{"_id":"6964d6096c3c22970d033954","slug":"maharashtra-ambernath-municipal-council-bjp-and-shinde-faction-shivsena-face-off-in-vice-chairman-election-2026-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंबरनाथ नगर परिषद: उपाध्यक्ष चुनाव कैसे बना सियासी अखाड़ा? आमने-सामने भाजपा और शिंदे गुट; बदला चुनावी समीकरण","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अंबरनाथ नगर परिषद: उपाध्यक्ष चुनाव कैसे बना सियासी अखाड़ा? आमने-सामने भाजपा और शिंदे गुट; बदला चुनावी समीकरण
Mon, 12 Jan 2026 04:37 PM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 12 Jan 2026 04:37 PM IST
सार
अंबरनाथ नगर परिषद की बैठक उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हंगामे में बदल गई। भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना के बीच सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया। सत्ता गणित, टूटे गठबंधन, बदला बहुमत और व्हिप विवाद ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया, जिससे सदन में नारेबाजी और तीखी झड़प देखने को मिली।
विज्ञापन
अंबरनाथ नगर परिषद (File Photo)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद की सामान्य सभा बैठक में सोमवार को उस समय हंगामा हो गया, जब परिषद के उपाध्यक्ष को लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। बैठक के दौरान भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पार्षदों के बीच जोरदार बहस और नारेबाजी देखने को मिली।
विज्ञापन
दरअसल, अंबरनाथ नगर परिषद में लंबे समय से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। ऐसे में पिछले महीने हुए चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटील को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन अब उपाध्यक्ष पद का चुनाव नया विवाद बन गया है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें:- 'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...': राज ठाकरे के 'रसमलाई' वाले तंज पर भड़के अन्नामलाई, दी यह चुनौती
विज्ञापन
पहले समझिए नगर परिषद का गणित
बता दें कि 60 सदस्यीय नगर परिषद में फिलहाल शिवसेना (शिंदे गुट) के 27 पार्षद, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी के चार और दो निर्दलीय पार्षद हैं। शुरुआत में भाजपा ने कांग्रेस के 12 और एनसीपी के चार पार्षदों के समर्थन से ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए)’ बनाई थी, जिससे उसके पास 32 का बहुमत हो गया था।
लेकिन बाद में कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया, जिन्होंने भाजपा का साथ दिया था। इसके बाद एनसीपी के चारों पार्षदों ने भाजपा से समर्थन वापस ले लिया और शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए। इससे शिवसेना की संख्या बढ़कर 32 हो गई और उन्हें सदन में बहुमत मिल गया।
बैठक में क्यों हुआ हंगामा, यह भी समझिए
बात अगर अब बैठक में हुए हंगामा की करें तो सोमवार की बैठक में भाजपा ने एवीए के सभी सदस्यों को अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटील के पक्ष में वोट देने का व्हिप जारी किया। लेकिन एनसीपी ने इस व्हिप को मानने से इनकार कर दिया। इस फैसले का समर्थन स्थानीय शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किणीकर ने किया और कहा कि अब एवीए का कोई अस्तित्व नहीं है। वहीं, शिवसेना ने उपाध्यक्ष पद के लिए एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार बनाया।
ये भी पढ़ें:- India-US Ties: राजदूत सर्जियो गोर बोले- कोई भी देश भारत जितना अहम नहीं; ट्रंप करेंगे दौरा, व्यापार वार्ता जारी
सदन में देखने को मिला तीखा नोकझोंक
इतना ही नहीं जैसे ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी, सदन का माहौल बिगड़ गया। दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज शुरू हो गई। गुस्से में आए भाजपा पार्षदों को चप्पल लहराते और शिवसेना उम्मीदवार के खिलाफ नारे लगाते भी देखा गया। गौरतलब है कि उपाध्यक्ष चुनाव का आधिकारिक नतीजा मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा। फिलहाल नगर परिषद में सत्ता को लेकर तनाव बना हुआ है।