{"_id":"6182ad5bbbe144420f36ca9d","slug":"madras-high-court-rules-living-together-would-not-confer-any-matrimonial-right","type":"story","status":"publish","title_hn":"मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: एक साथ रहने से वैवाहिक अधिकार नहीं मिल जाते, कानूनी तरीके से विवाह जरूरी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला: एक साथ रहने से वैवाहिक अधिकार नहीं मिल जाते, कानूनी तरीके से विवाह जरूरी
Wed, 03 Nov 2021 09:10 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 03 Nov 2021 09:10 PM IST
सार
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक अधिकार पाने के लिए कानूनी रूप से मान्य तरीके से विवाह होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि केवल साथ रहने भर से किसी को वैवाहिक अधिकार नहीं मिल जाते हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक मामले में कहा कि लंबे समय तक साथ रहने से दोनों लोगों को किसी पारिवारिक अदालत के सामने वैवाहित विवाद उठाने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता है। अदालत ने कहा कि इसके लिए दोनों का कानूनी रूप से विवाह होना आवश्यक है। न्यायाधीश एस वैद्यनाथन और आर विजय कुमार की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।
विज्ञापन
कोयंबटूर के रहने वाले आर कलईसेल्वी ने कोयंबटूर की पारिवारिक अदालत में एक याचिका दाखिल कर तलाक अधिनियम 1869 की धारा 32 के तहत दांपत्य अधिकार की मांग की थी। पारिवारिक अदालत ने 14 फरवरी 2019 को कलईसेल्वी की याकिरा को खारिज कर दी गई थी। इसके बाद कलईसेल्वी ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विज्ञापन
कलईसेल्वी ने दावा किया था कि मैं साल 2013 से जोसफ बेबी के साथ रह रही थी, लेकिन बाद में हम अलग हो गए। लेकनि, खंडपीठ ने भी मंगलवार को कलईसेल्वी की याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हमें कोयंबटूर की पारिवारिक अदालत के न्यायाधीश का फैसला बरकरार रखने में कोई आपत्ति नहीं है।
विज्ञापन