहे और उसके बाद उसे दोबारा गोवा ले गए। लड़की ने बताया कि आरोपियों ने उसे कर्नाटक के एक स्कूल में भी दाखिल कराया और बाद में मुंबई लाकर घर में बंधक बनाकर काम करवाया। उन्होंने उससे घरेलू कामकाज के अलावा बेबीसिटिंग करवाई और उसकी कमाई खुद रखी। बच्ची ने यह भी आरोप लगाया कि उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
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अदालत की दलील और जमानत
दिंडोशी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. एम. तकालिकर ने माना कि महिला 2022 से जेल में है, जबकि अब तक ट्रायल आगे नहीं बढ़ा। इस दौरान न तो गवाहों की गवाही हुई और न ही मुकदमे में कोई खास प्रगति। इसीलिए अदालत ने कहा कि गंभीर आरोप होने के बावजूद महिला को जमानत देना उचित है। साथ ही ये भी कहा कि बच्ची को उसकी मां से दूर रखना सही नहीं है। 

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फिलहाल पति अभी जेल में ही है
महिला को अदालत से जमानत मिल गई है, जबकि उसका पति अब भी जेल में है। अदालत ने साफ किया कि आरोपी मां को उसकी बेटी से मिलने का अधिकार मिलना चाहिए क्योंकि प्राकृतिक अभिभावक का स्नेह किसी भी बच्चे से छीना नहीं जा सकता। वहीं, इस मामले में पुलिस की ओर से अप्रैल 2025 में एक रिपोर्ट दायर की गई थी जिसमें कहा गया कि पीड़ित बच्ची फिलहाल ट्रेस नहीं हो पा रही है। अब अदालत के आदेश के बाद आरोपी मां को अपनी बेटी से मिलने का अवसर मिलेगा।


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