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Om Birla: लोकसभा अध्यक्ष बोले- राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं
Wed, 03 May 2023 05:15 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 03 May 2023 05:15 AM IST
सार
बिरला ने कहा कि दुनिया भर में विधायिकाओं को आदर्श के रूप में देखा जाता है और जनप्रतिनिधियों को अनुशासन और मर्यादा के साथ व्यवहार करना चाहिए।
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ओम बिरला
- फोटो : ANI
विस्तार
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि सदस्यों को समन्वित और पूर्व नियोजित तरीके से कार्यवाही को बाधित नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे यह गलत धारणा बनती है कि जनप्रतिनिधि सदन का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।
मेघालय विधानसभा के सदस्यों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें बातचीत और चर्चा के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए कार्यवाही बाधित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जनता में यह गलत संदेश जाता है कि जनप्रतिनिधि लोगों की चिंताओं को दूर करने के बजाय सदन का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।
बिरला ने कहा कि दुनिया भर में विधायिकाओं को आदर्श के रूप में देखा जाता है और जनप्रतिनिधियों को अनुशासन और मर्यादा के साथ व्यवहार करना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष की टिप्पणी दूसरे बजट सत्र के बाद आई है, जो 6 अप्रैल को संपन्न हुआ, जिसमें बार-बार व्यवधान देखा गया। इसकी वजह से बिना किसी सार्थक चर्चा के अनुदान की मांग को पारित कर दिया गया।
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राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं
उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही को बाधित करना उचित नहीं है। अध्यक्ष ने कहा, सदन के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के मौजूदा ढांचे के तहत एक सदस्य सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकता है, सार्वजनिक समस्याओं को उजागर और उनके निवारण की मांग कर सकता है। साथ ही नीति निर्माण पर सार्थक प्रभाव डाल सकता है।
बिरला ने कहा कि विधान सभाओं की नियम समिति नियमित रूप से बैठक करें, नियमों की समीक्षा करें और समय की मांग के अनुसार इसमें संशोधन करना सुनिश्चित करें। मेघालय विधान सभा के नव निर्वाचित सदस्यों के लिए संसदीय लोकतंत्र अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान द्वारा उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
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मेघालय विधानसभा के सदस्यों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें बातचीत और चर्चा के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए कार्यवाही बाधित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जनता में यह गलत संदेश जाता है कि जनप्रतिनिधि लोगों की चिंताओं को दूर करने के बजाय सदन का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।
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बिरला ने कहा कि दुनिया भर में विधायिकाओं को आदर्श के रूप में देखा जाता है और जनप्रतिनिधियों को अनुशासन और मर्यादा के साथ व्यवहार करना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष की टिप्पणी दूसरे बजट सत्र के बाद आई है, जो 6 अप्रैल को संपन्न हुआ, जिसमें बार-बार व्यवधान देखा गया। इसकी वजह से बिना किसी सार्थक चर्चा के अनुदान की मांग को पारित कर दिया गया।
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राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं
उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सदन की कार्यवाही को बाधित करना उचित नहीं है। अध्यक्ष ने कहा, सदन के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के मौजूदा ढांचे के तहत एक सदस्य सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकता है, सार्वजनिक समस्याओं को उजागर और उनके निवारण की मांग कर सकता है। साथ ही नीति निर्माण पर सार्थक प्रभाव डाल सकता है।
बिरला ने कहा कि विधान सभाओं की नियम समिति नियमित रूप से बैठक करें, नियमों की समीक्षा करें और समय की मांग के अनुसार इसमें संशोधन करना सुनिश्चित करें। मेघालय विधान सभा के नव निर्वाचित सदस्यों के लिए संसदीय लोकतंत्र अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान द्वारा उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।