मातोश्री से बाहर निकलकर आदित्य ठाकरे लिखेंगे राजनीति की नई इबारत
- उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने राजनीति में परिवार की परंपरा तोड़ दी
- आदित्य चुनाव मैदान में उतरकर राजनीति की नई इबारत लिखना चाहते हैं
- आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के भविष्य के मुख्यमंत्री हैं
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शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के पौत्र और उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने राजनीति में परिवार की परंपरा तोड़ दी है। आदित्य ठाकरे मुंबई की वर्ली सीट से चुनाव मैदान में उतरकर राजनीति की नई इबारत लिखना चाहते हैं। शिवसेना के सूत्र बताते हैं कि चुनाव लड़ने के लिए आदित्य ठाकरे को पिता उद्धव ठाकरे को मनाना पड़ा। आदित्य ठाकरे का मानना है कि बदलते परिदृश्य में जनता के बीच में रहकर ही उसकी सेवा की जा सकती है। इसके लिए चुनाव लड़ना जरूरी है।
आदित्य ठाकरे की युवा टीम में काम कर रहे सूत्र की माने तो ठाकरे महाराष्ट्र के भविष्य के मुख्यमंत्री हैं। वह शिवसेना को उसकी खोई हुई राजनीतिक जमीन दिलाने के लिए राजनीति में आगे आए हैं। आध्यात्मिक गुरु भैय्यू जी महाराज में विश्वास रखने वाले आदित्य ठाकरे के बारे में कहा जाता है कि उनकी राजनीति में रुचि रहती है। वह राजनीति में महत्वाकांक्षा भी रखते हैं। ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी के युवा नेता आदित्य की मुंबई में युवाओं के बीच में काफी पैठ है। आदित्य ठाकरे शिव सेना की युवा सेना के प्रमुख हैं।
शिवसेना वर्ली सीट से जीतती रही है चुनाव
वर्ली शिवसेना की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों में है। वर्ली से 2014 में सुनील शिंदे विधायक चुने गए थे। इस बार शिंदे ने वर्ली सीट को आदित्य के लिए छोड़ दिया है। हाल में सचिन अहीर भी शिवसेना में शामिल हुए हैं। सचिन अहीर का वर्ली में अच्छा प्रभाव है। सचिन 2014 में एनसीपी के टिकट से चुनाव मैदान में थे और उन्हें सुनील शिंदे ने हराया था। अहीर एनसीपी छोड़कर शिवसेना में हैं। इस तरह से वर्ली की सीट आदित्य ठाकरे के लिए हमेशा शिवसेना के गढ़ के रूप में तब्दील हो सकती है।
1966 में गठित हुई शिवसेना, ठाकरे परिवार रहा केवल किंग मेकर
शिवसेना की स्थापना बाला साहेब ठाकरे ने की थी। इसकी स्थापना 1966 में हुई थी। 1966 से आज तक ठाकरे परिवार से किसी ने कोई चुनाव नहीं लड़ा। ठाकरे परिवार कभी किसी संवैधानिक पद पर नहीं रहा। कभी बाला साहेब ठाकरे का दाहिना हाथ कहे जाने वाले राज ठाकरे राजनीति में कामकाज संभालते थे। बाद में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का गठन किया।
2014 के विधानसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन ऐन वक्त पर मन बदल लिया। इस तरह से ठाकरे परिवार हमेशा महाराष्ट्र में राजनीति की एक ताकत बनकर मुख्यमंत्री बनवाता रहा। शिवसेना का मुख्यमंत्री भी बना और शिवसेना ने समर्थन देकर मुख्यमंत्री बनवाया, लेकिन कभी ठाकरे परिवार ने कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं ली। अब आदित्य ठाकरे इस जिम्मेदारी के लिए भी तैयार हैं।