लव जिहाद : कहां से आया ये शब्द, देश में कितने हैं मामले, जानें पूरा सच
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मौजूदा समय में लव जिहाद सुर्खियों में बना हुआ है। मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई भाजपाई राज्य लव जिहाद के खिलाफ कानून लाने में जुटे हैं तो वहीं गैर भाजपा राज्यों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि लव जिहाद को लेकर जो कानून बनाने की तैयारी चल रही है, उसमें लव जिहाद से जुड़ा कोई शब्द नहीं है।
कहने के लिए देश के कई हिस्सों से लव जिहाद के मामले सामने आते हैं, जिसमें केरल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं लेकिन देश की किसी भी संस्था के पास लव जिहाद से जुड़े मामलों का आंकड़ा नहीं है। साथ ही साथ सरकार के पास भी लव जिहाद से जुड़ा कोई केस दर्ज नहीं हुआ है।
सरकार ने खुद संसद में इस बात को माना है कि लव जिहाद के तहत कोई केस किसी भी एजेंसी ने दर्ज नहीं किया है। दस साल पहले लव जिहाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था, जब केरल कैथलिक बिशप काउंसिल ने दावा किया था कि लगभग 4,500 लड़कियों को लव जिहाद का निशाना बनाया गया है। इसके अलावा हिंदू जनजागृति का भी आरोप था कि केरल में 30,000 लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन किया गया है।
चर्चा में क्योंं आया लव जिहाद?
दरअसल 27 अक्तूबर 2020 को राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद में दो युवकों तौसीफ और रेहान ने निकिता तोमर नाम की लड़की का अपहरण करने की कोशिश की थी। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो आरोपी तौसीफ ने उसे गोली मार दी और निकिता की मौके पर मौत हो गई।
इस घटना के बाद से कई राज्यों में लव जिहाद को लेकर बहस शुरू हो गई और विरोध प्रदर्शन होने लगे। कुछ दिन बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कई भाजपाई राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने को लेकर बातचीत तेज हो गई। बता दें कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश ने इस संबंध में मसौदा भी तैयार कर लिया है।
कहां से आया लव जिहाद शब्द?
लव जिहाद शब्द साल 2009 से सुनने को मिला है, इससे पहले रोमियो जिहाद शब्द ज्यादा सुना जाता था। जो कि बाद में लव जिहाद बन गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि लव जिहाद शब्द पहली बार 2009 में इस्तेमाल किया गया था। रिटायर्ड जस्टिस केटी शंकरन ने माना था कि केरल के कुछ हिस्सों में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले मिले हैं।
तब उन्होंने केरल सरकार से इसके खिलाफ कानूनी प्रावधान लाने की बात कही थी। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रेम के नाम पर, किसी को धोखे या उसकी मर्जी के बिना धर्म बदलने पर मजबूर नहीं किया जा सकता है।
देश में लव जिहाद से जुड़ा कोई कानून है?
भारत में दो अलग-अलग धर्म के लोग विशेष विवाह अधिनियम 1954, हिंदू धर्म के लोग हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और मुस्लिम धर्मावलंबी मुस्लिम परंपराओं के मुताबिक शादी कर सकते हैं। हालांकि गलत नाम बताने, धर्म या आयु छिपाने, वैवाहिक स्थिति छिपाने जैसी गलतियों पर भारतीय कानूनों के तहत सजा का प्रावधान है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत अपहरण के मामलों में 10 साल की सजा हो सकती है। वैवाहिक मामलों में सामान्य तौर पर लड़की ही कानूनी कार्रवाई के लिए अधिकृत है लेकिन सीआरपीसी की धारा 198 के तहत परिजन भी कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश में लव जिहाद को लेकर जो कानून का प्रस्ताव सामने रखा गया है उसमें पांच साल की सजा का प्रावधान है।