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Madras HC: 'बच्चों के उनकी देखभाल नहीं करने पर गिफ्ट डीड रद्द कर सकते हैं बुजुर्ग'; हाईकोर्ट की टिप्पणी

Wed, 19 Mar 2025 04:36 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 19 Mar 2025 04:36 PM IST
सार

जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस के राजशेखर की डिवीजन पीठ ने हाल ही में मृतक एस नागलक्ष्मी की पुत्रवधू एस माला की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया। नागलक्ष्मी ने अपने बेटे केशवन के पक्ष में समझौता पत्र (सेटलमेंट डीड) इस उम्मीद के साथ तैयार किया था कि वह और उनकी पुत्रवधू जीवनपर्यन्त उनकी देखभाल करेंगे लेकिन वे उनकी देखभाल करने में विफल रहे।

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Madras high Court commented senior citizen can cancel gift deed if children do not take care of them
मद्रास हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

मद्रास हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि यदि बच्चे या निकट संबंधी अपने माता-पिता की देखभाल करने में नाकाम रहते हैं तो वे उनके नाम की गई संपत्ति की गिफ्ट डीडी रद्द कर सकते हैं, भले ही गिफ्ट डीड में लगाई गई शर्तों में इसका जिक्र न किया गया हो।

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जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस के राजशेखर की डिवीजन पीठ ने हाल ही में मृतक एस नागलक्ष्मी की पुत्रवधू एस माला की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया। नागलक्ष्मी ने अपने बेटे केशवन के पक्ष में समझौता पत्र (सेटलमेंट डीड) इस उम्मीद के साथ तैयार किया था कि वह और उनकी पुत्रवधू जीवनपर्यन्त उनकी देखभाल करेंगे लेकिन वे उनकी देखभाल करने में विफल रहे। बेटे की मौत के बाद उनकी बहू ने भी उनकी उपेक्षा की। इसलिए, उन्होंने आरडीओ, नागपट्टिनम से संपर्क किया। नागलक्ष्मी का यह बयान दर्ज करने के बाद कि उन्होंने प्रेम, स्नेह के कारण तथा अपने बेटे के भविष्य के लिए यह समझौता किया था और पुत्रवधू माला के बयानों पर विचार करने के बाद आरडीओ ने सेटलेमेंट डीड को रद्द कर दिया। इसे चुनौती देते हुए माला ने याचिका दायर की और इसे खारिज कर दिया गया। इसलिए, उन्होंने वर्तमान अपील दायर की।
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पीठ ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 23(1) वरिष्ठ नागरिकों को ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जहां वे अपनी संपत्ति को उपहार या समझौते के माध्यम से इस उम्मीद के साथ हस्तांतरित करते हैं कि हस्तांतरित व्यक्ति उनकी बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान करेगा। पीठ ने कहा कि यदि हस्तांतरित व्यक्ति इन दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है तो वरिष्ठ नागरिक के पास हस्तांतरण को रद्द करने के लिए न्यायाधिकरण से घोषणा प्राप्त करने का विकल्प होता है।



अधिनियम में यह स्वीकार किया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों से संपत्ति का हस्तांतरण, विशेष रूप से बच्चों या करीबी रिश्तेदारों को, अक्सर प्रेम और स्नेह से प्रेरित होता था। वरिष्ठ नागरिक की ओर से संपत्ति हस्तांतरित करने का निर्णय महज एक कानूनी कार्य नहीं था, बल्कि यह निर्णय बुढ़ापे में देखभाल की आशा से लिया गया था। यह प्रेम और स्नेह लेन-देन में निहित शर्त बन जाता है, भले ही हस्तांतरण दस्तावेज़ में इसका स्पष्ट उल्लेख न हो। पीठ ने कहा कि यदि स्थानांतरित व्यक्ति वादा किए गए अनुसार देखभाल प्रदान नहीं करता है, तो वरिष्ठ नागरिक धारा 23(1) का उपयोग करके स्थानांतरण को रद्द करवा सकता है।

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