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'पर्याप्त सबूत का दिखता है आभाव': लोकपाल ने खारिज की पीएम-केयर्स फंड की जांच की मांग, जानें क्या लगे थे आरोप
Wed, 14 Oct 2026 06:55 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Wed, 14 Oct 2026 06:55 PM IST
सार
लोकपाल ने पीएम केयर्स फंड में गड़बड़ी के आरोपों वाली शिकायत का निपटारा कर दिया है। लोकपाल ने शिकायतों को अपर्याप्त माना है, साथ ही शिकायतकर्ता को अहम तथ्यों के साथ नई शिकायत दर्ज करने की अनुमति दी है।
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पीएम-केयर्स फंड
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भ्रष्टाचार-रोधी संस्था लोकपाल ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपने पद के दुरुपयोग और पीएम केयर्स फंड से जुड़े योगदान को इकट्ठा करने और संभालने में गड़बड़ी के आरोपों वाली शिकायत का निपटारा कर दिया है। लोकपाल ने कहा कि शिकायतकर्ता की दलीलें पहली नजर में अपर्याप्त हैं। हालांकि, लोकपाल ने शिकायतकर्ता को एक सही और पूरी नई शिकायत दर्ज करने की इजाजत दी है, जिसमें मुख्य रूप से अपराध से जुड़े अहम तथ्यों और विवरणों को उजागर किया जाए। यह शिकायत इस साल जून में पीएम केयर्स फंड (ट्रस्ट) से जुड़े कथित कामों और कामों में कमी (कमीशन और ओमिशन) के संबंध में 'उच्च पदस्थ हस्तियों' के खिलाफ दर्ज की गई थी।
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चेयरपर्सन ने क्या कहा?
चेयरपर्सन जस्टिस ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय लोकपाल बेंच ने नौ अक्तूबर के अपने आदेश में कहा, 'शिकायत देखने के बाद, प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि आरोपों का मुख्य आधार ऐसी गतिविधियों से संबंधित है जो 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' के अध्याय-तीन के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आती हैं।' इस अध्याय में भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत अपराधों और दंड से संबंधित प्रावधान हैं। इसके बाद लोकपाल ने शिकायतकर्ता से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें यह बताया जाए कि मौजूदा शिकायत में कौन-कौन से आरोप 1988 के अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों से संबंधित हैं। बता दें कि शिकायतकर्ता ने 26 अगस्त को विधिवत शपथ-पत्र दाखिल किया था। लोकपाल के आदेश का हिस्सा रहे शपथ-पत्र में कहा गया है कि शिकायत के साथ संलग्न फॉर्म-एक में नामित केंद्रीय लोक सेवकों के खिलाफ आरोप आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग और पीएम केयर्स फंड से जुड़े योगदानों के संग्रह, प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित अनियमितताओं से जुड़े हैं।
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कब बनाया गया पीएम केयर्स फंड?
बता दें कि केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में यह फंड बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य कोविड महामारी जैसी किसी भी आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति से निपटना और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना था। इसे 27 मार्च, 2020 को एक लोक कल्याणकारी ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर किया गया था। ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2025 तक पीएम केयर्स फंड में कुल पैसा 8,452 करोड़ रुपये था। इसके एक साल पहले 7,173 करोड़ रुपये था। प्रधानमंत्री इस फंड के पदेन अध्यक्ष होते हैं। यह फंड पूरी तरह से स्वैच्छिक योगदान से चलता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है।
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चेयरपर्सन ने क्या कहा?
चेयरपर्सन जस्टिस ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय लोकपाल बेंच ने नौ अक्तूबर के अपने आदेश में कहा, 'शिकायत देखने के बाद, प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि आरोपों का मुख्य आधार ऐसी गतिविधियों से संबंधित है जो 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' के अध्याय-तीन के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आती हैं।' इस अध्याय में भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत अपराधों और दंड से संबंधित प्रावधान हैं। इसके बाद लोकपाल ने शिकायतकर्ता से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें यह बताया जाए कि मौजूदा शिकायत में कौन-कौन से आरोप 1988 के अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों से संबंधित हैं। बता दें कि शिकायतकर्ता ने 26 अगस्त को विधिवत शपथ-पत्र दाखिल किया था। लोकपाल के आदेश का हिस्सा रहे शपथ-पत्र में कहा गया है कि शिकायत के साथ संलग्न फॉर्म-एक में नामित केंद्रीय लोक सेवकों के खिलाफ आरोप आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग और पीएम केयर्स फंड से जुड़े योगदानों के संग्रह, प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित अनियमितताओं से जुड़े हैं।
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कब बनाया गया पीएम केयर्स फंड?
बता दें कि केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में यह फंड बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य कोविड महामारी जैसी किसी भी आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति से निपटना और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना था। इसे 27 मार्च, 2020 को एक लोक कल्याणकारी ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर किया गया था। ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2025 तक पीएम केयर्स फंड में कुल पैसा 8,452 करोड़ रुपये था। इसके एक साल पहले 7,173 करोड़ रुपये था। प्रधानमंत्री इस फंड के पदेन अध्यक्ष होते हैं। यह फंड पूरी तरह से स्वैच्छिक योगदान से चलता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है।