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देश के पहले लोकपाल अध्यक्ष जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष ने सदस्यों को दिलाई शपथ

Wed, 27 Mar 2019 04:29 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 27 Mar 2019 04:29 PM IST
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lokpal members take oath of office Lokpal justice pinaki chandra ghose administered oath of office
लोकपाल सदस्य - फोटो : PTI
लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति पीसी घोष ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में लोकपाल के सभी आठ सदस्यों को पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति दिलीप बाबासाहेब भोसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी, न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी, दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेंद्र सिंह और डॉ. इंद्रजीत प्रसाद गौतम ने शपथ ग्रहण किया। 
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इस मौके पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव डॉ. सी चंद्रमौली, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) केवी चौधरी, गुप्तचर ब्यूरो (आईबी) के निदेशक राजीव जैन और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
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बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को शनिवार को देश के पहले लोकपाल के रूप में शपथ दिलाई थी। 

लोकपाल सदस्य

विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी के अलावा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल में न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है।
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सशस्त्र सीमा बल की पूर्व पहली महिला प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, पूर्व आईआरएस अधिकारी महेंद्र सिंह और गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य हैं।

कौन हैं लोकपाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय चयन समिति ने लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नियुक्तियों को मंजूरी दी थी। 

न्यायमूर्ति पीसी घोष मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए थे। जब लोकपाल अध्यक्ष के पद के लिए उनके नाम की घोषणा हुई तो वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य थे। 

लोकपाल के प्रावधान

कुछ श्रेणियों के लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को देखने के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति करने वाला लोकपाल कानून 2013 में पारित हुआ था।

नियमों के अनुसार लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्यों का प्रावधान है। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिए। नियमों के अनुसार, लोकपाल के सदस्यों में 50 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिए।


चयन होने के बाद अध्यक्ष और सदस्य पांच साल के कार्यकाल या 70 साल की उम्र तक पद पर बने रह सकते हैं। लोकपाल अध्यक्ष का वेतन और भत्ते भारत के प्रधान न्यायाधीश के बराबर होंगे। सदस्यों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर वेतन और भत्ते मिलेंगे। 
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