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'महाराष्ट्र में बिहार जैसी जाति जनगणना की वकालत', मराठा-धनगर आरक्षण पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बड़ा बयान
Mon, 23 Oct 2023 07:29 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 23 Oct 2023 07:29 PM IST
सार
अजित पवार ने बिहार में कराई गई जातिगत जनगणना की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी जाति जनगणना कराने की वकालत की है। मराठा और धनगर समुदाय की जनता को आरक्षण का लाभ देने के सवाल पर भी डिप्टी सीएम अजित पवार ने सकारात्मक रूख दिखाया है।
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बिहार जैसी जाति जनगणना की वकालत की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मराठा और धनगर समुदाय को आरक्षण देने की मांग पर सकारात्मक है। महाराष्ट्र में जोर पकड़ रही मराठा आरक्षण की डिमांड के बीच अजित पवार ने कहा महाराष्ट्र में भी बिहार जैसी जनगणना कराई जानी चाहिए।
बिहार जैसी जाति जनगणना महाराष्ट्र में भी
पवार ने सोमवार को कहा, बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराई। इसी तर्ज पर "जाति जनगणना" महाराष्ट्र में भी होनी चाहिए। इस तरह के कदम से सभी समुदायों की सटीक आबादी का पता लगाने में मदद मिलेगी। संख्या की सही जानकारी होने पर उसके अनुसार आनुपातिक लाभ दिया जा सकेगा।
सटीक जनसंख्या का पता लगेगा
सोलापुर के माधा में जनसभा के दौरान पवार ने कहा, राज्य सरकार मराठा समुदाय की आरक्षण की मांगों के बारे में सकारात्मक है। उन्होंने कहा, "मेरी राय है कि यहां जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। बिहार सरकार इसे करा चुकी है। इस तरह की कवायद से हमें ओबीसी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यकों, सामान्य वर्ग की सटीक जनसंख्या का पता चल जाएगा। जनसंख्या के अनुपात के अनुसार लाभ दिए जाते हैं।
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कई हजार करोड़ रुपये खर्च होने से ऐतराज नहीं
उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बिहार में जाति सर्वेक्षण के विवरण पर बात होने का जिक्र किया। पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में भी यह अभ्यास किया जाना चाहिए, भले ही इसमें "कुछ हजार करोड़ रुपये" खर्च हो जाएं। उन्होंने कहा कि इससे "जनता के सामने स्पष्ट तस्वीर" आएगी।
62 फीसद आरक्षण में किसे मिल रहा लाभ
पवार ने कहा कि राज्य सरकार मराठा और धनगर समुदायों को कोटा का लाभ देने के बारे में सकारात्मक है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के कदम से 62 प्रतिशत आरक्षण (एससी, एसटी और ओबीसी के लिए 52 प्रतिशत और साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत) आरक्षण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में खारिज नहीं होना चाहिए कानून
उन्होंने कहा, "अगर मराठा और अन्य समुदायों को मौजूदा 52 प्रतिशत से आरक्षण दिया जाता है, तो इस खंड में लाभ प्राप्त करने वाले समूहों को निराशा होगी। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान में 62 प्रतिशत से ऊपर दिया गया कोटा उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी रूप से टिकाऊ हो।
ओबीसी समूह के लोगों की आपत्ति
पवार ने कहा कि आरक्षण की मांग करने वाले कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने मराठों के लिए कुनबी प्रमाण पत्र की मांग की है। उनकी मांग है कि मराठों को भी अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत लाभ मिले। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ओबीसी श्रेणी के समूह ज्ञापन सौंप रहे हैं कि उनके क्षेत्र में किसी अन्य समुदाय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में सरकार हर पक्ष पर विचार कर रही है।
अलग-अलग जातियों की मांग
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विशेषज्ञों और प्रसिद्ध वकीलों के साथ चर्चा करके कुनबी प्रमाण पत्र प्रदान करने की मांग पर विचार कर रही है। कोई भी कदम जो कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, वह लोगों को यह दावा करने पर मजबूर कर देगा कि सत्तारूढ़ सरकार ने उन्हें धोखा दिया है। इसी साल दो जुलाई को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल हुए, अजित पवार ने कहा, धनगर समुदाय अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल होने की मांग कर रहा है, जबकि आदिवासी इसका विरोध कर रहे हैं।
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बिहार जैसी जाति जनगणना महाराष्ट्र में भी
पवार ने सोमवार को कहा, बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराई। इसी तर्ज पर "जाति जनगणना" महाराष्ट्र में भी होनी चाहिए। इस तरह के कदम से सभी समुदायों की सटीक आबादी का पता लगाने में मदद मिलेगी। संख्या की सही जानकारी होने पर उसके अनुसार आनुपातिक लाभ दिया जा सकेगा।
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सटीक जनसंख्या का पता लगेगा
सोलापुर के माधा में जनसभा के दौरान पवार ने कहा, राज्य सरकार मराठा समुदाय की आरक्षण की मांगों के बारे में सकारात्मक है। उन्होंने कहा, "मेरी राय है कि यहां जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। बिहार सरकार इसे करा चुकी है। इस तरह की कवायद से हमें ओबीसी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यकों, सामान्य वर्ग की सटीक जनसंख्या का पता चल जाएगा। जनसंख्या के अनुपात के अनुसार लाभ दिए जाते हैं।
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कई हजार करोड़ रुपये खर्च होने से ऐतराज नहीं
उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बिहार में जाति सर्वेक्षण के विवरण पर बात होने का जिक्र किया। पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में भी यह अभ्यास किया जाना चाहिए, भले ही इसमें "कुछ हजार करोड़ रुपये" खर्च हो जाएं। उन्होंने कहा कि इससे "जनता के सामने स्पष्ट तस्वीर" आएगी।
62 फीसद आरक्षण में किसे मिल रहा लाभ
पवार ने कहा कि राज्य सरकार मराठा और धनगर समुदायों को कोटा का लाभ देने के बारे में सकारात्मक है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के कदम से 62 प्रतिशत आरक्षण (एससी, एसटी और ओबीसी के लिए 52 प्रतिशत और साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत) आरक्षण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में खारिज नहीं होना चाहिए कानून
उन्होंने कहा, "अगर मराठा और अन्य समुदायों को मौजूदा 52 प्रतिशत से आरक्षण दिया जाता है, तो इस खंड में लाभ प्राप्त करने वाले समूहों को निराशा होगी। हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान में 62 प्रतिशत से ऊपर दिया गया कोटा उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी रूप से टिकाऊ हो।
ओबीसी समूह के लोगों की आपत्ति
पवार ने कहा कि आरक्षण की मांग करने वाले कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने मराठों के लिए कुनबी प्रमाण पत्र की मांग की है। उनकी मांग है कि मराठों को भी अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत लाभ मिले। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ओबीसी श्रेणी के समूह ज्ञापन सौंप रहे हैं कि उनके क्षेत्र में किसी अन्य समुदाय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में सरकार हर पक्ष पर विचार कर रही है।
अलग-अलग जातियों की मांग
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विशेषज्ञों और प्रसिद्ध वकीलों के साथ चर्चा करके कुनबी प्रमाण पत्र प्रदान करने की मांग पर विचार कर रही है। कोई भी कदम जो कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, वह लोगों को यह दावा करने पर मजबूर कर देगा कि सत्तारूढ़ सरकार ने उन्हें धोखा दिया है। इसी साल दो जुलाई को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल हुए, अजित पवार ने कहा, धनगर समुदाय अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल होने की मांग कर रहा है, जबकि आदिवासी इसका विरोध कर रहे हैं।