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Maharashtra: सुल्तानपुर गांव का नाम बदलकर किया 'राहुल नगर', 26/11 मुंबई हमले में शहीद को ऐसे दी श्रद्धांजलि

Fri, 25 Nov 2022 04:02 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 25 Nov 2022 04:02 PM IST
सार

राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) के कांस्टेबल राहुल शिंदे ने 14 साल पहले मुंबई के आतंकी हमले को दौरान शहादत दी थी। ताज पैलेस होटल के अंदर प्रवेश करने वाले वह पहले पुलिसकर्मी थे। 

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Maharashtra Locals rename village after 26/11 martyr  Sultanpur now becomes Rahul Nagar
दिवंगत राहुल शिंदे, 26/11 मुंबई हमला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

महाराष्ट्र के सुल्तानपुर गांव को अब 'राहुल नगर' के रूप में जाना जाएगा। स्थानीय निवासियों ने अपने गांव के उस निवासी की याद में इसका नाम बदल दिया है, जिन्होंने 26/11 मुंबई हमलों के दौरान आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। 600 घरों वाले इस गांव की आबादी करीब 1,000 है।

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राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) के कांस्टेबल राहुल शिंदे ने 14 साल पहले मुंबई के आतंकी हमले को दौरान शहादत दी थी। सोलापुर जिले की माधा तहसील के सुल्तानपुर के रहने वाले शिंदे को जैसे ही दक्षिण मुंबई के ताजमहल पैलेस होटल में फायरिंग की सूचना मिली, उन्होंने इस होटल के अंदर प्रवेश किया। होटल के अंदर प्रवेश करने वाले वह पहले पुलिसकर्मी थे। आतंकियों ने शिंदे के पेट में एक गोली मारी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। 
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उन्हें मरणोपरांत राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया। वहीं सुल्तानपुर के निवासियों ने अपने गांव का नाम बदलने का फैसला लिया। क्योंकि राहुल शिंदे का जन्म और पालन-पोषण इसी गांव में हुआ था। हालांकि आधिकारिक नाम बदलने की रस्म अभी बाकी है। 
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दिवंगत राहुल के पिता सुभाष विष्णु शिंदे ने 26/11 हमले की 14वीं बरसी की पूर्व संध्या पर कहा, गांव नाम बदलने के लिए सभी सरकारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब हम आधिकारिक नामकरण समारोह का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हम गणमान्य व्यक्तियों और मेहमानों से तारीखों की पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। 


सुभाष विष्णु शिंदे ने कहा, मैं पिछले दस वर्षों से इस पर सरकार के साथ काम कर रहा था। आखिरकार यह हो गया। मैं अब संतुष्ट हूं। मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि गांव अब मेरे बेटे के नाम पर है। 

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