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Corbevax: दूसरे 'मेड इन इंडिया' कोरोना टीके को मिली मंजूरी, कोरोना से लड़ाई में कैसे बनेगा अहम हथियार, जानें

Tue, 28 Dec 2021 01:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 28 Dec 2021 01:08 PM IST
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सार
भारत के लिए कोरोना से जंग में पहली मेड इन इंडिया वैक्सीन कोवाक्सिन ने काफी अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, अभी भी देश में 80 फीसदी से ज्यादा लोगों को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रा जेनेका द्वारा बनाई गई कोविशील्ड ही लगी है। 
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Made in India Coronavirus Vaccine Corbevax emergency use approval know about this protein based new COVID-19 vaccine news and updates
कोविड-19 वैक्सीन - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भारत में 28 दिसंबर 2021 (मंगलवार) कोरोनावायरस से जंग में एक अहम दिन साबित होने वाला है। दरअसल, सरकार ने आज कोरोना की दो वैक्सीन और दवा को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी। जिन दो वैक्सीन्स को मंजूरी मिली है, उनमें एक वैक्सीन नोवावैक्स की कोवोवैक्स है। दूसरी वैक्सीन भारतीय कंपनी बायोलॉजिकल ई की कोर्बिवैक्स है। वहीं, मंजूर हुए एंटी कोरोना ड्रग का नाम मोल्नुपिराविर है और इसे मर्क नाम की विदेशी कंपनी ने बनाया है। 


भारत में क्यों मंजूर की गई दूसरी मेड इन इंडिया वैक्सीन?
भारत के लिए कोरोना से जंग में पहली मेड इन इंडिया वैक्सीन कोवाक्सिन ने काफी अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, अभी भी देश में 88 फीसदी से ज्यादा लोगों को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रा जेनेका द्वारा बनाई गई कोविशील्ड ही लगी है। भारत बायोटेक की सीमित उत्पादन क्षमता की वजह से इस टीके का प्रसार भी कम ही रहा है। 




इसी के चलते अब भारत में दूसरी मेड इन इंडिया वैक्सीन कोर्बिवैक्स को मंजूरी दी गई है। मजेदार बात यह है कि भारत ने इस वैक्सीन के 30 करोड़ डोज का ऑर्डर इस साल जून में ही दे दिया था। यह वो समय था, जब इस वैक्सीन का ट्रायल चल रहा था और इसकी प्रभावशीलता को लेकर कोई शुरुआती डेटा भी सामने नहीं आया था। हैदराबाद की इस निजी कंपनी ने अब तक एफिकेसी का डेटा रिलीज नहीं किया है, इसके बावजूद इस वैक्सीन को भारत के लिए काफी अहम करार दिया जा रहा है। 

सीरम संस्थान के तहत किया जाएगा वैक्सीन का निर्माण
नोवावैक्स एंड सीरम इंस्टीट्यूट ने घोषणा की कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने मैट्रिक्स-एम एडजुवेंट के साथ नोवावैक्स के पुनः संयोजक नैनोपार्टिकल प्रोटीन-आधारित कोरोना वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण प्रदान किया है। कोवोवैक्स वैक्सीन का निर्माण सीरम संस्थान के तहत किया जाएगा।

कैसे काम करती है कोर्बिवैक्स?
कोर्बिवैक्स देश में इस्तेमाल की जाने वाली पहली प्रोटीन-बेस्ड वैक्सीन हो सकती है। यानी इसे बनाने के लिए कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन के चुनिंदा अंशों का इस्तेमाल किया गया है। कोरोनावायरस में मौजूद यह स्पाइक प्रोटीन ही वायरस को किसी इंसान के शरीर में मौजूद कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। वायरस इसके बाद खुद को बढ़ाता है और बीमारी पैदा कर देता है। 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब कोरोनावायरस का यह स्पाइक प्रोटीन अलग से इंसान के शरीर में डाला जाता है, तो यह कम से कम हानिकारक होता है, क्योंकि वायरस पूरी तरह गायब होता है। इसे इंसान के शरीर में वैक्सीन के जरिए भेजने का फायदा यह होता है कि इम्युन सिस्टम वायरस को फैलने में मदद करने वाले स्पाइक प्रोटीन को पहचान लेता है और उसके खिलाफ एंटीबॉडीज तैयार कर लेता है। यानी जब असल कोरोनावायरस (जिसमें वायरस और स्पाइक प्रोटीन दोनों शामिल होते हैं) शरीर पर हमला करे तो इम्युन सिस्टम वायरस को फैलाने वाले प्रोटीन को ही खत्म कर दे। रिसर्च के मुताबिक, इस तकनीक से कोरोना लोगों को संक्रमित या गंभीर रूप से बीमार करने में असफल साबित होगा। 

भारत में कोरोना से लड़ाई में क्यों अहम साबित होगी कोर्बिवैक्स
वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रोटीन आधारित वैक्सीन्स के निर्माण का खर्च मौजूदा वेक्टर या एमआरएनए टीकों के मुकाबले काफी कम है। साथ ही प्रोटीन बेस्ड टीकों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर भी रखा जा सकता है, जिससे इन्हें भारत और अफ्रीका जैसे देशों में दूर-दराज के स्थानों तक पहुंचाना आसान होगा। mRNA वैक्सीन्स को माइनस तापमान में रखने की जरूरत होती है, जिसकी वजह से इन्हें स्टोर करने का इन्फ्रास्ट्रक्चर हर देश के लिए जुटाना नामुमकिन है। ऐसे में कोर्बिवैक्स भारत में पूर्ण टीकाकरण के साथ बूस्टर डोज की जरूरतों को पूरा करने में अहम साबित होगी। 

प्रभावशीलता को लेकर क्या डेटा मौजूद?
बायोलॉजिकल ई ने अब तक कोर्बिवैक्स कोरोना वैक्सीन का डेटा रिलीज नहीं किया है। हालांकि, ताजा जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने कोर्बिवैक्स के फेज-2 और फेज-3 के क्लीनिकल ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी ने अमेरिका के ह्यूस्टन, टेक्सस में स्थित बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन और कैलिफोर्निया के डायनावैक्स के साथ मिलकर इस वैक्सीन का निर्माण किया। 

कंपनी की चेयरमैन और एमडी महिमा दत्ता ने कोर्बिवैक्स के आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन करे से पहले ही कहा था कि वैक्सीन दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल में सफल पाई गई है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता पर अब तक कोई समीक्षा नहीं हुई है। 
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