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CAA Rule: किसी की नागरिकता छीनने का नहीं हो रहा प्रयास, सीएए लागू करने पर बोले शुभेंदु अधिकारी

Tue, 12 Mar 2024 06:38 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Tue, 12 Mar 2024 06:38 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा, 'नागरिकता संशोधन अधिनियम वर्षों पहले संसद द्वारा पारित किया गया था। अब जो हो रहा है वह नियम-कायदों को तैयार करने का तार्किक निष्कर्ष है। मैं इसे इस देश में सुशासन की सामान्य प्रक्रिया के हिस्से के रूप में ही देखता हूं।' 

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Loksabha Elections West Bengal Politics Suvendu Adhikari after Centre notifies CAA rules
शुभेंदु अधिकारी - फोटो : twitter.com/SuvenduWB

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम किसी की नागरिकता नहीं छीनता है, उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू शरणार्थी इसे लागू करने के केंद्र के कदम से खुश हैं।

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शुभेंदु अधिकारी ने बताया, 'पश्चिम बंगाल में हिंदू शरणार्थी बहुत खुश हैं। यह बहुत अच्छा कदम है। यह किसी की नागरिकता छीनने का प्रयास नहीं है। ममता बनर्जी भ्रम पैदा करने की बहुत कोशिश करती हैं। यह कानून बहुत स्पष्ट है। यह नागरिकता देने का कानून है, छीनने का नहीं।' गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कुछ दिन पहले सोमवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के कार्यान्वयन के लिए नियमों की अधिसूचना की घोषणा की। 
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सीएए अधिसूचना पर सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद सलीम ने कहा, 'नियमों को अधिसूचित करने में पांच साल लग गए। इसमें देरी क्यों हुई? लोग नौकरियां और शिक्षा चाहते हैं और कीमतों में वृद्धि की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।' मोदी सरकार भावनात्मक मुद्दे उठाने में विफल रही है। अब, चुनाव से पहले अंतिम उपाय के रूप में, वे इन नियमों की घोषणा कर रहे हैं।'
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इस बीच, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा, 'नागरिकता संशोधन अधिनियम वर्षों पहले संसद द्वारा पारित किया गया था। अब जो हो रहा है वह नियम-कायदों को तैयार करने का तार्किक निष्कर्ष है। मैं इसे इस देश में सुशासन की सामान्य प्रक्रिया के हिस्से के रूप में ही देखता हूं।' 


कानून बनने के चार साल बाद जारी की गई अधिसूचना
नागरिकता संशोधन विधेयक 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। एक दिन बाद ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई थी। सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। ऐसे अल्पसंख्यक, 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों। इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है। नागरिकता हासिल करने की अवधि को 1 से 6 साल किया गया है।



 
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