{"_id":"645c3419a73e7f1a95006613","slug":"lungs-of-one-child-out-of-three-corona-infected-are-not-normal-2023-05-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"अध्ययन: कोरोना संक्रमित तीन में एक बच्चे के फेफड़े सामान्य नहीं, 30 फीसदी बच्चों में सामने आई परेशानी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अध्ययन: कोरोना संक्रमित तीन में एक बच्चे के फेफड़े सामान्य नहीं, 30 फीसदी बच्चों में सामने आई परेशानी
Thu, 11 May 2023 05:47 AM IST
Jeet Kumar
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 11 May 2023 05:47 AM IST
सार
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और दिल्ली के सबसे बड़े कोविड केंद्र लोकनायक अस्पताल के डॉक्टरों ने मिलकर यह अध्ययन किया है जिसे मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित किया गया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
वयस्कों की तरह छोटे बच्चों के फेफड़ों पर भी कोरोना वायरस का गंभीर असर पड़ रहा है। देश में पहली बार दिल्ली के डॉक्टरों ने एक चिकित्सा अध्ययन में यह दावा किया है कि तीन में से एक कोरोना संक्रमित बच्चे के फेफड़े सामान्य नहीं मिल रहे हैं। कोविड से उभरने के बाद इन बच्चों के फेफड़ों की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
विज्ञापन
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और दिल्ली के सबसे बड़े कोविड केंद्र लोकनायक अस्पताल के डॉक्टरों ने मिलकर यह अध्ययन किया है जिसे मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन के अनुसार, कोरोना संक्रमण के बाद वयस्कों में पल्मोनरी सीक्वेल के मामले मिले हैं, लेकिन बच्चों में पल्मोनरी डिसफंक्शन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। ऐसे में शोधकर्ताओं ने उन बच्चों में दीर्घकालिक पल्मोनरी सीक्वेल का अध्ययन किया जो कोरोना वायरस की चपेट में आए।
विज्ञापन
30 फीसदी बच्चों में सामने आई परेशानी
अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि जून 2020 से अक्तूबर 2021 के बीच अस्पताल में भर्ती सात से 18 वर्ष के कुल 40 कोरोना रोगियों को अध्ययन में शामिल किया गया। इनमें 21 लड़के थे जिनकी औसतन आयु 13 वर्ष थी। अस्पताल से छुटटी मिलने के छह माह बाद तक इन मरीजों पर निगरानी रखी गई। शोधकर्ताओं ने छह महीने बाद इन बच्चों की श्वसन जांच की। इस दौरान 30% बच्चों के फेफड़ों में कई तरह की परेशानी देखने को मिली है।
विज्ञापन
10 फीसदी वयस्कों में समस्या
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. देवेंद्र मिश्रा ने बताया कि कोरोना की वजह से गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम के मामले देखने को मिल रहे हैं। वयस्क आबादी में ऐसे मरीजों की संख्या काफी है जिनमें वायरस की वजह से फेफड़ों को नुकसान पहुंचा है। इनकी संख्या लगभग 10 फीसदी है। जिन बच्चों का वजन सामान्य की तुलना में कम है या फिर वे प्री मैच्योर हैं तो उनमें वायरस का असर ज्यादा गंभीर देखने को मिल रहा है। इसलिए यह अध्ययन किया गया जिसके निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि वायरस के कारण बच्चों को फेफड़ों से जुड़ी परेशानी हो रही है।
14 में से एक बच्चे को सांस की तकलीफ
डॉ. मिश्रा ने बताया कि बच्चों को लेकर पहले अध्ययन में सामने आया कि वायरस के कारण तीन में एक बच्चे में फुफ्फुसीय असामान्यताएं होती हैं और तीव्र संक्रमण की गंभीरता और इन खतरनाक असामान्यताओं के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं था। 14 में से एक बच्चे को कोरोना से ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक सांस की तकलीफ के लक्षण देखने को मिले हैं।