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लोकसभा की साइट ने येदियुरप्पा को सांसद बताकर किया गड़बड़झाला

Thu, 24 May 2018 12:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 May 2018 12:28 AM IST
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Lok Sabha website made Yeddyurappa as a parliamentarian, messed up

क्या बीएस येदियुरप्पा, श्रीरामुलु अभी भाजपा के सांसद हैं? यह एक बड़ा सवाल है। लोकसभा की वेबसाइट अभी इन्हें सांसद बता रही है। दिलचस्प यह भी है कि 18 मई 2018 को लोकसभा में भाजपा के 271 सांसद थे। 23 मई को इनकी संख्या 274 दर्ज हैं। 18 मई को लोकसभा की रिक्त सीटों की संख्या 7 दिखाई जा रही थी, लेकिन अब यह संख्या पांच है। इस बारे में कोई जानकारी दे पाने में लोकसभा सचिवालय काफी हड़बड़ी में है। उसे कोई जवाब नहीं सूझ रहा है और सचिवालय का कहना है कि वेबसाइट की गलत जानकारियों को ठीक किया जा रहा है।

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चौंकाने वाला एक तथ्य और है। पहले लोकसभा साइट पर श्रीरामुलु और येदियुरप्पा का बतौर सांसद इस्तीफा स्वीकार किए जाने का पत्र था। इस पत्र में साफ कहा गया है कि इन सांसदों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। 23 मई 2018 को इस पत्र का लोकसभा की साइट पर अता-पता नहीं है। महज तीन दिनों के भीतर लोकसभा की वेबसाइट ने बड़ा भ्रम पैदा कर दिया है। यह भी समझ से परे है कि 18 मई को जब भाजपा के 271 सांसद थे तो अचानक 23 मई को यह संख्या 274 कैसे हो गई। तीन सांसद अचानक कहां से भाजपा के खाते में बढ़ गए।
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लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय की भी सुन लीजिए। इस सवाल के जवाब में सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि बीएस येदियुरप्पा और श्रीरामुलु समेत तीन सांसदों के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है। ये तीनों अब सांसद नहीं है। लोकसभा की साइट पर पहले इस्तीफा स्वीकारे जाने का पत्र केवल दो सांसदों से ही संबद्ध था। लेकिन इस बारे में सुमित्रा महाजन के सचिवालय ने भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। 
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'सोर्स के हवाले से छापिएगा'

Lok Sabha website made Yeddyurappa as a parliamentarian, messed up

सचिवालय के अधिकारी का कहना है कि वेबसाइट में गड़बड़ी हो गई। डेटा गलत अपलोड हो गया है। इसे ठीक किया जा रहा है, लेकिन इस इस्तीफे को स्वीकारे जाने की खबर को सोर्स के हवाले से छापिएगा। यह पूछे जाने पर कि इस तरह से एक साथ कई स्तर कई आंकड़ों में इतनी चूक कैसे हुई तो सूत्र का कहना है कि इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया जा सकता। अधिकारिक बयान मांगे जाने पर सूत्र का कहना है कि हम ऐसा भी नहीं कर सकते।

दाल में कुछ काला

पहली बार संसद के लोकसभा की वेबसाइट में इतनी भ्रामक जानकारी सामने आई है। जरूर दाल में कुछ काला है। पहला बड़ा संदेह है कि 17 मई, 21 मई, 22 मई के पत्र तो हैं। लेकिन 18 मई को बीएस येदियुरप्पा का इस्तीफा लोकसभा स्पीकर द्वारा स्वीकारे जाने का पत्र नदारद है। ऐसे में दाल में कुछ काला होने के पूरे संकेत हैं। एक कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि केन्द्र में पूर्ण बहुमत के साथ अपने दम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार कहीं अल्पमत में तो नहीं आ गई है। इसको लेकर भी सांसदों की संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी न होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

क्या है नियम

नियम कहता है कि कोई भी सांसद या विधायक एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं हो सकता। तकनीकी तौर पर उसे एक सदन की सदस्यता ग्रहण करने के बाद दूसरे सदन की सदस्यता को छोड़ना होगा। इसी नियम का अनुसरण करते हुए कर्नाटक विधानसभा के सदस्य चुनकर आए बीएस येदियुरप्पा, श्रीरामुलु और एक अन्य सांसद ने अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष को भेज दिया था। बाद में बहुमत साबित न कर पाने के बाद येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लोकसभा की अधिकारिक वेबसाइट में तरह-तरह की भ्रामक स्थिति पैदा हो गई है। 

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