फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   LS Polls: From encountering dead voters to scrubbing toilets: Myriad experiences of poll officials in Bengal

ECI: अंधेरे स्कूल के कॉरिडोर में रहने से खुद टॉयलेट साफ करने तक, मतदान अधिकारियों ने साझा किए चुनाव के अनुभव

Wed, 29 May 2024 11:08 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 29 May 2024 11:08 AM IST
सार

देश में लोकसभा चुनाव के सात चरणों में से छह चरण समाप्त हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल में कुछ मतदान अधिकारियों ने अपने गढ़ वापस लौटने के बाद चुनाव से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियां साझा कीं। 

विज्ञापन
LS Polls: From encountering dead voters to scrubbing toilets: Myriad experiences of poll officials in Bengal
अधिकारियों ने बताए चुनावी अनुभव - फोटो : अमर उजाला/ प्रतिकात्मक

विस्तार

देशभर में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। चुनाव आयोग लगातार आम नागरिकों को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए वह नए-नए पैंतरे आजमा रहा है। हालांकि, इन सबके बीच मतदान अधिकारियों का साहस काबिल-ए-तारीफ है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में चुनाव कराने के दौरान मतदान अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं का सामना करना पड़ा, जो मृत लोगों की जगह वोट डालने पहुंच गए थे। इतना ही नहीं, स्कूलों के अंधेरे गलियारों में जाने, बांध की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने से लेकर उपेक्षित शौचालयों को साफ करने तक कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

विज्ञापन


कहा जा सकता है कि यह लोकतंत्र को एक अटूट प्रतिबद्धता के साथ बनाए रखने का प्रयास है, जिसे चुनाव अधिकारी अपने रास्ते में आने वाली कई बाधाओं के बावजूद हासिल करने का प्रयास करते हैं। यह अधिकारी कठिन चुनौतियों के बावजूद यह सुनिश्चित करते हैं कि देश में संसदीय चुनाव कराने की एक विशाल और जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक समाप्त हो। 
विज्ञापन


अधिकारियों ने साझा कीं कहानियां
देश में लोकसभा चुनाव के सात चरणों में से छह चरण समाप्त हो चुके हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पश्चिम बंगाल में कुछ मतदान अधिकारियों से बात की जो अपने गढ़ लौट आए। अधिकारियों ने अपनी दिलचस्प कहानियां साझा कीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सुंदर दृश्य का उठाया लुत्फ
दुर्गापुर के एक स्कूल शिक्षक अरूप करमाकर उन लोगों में से एक हैं, जिनकी चुनाव में ड्यूटी पड़ी थी। उन्होंने चुनाव के दौरान हुए अपने अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'मेरी ड्यूटी आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के एक स्कूल में बने केंद्र पर थी। मतदान केंद्र पर पहुंचने पर मैं और पूरी टीम हैरान रह गई थी। आसपास की पहाड़ियों और मैथन बांध के चारों ओर एक विशाल जलाशय से घिरा दृश्य बेहद खूबसूरत था। हमें किसी भी राजनीतिक पार्टी के समर्थकों या कार्यकर्ताओं की ओर से कोई परेशानी नहीं हुई।'

मतदान के दिन सुबह उन्होंने जलाशय के पानी में डुबकी भी लगाई। करमाकर ने देखा कि शाम को स्कूल के बगल में एक खेत में लगभग 50 गायों का झुंड इकट्ठा हो गया था। यह गाय इस जगह को अपना नियमित आश्रय मानती थीं। हालांकि, झुंड सुबह गायब हो गया था। उन्होंने कहा कि सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन इस बीच एक मृत शख्स वोट डालने आ गया। इससे स्थिती थोड़ी गंभीर हो गई। 

वोट डालने मृत शख्स पहुंचा
करमाकर ने बताया, 'एक व्यक्ति मतदान केंद्र आया और दावा किया कि उसका नाम मृतकों की सूची में है, लेकिन वह जिंदा है और वोट डालना चाहता है। इस पर पहले हम सभी चौंक गए फिर बूथ पर मौजूद सभी राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंटों ने पुष्टि की कि वह व्यक्ति सच में वही है, जो उसने होने का दावा किया था। उसके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज थे और सत्यापन के बाद उसे मतदान करने की अनुमति दी गई।'

चाबी देने के लिए बनाया बहाना
बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र के तहत एक बूथ पर तैनात एक अन्य स्कूल शिक्षक अंशुमान रॉय ने बताया कि अच्छे खासे शौचालयों को केंद्रीय बल के जवानों ने बंद कर दिया था, जिससे चुनाव अधिकारियों के लिए बहुत कम उपयुक्त शौचालय बचे थे। उन्होंने कहा, 'लेकिन यहीं पर बात खत्म नहीं हुई। मतदान केंद्र पर पहुंचने के तुरंत बाद, कुछ स्थानीय लोगों ने हमें शीतल पेय पदार्थ की पेशकश की और मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है। जिस शख्स पर केंद्र की चाबियां थीं, वो भी गायब था। जब उससे संपर्क किया गया, तो उसने कहा कि वह बीमार है और स्थानीय लोग भोजन की व्यवस्था करेंगे।'

उन्होंने कहा, 'आम तौर पर मिड-डे मील पकाने वाली महिलाओं को मतदान दलों की देखभाल करने का काम सौंपा जाता है, जिसमें उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध कराना भी शामिल है। 'की होल्डर्स' के नाम से जानी जाने वाली ये महिलाएं मतदान परिसर की चाबी रखती हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'कुछ लोग उस रात हमारे लिए रात का खाना और अगली सुबह नाश्ता लाए। हमने सारे खाने का खर्चा उठाया। चुनाव आयोग ने चुनाव अधिकारियों के लिए धन निर्धारित किया है, ताकि राजनीतिक दलों सहित किसी से भी कोई फायदा न लिया जा सके।'

बिना खाए पीए करवाए चुनाव
मतदान के दिन खाने देने वाले समूह ने उनसे और उनकी टीम से संपर्क किया। इन लोगों ने जोर देकर कहा कि वैध फोटो पहचान पत्र के बिना कुछ व्यक्तियों को वोट देने की अनुमति दी जानी चाहिए। रॉय ने कहा, 'जब हमने इससे मना कर दिया तो वह बहस करने लगे। बाद में हमें दोपहर का भोजन और पीने का पानी देना बंद कर दिया। हमने बिना पानी-भोजन के अपना काम पूरा किया।' 

वहीं, एक अध्यापक अमित कुमार विश्वास की ड्यूटी आसनसोल लोकसभा सीट के एक दूरदराज गांव में लगी। पहले उन्हें यहां सब कुछ सही लगा, फिर कुछ ऐसा हो गया कि वह भौचक्के रह गए। 

बाथरूम एक अंधेरे कोने में बना
विश्वास ने कहा, 'हमारा बूथ कखोया हाई स्कूल में बनाया गया था, जहां सभी कमरों में लाइट और पंखे थे। हालांकि, स्कूल परिसर के बाकी हिस्सों में बिजली नहीं थी और बाथरूम एक अंधेरे कोने में बना हुआ था।' उन्होंने बताया कि यह अनुभव बहुत डरावना था, क्योंकि कोई भी मोमबत्ती या टॉर्च के बिना कक्षा से बाहर नहीं निकल सकता था।

खुद करने पड़े शौचालय साफ
इतना ही नहीं एक मतदान अधिकारी को तो शौचालय तक साफ करने पड़ गए। रथिन भौमिक की ड्यूटी हुगली जिले के आरामबाग लोकसभा सीट के अंतर्गत हरिपाल में पड़ी थी। यहां शौचालय इतने गंदे थे कि उनका इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता था। इसलिए उन्होंने मतदान की पूर्व संध्या पर शौचालय साफ किए। 


भौमिक ने बताया, 'ऐसा लग रहा था कि शौचालय का उपयोग सदियों से नहीं किया गया था। पूछने पर प्रधानाध्यापिका ने बताया कि स्कूल में केवल 40 छात्र हैं और कोई भी उनका इस्तेमाल नहीं करता है। बाद में गांव की शिक्षा समिति के कुछ सदस्य सफाई करने के लिए सामान्य लेकर आए, जिससे हमने शौचालयों को साफ किया।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed