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Warning: मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- अगर जलाशयों पर अतिक्रमण नहीं रुके तो आ सकती है सुनामी

Sat, 03 Sep 2022 11:43 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 03 Sep 2022 11:43 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि यदि हम प्रकृति का ध्यान रखते हैं तो प्रकृति हमारा ख्याल रखेगी। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह जलाशयों, तालाबों, चरागाहों और यहां तक कि जंगलों को भी बनाए रखें।

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Madras High Court warned encroachments on water bodies result in tsunamis earthquakes
madras high court

विस्तार

मद्रास हाईकोर्ट ने अतिक्रमण से जुड़े एक मामले में सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर लोग जल निकायों की रक्षा करने की बजाय उन पर अतिक्रमण करते रहेंगे, तो सुनामी मुख्य भूमि में प्रवेश कर जाएगी और भूकम्प पृथ्वी को हिला देगा।

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मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी और जस्टिस एन माला की पीठ ने कथित अतिक्रमणकारियों की जनहित याचिकाओं के एक बैच को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में संबंधित अधिकारियों के नोटिस को चुनौती दी थी और संबंधित अधिकारियों से पट्टा (भूमि विलेख) जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। मामला तिरुवल्लुर जिले में एक भूमि से जुड़ा है।
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अतिक्रमणकारियों को अधिकारियों से प्राप्त नोटिसों को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी गई है कि फॉर्म-II में नोटिस जारी किए बिना फॉर्म-III में नोटिस दिए गए थे। वहीं याचिकाकर्ताओं ने पानी की टंकी की भूमि पर अतिक्रमण किया था।
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पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अदालत द्वारा सुनवाई का अवसर दिए जाने के बावजूद विवादित भूमि पर अपने किसी अधिकार का हवाला नहीं दे सके। पीठ ने कहा कि इसलिए, हम मानते हैं कि याचिकाकर्ताओं ने यहां दिए गए फॉर्म- III में नोटिस में हस्तक्षेप का मामला नहीं बनाया है। पीठ ने याचिकाओं को खारिज कर दिया।

हम प्रकृति का ध्यान रखते हैं तो प्रकृति हमारा ख्याल रखेगी
कोर्ट में सख्त टिप्पणी की कि इस मामले से अलग होने से पहले यह देखना आवश्यक है कि यदि जल निकायों और टैंकों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण होगा, तो इससे इस तरह के मामलों को बढ़ावा मिलेगा और अंतिम परिणाम सूखे और इसके विपरीत बाढ़ का सामना करना पड़ेगा। यदि हम प्रकृति का ध्यान रखते हैं तो प्रकृति हमारा ख्याल रखेगी। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या केवल प्रकृति की देखभाल करने में मनुष्य की विफलता के कारण है।


 भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं
पीठ ने कहा कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह जलाशयों, तालाबों, चरागाहों और यहां तक कि जंगलों को भी बनाए रखें। अगर हम प्रकृति को प्रभावित करते रहेंगे, तो यह मानव को प्रभावित करेगी, दिन-प्रतिदिन सुनामी, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं।

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