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महाराष्ट्र : यावल में पहली बार मिले हड़प्पाकालीन पुरातत्वीय अवशेष
Sun, 11 Jul 2021 04:05 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 11 Jul 2021 04:05 AM IST
सार
- मिट्टी के बर्तनों पर सिंधुघाटी की सभ्यता के निशान
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खुदाई में मिले पुरातात्विक अवशेष (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सिंधु घाटी की सभ्यता में मिट्टी के बर्तन महत्वपूर्ण उद्योग थे। इन बर्तनों में मुख्यरूप से चित्रात्मक लिपियां उकेरी जाती थी। जैसे मिट्टी के बर्तन हड़प्पा संस्कृति में मिले हैं, उससे मिलते जुलते मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) महाराष्ट्र में जलगांव जिले के यावल इलाके में पाए गए हैं।
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हेरिटेज फाउंडेशन जलगांव के निदेशक भुजंगराव बोबड़े की टीम ने यावल के निंबालकर किले में और उसके आसपास के अवशेष इकट्ठा किए हैं, जो हड़प्पा संस्कृति से मिलते जुलते हैं। भुजंगराव बोबडे ने बताया कि यह किला मराठा शासन काल में 1788 में बना था। किले के मुख्य द्वार पर ही बने सफेद टीले के पास काले और लाल रंग के मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। बर्तनों पर कलाकृतियां अंकित हैं।
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उन्होंने बताया, अभी तक इस इलाके में पुरातत्व विभाग की टीम ने कोई सर्वे नहीं किया है। लेकिन हमारी टीम ने इन अवशेषों को इकट्ठा किया और राज्य पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. तेजस गर्गे को भेजा। अवशेषों को औरंगाबाद स्थित केंद्रीय पुरातत्व विभाग को भी भेजा गया है। वहीं डॉ. तेजस गर्गे ने कहा, यह अवशेष सातवाहन राजाओं के समय के हो सकते हैं। लेकिन इसकी पुष्टि के लिए जल्द ही पुरातत्व विभाग की टीम यावल क्षेत्र का दौरा करेगी।
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ट्रेड रूट रहा था यावल का यह संगम क्षेत्र
अध्ययन में यह पता चला है कि सिंधु घाटी की सभ्यता के समय यह ट्रेड रूट था। इस वजह से यह कह सकते हैं कि यहां भी सिंधु घाटी सभ्यता रही होगी। सिंधु घाटी की सभ्यता नदी के किनारे विकसित हुई थी। वहां बस्तियां होती थी। राजे निंबावलवकर किले के पास हड़काई-खड़काई नदीं का संगम है। जिसे स्थानीय लोग सूर्य नदी के नाम से जानते हैं। इसके पास ही व्यास ऋषि का बड़ा मंदिर है।