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'अंग्रेजी सीखते-सीखते हम इंग्लिश माइंड में आ गए हैं, ये देशहित में नहीं'
amarujala.com- Presented by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 24 Jun 2017 02:24 PM IST
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वेंकैया नायडू
- फोटो : Intoday
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केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू का हिंदी भाषा के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लेकर नया बयान आया है । उन्होंने कहा कि हिंदी हर भारतीय की असल पहचान है। वहीं, देश में कार्यालयों में अंग्रेजी के बढ़ते इस्तेमाल को हिंदी के लिए बेदह खतरनाक बताया है। वेंकैया नायडू ने कहा कि अंग्रेजी सीखते-सीखते हम अंग्रेजी माइंड में भी आ गए हैं। ये देश के हित में बिल्कुल भी नहीं है।
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इससे पहले इसी साल अप्रैल में भी नायडू ने संसदीय समिति के एक फैसले का बचाव किया था जिसमें सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के हिंदी लिखने और बोलने के साथ-साथ हिंदी को कार्यालय की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।
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वहीं, डीएमके नेता एमके स्टालिन ने मोदी सरकार के इस प्रस्ताव का घोर खंडन किया था। उनका कहना था कि सरकार गैर-हिंदी लोगों पर जबरन हिंदी भाषा के इस्तेमाल के लिए जोर डाल रही है। ऐसे में आवास- शहरी गरीबी उन्मूलन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री नायडू ने एमके स्टालिन की बात की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार हिंदी को प्रमोट कर रही है न कि लोगों पर जबरन थोप रही है।
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फिर इसके बाद नायडू ने कहा कि 2011 में गृहमंत्री और कांग्रेस नेता पी चिंदबरम के नेतृत्व में संसदीय समिति की सिफारिश पर हिंदी के इस्तेमाल को लेकर एक नोटिफिकेश जारी किया गया था। वहीं, संसदीय पेनल ने सांसदों और मंत्रियों से हिंदी के इस्तेमाल को लेकर सिफारिश की थी। बता दें कि ये सिफारिश जून 2011 में राष्ट्रपति को भी भेजी गई थी।
वहीं, मोदी सरकार ने इसी साल 31 मार्च को संसदीय पेनल की इस सिफारिश पर विचार किया जिस पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी सहमति प्रकट की थी।