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महाराष्ट्र पर फंसा सियासी पेच, शिवसेना को समर्थन देने पर कांग्रेस में हुआ मंथन
Fri, 01 Nov 2019 09:08 PM IST
अमित कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Fri, 01 Nov 2019 09:08 PM IST
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सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे महाराष्ट्र कांग्रेस नेता
- फोटो : ANI
कांग्रेस ने तय किया है कि वह महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष में ही बैठेगी। कांग्रेस ने भाजपा-शिवसेना के सत्ता संघर्ष से खुद को दूर रहने का फैसला करते हुए निर्णय लिया है कि वह शिवसेना के सरकार गठन के दावे पर उसे अपना समर्थन नहीं देगी। दिल्ली में महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बैठक में यह फैसला लिया गया है।
उधर, चुनाव नतीजों का एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद बहुमत पाने वाले भाजपा-शिवसेना गठबंधन में मुख्यमंत्री पद की खींचतान का नतीजा नहीं निकला है। दोनों तरफ से जुबानी जंग चल रही है परंतु वरिष्ठ नेता मिलकर बात करने को तैयार नहीं हैं। शिवसेना अड़ी है कि उसे ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहिए, लेकिन भाजपा पूरे पांच साल अपना मुख्यमंत्री चाहती है।
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इस बीच सुबह कांग्रेस ने भाजपा-शिवसेना की उठापटक देखते हुए सरकार निर्माण में अपनी संभावनाओं की भूमिका देखनी शुरू कर दी थी। राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे थे। हालांकि राज्य में पार्टी के सीनियर नेताओं सुशील कुमार शिंदे तथा संजय निरुपम ने कांग्रेस को सत्ता के खेल से दूर रहने की नसीहत दी थी। इस बीच भाजपा ने शिवसेना की जिद को तोड़ने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया है कि अगर राज्य में सरकार को लेकर गतिरोध सात नवंबर तक जारी रहा तो राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी की जा सकती है।
भाजपा नेता और मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने यहां कहा कि भाजपा-शिवसेना का पेंच सुलझना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद को शिवसैनिक ही मानते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में 50-50 फार्मूले का हल निकलना जरूरी है। ऐसा न होने पर राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना पडे़गा और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगेगा। उन्होंने कहा कि प्रश्न भाजपा-शिवसेना का नहीं, महाराष्ट्र की जनता का है। वहीं, तेजी से बीतते समय के बीच सरकार गठन के कुछ नए समीकरण भी मैदान में आ गए हैं।
बैठक के बाद अशोक चव्हाण ने कहा, 'भाजपा अपने सहयोगियों के साथ वादा निभाने में कामयाब नहीं रही। इसी वजह से महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट पैदा हुआ है। हम मौजूदा परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं और सही समय आने पर फैसला लेंगे।'
सरकार गठन के समीकरण इस प्रकार हैं :
- भाजपा शिवसेना को उपमुख्यमंत्री पद लेने के लिए मना लेगी।
- शिवसेना के विधायक टूटकर भाजपा से जा मिलेंगे और सरकार बनेगी।
- शिवसेना न मानी तो भाजपा अकेले सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। निर्दलियों का समर्थन उसे मिलेगा। भाजपा विश्वास मत के समय एनसीपी को सदन में न रहने के लिए राजी कर लेगी, इससे सदन के काम संख्याबल में बहुमत साबित किया जा सकेगा।
- भाजपा बहुमत सिद्ध न कर सकी तो शिवसेना सरकार बनाने का दावा करेगी। एनसीपी शामिल होकर या बाहर से उसे समर्थन दे सकती है। कुछ निर्दलीय भी शिवसेना के साथ आ सकते हैं। हो सकता है कि एनसीपी अपने 54 और कांग्रेस के 44 विधायकों के साथ सरकार बनाए और शिवसेना बाहर से समर्थन दे।
- कोई दल या गठबंधन सरकार न बना सके और राष्ट्रपति शासन लगे। सारे अधिकार राज्यपाल के हाथों में आ जाएं।
इन समीकरणों के बीच खबर है कि शिवसेना के अड़ियल रुख के बीच भाजपा सरकार बनाने के लिए आगे बढे़गी और पांच नवंबर को देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल की शपथ लेंगे। भाजपा की पूरी कोशिश शिवसेना को साथ लेकर ही सरकार बनाने की है। सूत्रों के मुताबिक फडणवीस इस बार मुंबई के वानखेडे़ स्टेडियम में शपथ लेंगे।
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उधर, चुनाव नतीजों का एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद बहुमत पाने वाले भाजपा-शिवसेना गठबंधन में मुख्यमंत्री पद की खींचतान का नतीजा नहीं निकला है। दोनों तरफ से जुबानी जंग चल रही है परंतु वरिष्ठ नेता मिलकर बात करने को तैयार नहीं हैं। शिवसेना अड़ी है कि उसे ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहिए, लेकिन भाजपा पूरे पांच साल अपना मुख्यमंत्री चाहती है।
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इस बीच सुबह कांग्रेस ने भाजपा-शिवसेना की उठापटक देखते हुए सरकार निर्माण में अपनी संभावनाओं की भूमिका देखनी शुरू कर दी थी। राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे थे। हालांकि राज्य में पार्टी के सीनियर नेताओं सुशील कुमार शिंदे तथा संजय निरुपम ने कांग्रेस को सत्ता के खेल से दूर रहने की नसीहत दी थी। इस बीच भाजपा ने शिवसेना की जिद को तोड़ने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया है कि अगर राज्य में सरकार को लेकर गतिरोध सात नवंबर तक जारी रहा तो राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी की जा सकती है।
भाजपा नेता और मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने यहां कहा कि भाजपा-शिवसेना का पेंच सुलझना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद को शिवसैनिक ही मानते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में 50-50 फार्मूले का हल निकलना जरूरी है। ऐसा न होने पर राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करना पडे़गा और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगेगा। उन्होंने कहा कि प्रश्न भाजपा-शिवसेना का नहीं, महाराष्ट्र की जनता का है। वहीं, तेजी से बीतते समय के बीच सरकार गठन के कुछ नए समीकरण भी मैदान में आ गए हैं।
Delhi: Maharashtra Congress leaders arrive at 10 Janpath to meet Congress Interim President Sonia Gandhi. pic.twitter.com/jnZ9DpbFcM
— ANI (@ANI) November 1, 2019
चव्हाण ने कहा, समय आने पर सही फैसला लेंगे
महाराष्ट्र में सरकार बनाने को चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों पर उसकी निगाह है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के नेतृत्व में महाराष्ट्र कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पार्टी नेता के.सी.वेणुगोपाल से मुलाकात की।बैठक के बाद अशोक चव्हाण ने कहा, 'भाजपा अपने सहयोगियों के साथ वादा निभाने में कामयाब नहीं रही। इसी वजह से महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट पैदा हुआ है। हम मौजूदा परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं और सही समय आने पर फैसला लेंगे।'
भाजपा ने दिया शिवसेना को अल्टीमेटम
महाराष्ट्र में सरकार के गठन में लगातार विलम्ब को देखते हुए भाजपा ने शिवसेना को एक नवंबर की रात तक का अल्टीमेटम दिया है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा शिवसेना को उपमुख्यमंत्री पद के साथ मंत्रिमंडल में 13 स्थानों का प्रस्ताव दे चुकी है, जिस पर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने प्रस्ताव के साथ एक नवंबर की रात तक जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही साफ कर दिया है कि शिवसेना की तरफ से जवाब न आने पर पार्टी अन्य विकल्पों पर विचार करेगी।शिवसेना अपनी बात पर अड़ी
शिवसेना के सांसद व प्रवक्ता संजय राउत ने आज फिर कहा, 'शिवसेना ने ठान लिया तो बहुमत मिल ही जाएगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। शिवसेना-भाजपा में चुनाव से पहले जो हुई थी उसी पर भाजपा आगे बढ़े। महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार चाहिए। महाराष्ट्र के लोगों ने 50-50 फार्मूले के आधार पर सरकार बनाने का जनादेश दिया है। वह शिवसेना का मुख्यमंत्री चाहते हैं।'सरकार गठन के समीकरण इस प्रकार हैं :
- भाजपा शिवसेना को उपमुख्यमंत्री पद लेने के लिए मना लेगी।
- शिवसेना के विधायक टूटकर भाजपा से जा मिलेंगे और सरकार बनेगी।
- शिवसेना न मानी तो भाजपा अकेले सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। निर्दलियों का समर्थन उसे मिलेगा। भाजपा विश्वास मत के समय एनसीपी को सदन में न रहने के लिए राजी कर लेगी, इससे सदन के काम संख्याबल में बहुमत साबित किया जा सकेगा।
- भाजपा बहुमत सिद्ध न कर सकी तो शिवसेना सरकार बनाने का दावा करेगी। एनसीपी शामिल होकर या बाहर से उसे समर्थन दे सकती है। कुछ निर्दलीय भी शिवसेना के साथ आ सकते हैं। हो सकता है कि एनसीपी अपने 54 और कांग्रेस के 44 विधायकों के साथ सरकार बनाए और शिवसेना बाहर से समर्थन दे।
- कोई दल या गठबंधन सरकार न बना सके और राष्ट्रपति शासन लगे। सारे अधिकार राज्यपाल के हाथों में आ जाएं।
इन समीकरणों के बीच खबर है कि शिवसेना के अड़ियल रुख के बीच भाजपा सरकार बनाने के लिए आगे बढे़गी और पांच नवंबर को देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल की शपथ लेंगे। भाजपा की पूरी कोशिश शिवसेना को साथ लेकर ही सरकार बनाने की है। सूत्रों के मुताबिक फडणवीस इस बार मुंबई के वानखेडे़ स्टेडियम में शपथ लेंगे।