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ख्वाजा यूनुस की हिरासत में मौत का मामला: महाराष्ट्र सरकार ने कहा- 22 मार्च तक नए लोक अभियोजक की नियुक्ति नहीं होगी

Fri, 18 Feb 2022 09:24 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क अमर उजाला, मुम्बई
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मुम्बई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 18 Feb 2022 09:24 PM IST
सार

ख्वाजा यूनुस की हिरासत में मौत के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में कहा कि वह नए विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) की नियुक्ति नहीं करेगी। यूनूस की मां आसिया बेगम ने पिछले एसपीपी धीरज मिराजकर को मामले से हटाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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Maharashtra government will not appoint new SPP in case of custodial death of Khwaja Yunus
मुंबई उच्च न्यायालय - फोटो : social media

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि वह 2003 के ख्वाजा यूनुस की हिरासत में मौत के मामले में नए विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) की नियुक्ति नहीं करेगी। इस मामले में बर्खास्त सिपाही सचिन वाजे सहित चार पुलिसकर्मी शामिल थे। यह सभी  22 मार्च तक ट्रायल का सामना कर रहे हैं।
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यूनुस की मां आसिया बेगम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने यह बयान न्यायमूर्ति पीबी वराले और न्यायमूर्ति एसपी तावड़े की पीठ के समक्ष दिया। इस याचिका में पिछले एसपीपी धीरज मिराजकर को मामले से हटाने को चुनौती दी गई थी। 2018 में मिराजकर को हटाए जाने के बाद यूनुस की मां आसिया बेगम ने 2018 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
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शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कुंभकोनी ने बंबई हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के अधिकारियों ने मिराजकर से बात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य कारणों सहित कई अन्य कारणों का हवाला देते हुए  इस मामले में एसपीपी के रूप में काम करने में असमर्थता जाहिर की थी।
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बेगम के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता मिहूर देसाई ने बंबई हाईकोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता भी मिराजकर से बात करना चाहता था और पुष्टि करना चाहता था कि बाद में इस मामले में एसपीपी के रूप में वह काम काम कर पाएंगे या नहीं। सुनवाई के दौरान देसाई ने अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि महाराष्ट्र सरकार  तब तक नया एसपीपी नियुक्त न करे।

यूनुस की मां आसिया बेगम द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि मिराजकर को सितंबर 2015 में एसपीपी नियुक्त किया गया था, लेकिन अप्रैल 2018 में अचानक उन्हें पद से हटा दिया गया था।
बेगम ने अपनी याचिका में दावा किया कि मिराजकर को हटाने का फैसला राज्य सरकार ने तब लिया जब उन्होंने निचली अदालत में एक आवेदन दायर कर सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी प्रफुल्ल भोसले और तीन अन्य पुलिसकर्मियों को समन जारी करने और उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था। 

इस पर राज्य सरकार ने पहले बंबई हाईकोर्ट को बताया था कि मिराजकर को मामले से हटाने का उसका फैसला इन चार अधिकारियों की सुरक्षा के लिए नहीं लिया गया था। कुंभकोनी ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय से कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को मिराजकर की पुनर्नियुक्ति पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कुछ समय दिया है। कुंभकोनी ने कहा कि तब तक राज्य सरकार इस मामले में एक नया एसपीपी नियुक्त नहीं करेगी।हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के बयान को स्वीकार करते हुए इस मामले में 22 मार्च को आगे की सुनवाई की तारीख दी है।

दरअसल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर यूनुस को दिसंबर 2002 में मुंबई के उपनगर घाटकोपर में हुए बम विस्फोट के तुरंत बाद हिरासत में लिया गया था। वह कथित तौर पर 6-7 जनवरी, 2003 की रात में हिरासत से तब फरार हो गया, जब उसे विस्फोट मामले में आगे की जांच के लिए औरंगाबाद ले जाया जा रहा था। इसके बाद सीआईडी ने यूनुस को हिरासत में कथित रूप से मारने और फिर सबूत नष्ट करने के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। सीआईडी की जांच में 14 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन सरकार ने उनमें से केवल चार पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। ये चार अधिकारी सचिन वाजे, राजेंद्र तिवारी, राजाराम निकम और सुनील देसाई, वर्तमान में हत्या, सबूत गढ़ने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप, और  हिरासत में मौत के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।


मुंबई में सहायक पुलिस निरीक्षक के रूप में काम कर चुके सचिन वाजे फिलहाल एंटीलिया बम मामले में जेल में बंद हैं। उन्हें पिछले साल पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
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