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महाराष्ट्र : भाजपा व शिवसेना की तल्खी बरकरार, कांग्रेस विपक्ष में बैठने को तैयार

Sat, 02 Nov 2019 05:54 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 02 Nov 2019 05:54 AM IST
सार

  • महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भाजपा-शिवसेना में बढ़ी तल्खी।
  • शिवसेना ने कहा- हम सीएम पद के बंटवारे के 50-50 के फॉर्मूले से पीछे नहीं हटेंगे।
  • सरकार गठन में देरी हुई तो राज्य में लगेगा राष्ट्रपति शासन: भाजपा नेता

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Maharashtra Live Updates Shiv Sena-BJP are trying to sought out issues, congress-ncp watching them
उद्धव ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

महाराष्ट्र में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर जारी खींचतान जारी है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से होगा। राउत ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा कि भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से होगा।

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शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने आज फिर कहा, 'शिवसेना ने ठान लिया तो बहुमत मिल ही जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। शिवसेना-भाजपा में चुनाव से पहले जो हुई थी उसी पर भाजपा आगे बढ़े। महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार चाहिए। महाराष्ट्र के लोगों ने 50-50 फार्मूले के आधार पर सरकार बनाने का जनादेश दिया है। वह शिवसेना का मुख्यमंत्री चाहते हैं।'
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राउत ने कहा कि सरकार गठन को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। भाजपा के अल्टीमेटम को लेकर राउत ने कहा कि भाजपा को कोई अल्टीमेटम नहीं, वे बड़े लोग हैं। वहीं अपने ट्विटर पर उन्होंने लिखा, 'साहिब, मत पालिए, अहंकार को इतना, वक्त के सागर में कईं, सिकन्दर डूब गए।' 

शपथ ग्रहण का शिवसेना करेगी बहिष्कार

शिवसेना सूत्रों का कहना है कि अगर भाजपा बगैर शिवसेना अल्पमत सरकार बनाती है तो पार्टी देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करेगी। कहा जा रहा है कि भाजपा ने पांच नवंबर को शपथ ग्रहण के लिए मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम को बुक कराया है और समारोह में फडणवीस के साथ भाजपा के आठ से 10 मंत्री शपथ ग्रहण कर सकते हैं।

सोनिया गांधी के साथ बैठक में हुआ मंथन


इस बीच राज्य में सरकार गठन को लेकर भाजपा और शिवसेना की उठापटक को देखते हुए अपनी भूमिका की संभावना को देखते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। बैठक में सरकार बनाने के लिए शिवसेना को समर्थन नहीं देने का फैसला लिया गया। राज्य के वरिष्ठ नेताओं सुशील कुमार शिंदे तथा संजय निरुपम ने पार्टी को सत्ता के खेल से दूर रहने की नसीहत दी थी। हालांकि राज्य के कुछ वरिष्ठ नेता सरकार गठन के लिए शिवसेना को एनसीपी की मदद से समर्थन देने की पैरवी भी कर रहे हैं। 

शरद पवार के नेतृत्व में सरकार गठन की भी अटकलें


सरकार गठन को लेकर कई अलग-अलग विकल्पों की चर्चाओं के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार के नेतृत्व में सरकार गठन की अटकलें लगने लगी हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के सख्त खिलाफ हैं। ऐसे शरद पवार के नेतृत्व एनसीपी सरकार बनाए और कांग्रेस तथा शिवसेना उसे समर्थन दें। कहा जा रहा है कि इस विकल्प पर चर्चा के लिए शरद पांच नवंबर को दिल्ली में सोनिया से मुलाकात कर सकते हैं।

विपक्ष में बैठेगी एनसीपी-कांग्रेस: अजीत पवार

एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा है कि उनकी पार्टी और सहयोगी दल कांग्रेस विपक्ष में बैठेंगे। पवार ने कहा कि चुनाव के परिणाम से साफ है कि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है और वह ऐसा ही करेंगे। उनकी यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब यह अटकलें चल रही हैं कि शिवसेना और एनसीपी राज्य में सरकार बनाएगी और कांग्रेस उन्हें बाहर से समर्थन देगी।

पवार ने शिवसेना और भाजपा के बीच जारी तनातनी पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना सरकार के गठन पर चर्चा करके किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकती हैं।

वहीं एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि भाजपा-शिवसेना को जनता ने स्थिर सरकार बनाने का जनमत दिया है। हम चाहते हैं कि वे सरकार बनाएं और बहुमत साबित करें। अगर वे बहुमत साबित करने में नाकाम रहते हैं तो हम निश्चित रूप से सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष बाबासाहेब थोराट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण ने बृहस्पतिवार की सुबह में शरद पवार से मुलाकात की थी। बाद में तीनों पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।

निरुपम ने भाजपा-शिवसेना खींचतान को बताया ड्रामा

कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने अपनी पार्टी को भाजपा-शिवसेना के ड्रामे में न पड़ने के लिए कहा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'मैं फिर कहना चाहता हूं कि कांग्रेस को भाजपा-शिवसेना के ड्रामे में नहीं पड़ना चाहिए। यह फर्जी है। सत्ता में ज्यादा हिस्सेदारी  हड़पने के लिए यह उनकी अस्थायी लड़ाई है। वह दोनों दोबारा साथ हो जाएंगे और हमें गालियां देंगे। कैसे कुछ कांग्रेस नेता शिवसेना को समर्थन देने की बात सोच सकते हैं? क्या उनका दिमाग खराब है।?' 

भाजपा नेता ने दिए राष्ट्रपति शासन के संकेत

भाजपा नेता सुधीर मुंगटीवार ने शुक्रवार को कहा कि यदि सात नवंबर तक सरकार नहीं बनती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब भाजपा-शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर खींचतान चल रही है। 24 अक्तूबर को विधानसभा नतीजे आने के बाद छह दिन बीत चुके हैं लेकिन भाजपा-शिवसेना के बीच एकराय नहीं बन पा रही है।

मुंगटीवार ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, 'महाराष्ट्र की जनता ने किसी एक पार्टी को नहीं बल्कि महायुति (भाजपा-शिवसेना गठबंधन) को जनादेश दिया है। हमारागठबंधन फेविकोल और अंबुजा सीमेंट से ज्यादा मजबूत है। एक निश्चित समय के अंदर नई सरकार का गठन होना जरूरी है वरना राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना होगा।'

भाजपा ने दिया शिवसेना को अल्टीमेटम

 महाराष्ट्र में सरकार के गठन में लगातार विलम्ब को देखते हुए भाजपा ने शिवसेना को एक नवंबर की रात तक का अल्टीमेटम दिया है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा शिवसेना को उपमुख्यमंत्री पद के साथ मंत्रिमंडल में 13 स्थानों का प्रस्ताव दे चुकी है, जिस पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने प्रस्ताव के साथ एक नवंबर की रात तक जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही साफ कर दिया है कि शिवसेना की तरफ से जवाब न आने पर पार्टी अन्य विकल्पों पर विचार करेगी।

कांग्रेस बोली, सही समय पर लेंगे फैसला 

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों पर उसकी निगाह है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के नेतृत्व में महाराष्ट्र कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पार्टी नेता के.सी.वेणुगोपाल से मुलाकात की। 

बैठक के बाद अशोक चव्हाण ने कहा, 'भाजपा अपने सहयोगियों के साथ वादा निभाने में कामयाब नहीं रही। इसी वजह से महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट पैदा हुआ है। हम मौजूदा परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं और सही समय आने पर फैसला लेंगे।' अशोक चव्हाण व अन्य नेता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने पहुंचे।  

 

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