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अग्निशमन विभाग के लिए आरक्षित जमीन पर महाराष्ट्र के मंत्री ने बनवाया बंगला

Tue, 27 Mar 2018 11:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 27 Mar 2018 11:16 AM IST
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maharashtra minister builds bungalow on land that was reserved  for fire brigade station

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख विवादों में घिर चुके हैं। इसकी वजह बना है उनका सोलापुर का बंगला। यह बंगला जिस जमीन पर बनवाया गया है वह जमीन अग्निशमन विभाग के लिए आवंटित है। विकास योजना के मुताबिक यह जमीन अग्निशमन विभाग और एक गार्डन के लिए आरक्षित है। 

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ये बतातें है रिकॉर्ड

रिकॉर्ड बताते हैं कि बेशक यह जमीन आवंटित है लेकिन बावजूद इसके सोलापुर के बिल्डिंग परमिशन सेक्शन ने निर्माण कार्य के लिए दो बार मंजूरी दी थी। एक बार मंजूरी अप्रैल 2004 में दी गई और दूसरी बार मंजूरी जुलाई 2012 में दी गई। 
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दूसरी बार मिली मंजूरी के छह साल बाद भी जमीन आरक्षित ही है। सोलापुर नगर निगम के सिटी इंजीनियर ने अब देशमुख और उनके साथ बंगले के अन्य मालिकों को एक नोटिस जारी कर नगर निगम कमीश्नर अविनाश धकाने के समक्ष सुनवाई के लिए कहा है। 
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दो बार सुनवाई स्थगित होने के बाद अगली सुनवाई सोमवार को होनी थी। जहां दोनों पार्टियां को अपना पक्ष कमीश्नर के समक्ष रखना था। लेकिन अब सुनवाई के लिए बुधवार का दिन रखा गया है। यह केस सितंबर 2000 का है जब देशमुख समेत अन्य नौ लोगों ने मिलकर मजेरवाडी समेत सोलापुर में दो एकड़ जमीन 50 लाख रुपये में खरीदी थी। 

सोलापुर विकास योजना, 1978, और 1997 की विकास योजना के अनुसार जब जमीन खरीदी गई उस समय यह आरक्षित थी। इसके बाद नवंबर 2000 में देशमुख और अन्य लोगों ने बिल्डिंग परमिशन सेक्शन को लेटर लिख निर्माण कार्य के लिए इजाजत मांगी। लेटर का जवाब जनवरी 2001 को आया जिसमें मंजूरी देने से इंकार कर दिया गया था और कहा गया कि यह जमीन महाराष्ट्र प्रदेश और नगर विकास एक्ट (एमटीआरपी) के तहत अग्निशमन विभाग और मिनी शॉपिंग सेंटर के लिए आरक्षित है।

विकास योजना में भी आरक्षित थी जमीन

maharashtra minister builds bungalow on land that was reserved  for fire brigade station

नगर निगम ने दी सफाई

निगम द्वारा दो बार दी गई मंजूरी पर निगम का कहना है कि यह जमीन आरक्षित थी इस कारण मंजूरी नहीं दी गई। लेकिन अप्रैल 2004 में देशमुख सोलापुर से बीजेपी विधायक थे और उन्होंने नगर निगम को शपथपत्र दिया जिसमें उसने कहा था कि उन्होंने राज्य सरकार को जमीन पर से आरक्षण खत्म करने का प्रस्ताव दिया है, निर्माण कार्य के लिए इजाजत मांगी और सरकार के इस मामले में आखिरी फैसले पर दृढ़ रहने के लिए वादा किया। यानि दो बार मंजूरी दी गई लेकिन फिर भी आखिरी फैसला राज्य सरकार का ही था। 

दायर हुई याचिका

साल 2014 में आरक्षित जमीन पर निर्माण करने पर सोलापुर के कार्यकर्ता महेश चवन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अगस्त 2016 में कोर्ट ने चवन की याचिका नगर निगम कमिश्नर को सौंप दी और कहा कि नागरिक प्रमुख इस पर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाएंगे। चवन का इस पर कहना है कि नागरिक प्रमुख ने सुनवाई तो रखी पर कोई ऑर्डर पास नहीं किया। 

हालांकि देशमुख ने मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है। वहीं नितिन भोपले नामक एक अन्य कार्यकर्ता ने सोलापुर नगर निगम के खिलाफ 2017 में याचिका दायर की थी और कहा था कि निगम ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा चवन की याचिका में 2016 में जो ऑर्डर दिया था उसका निगम द्वारा पालन नहीं किया गया। जिसमें हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए समय सीमा निश्चित की थी लेकिन नागरिक प्रमुख ने काम को करने में असफल रहे। इसके बाद फरवरी 2018 में सोलापुर नगर निगम ने देशमुख और अन्य के खिलाफ नोटिस जारी कर सुनवाई में मौजूद रहने के लिए कहा। यह सुनवाई पहले तो आज के दिन होनी थी लेकिन अब बुधवार को होगी।  

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