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ओम बिरला बोले: लोकतांत्रिक मूल्य हमारी जीवन प्रणाली, भारत अन्य देशों के लिए संसदीय लोकतंत्र का मार्गदर्शक

Mon, 28 Nov 2022 06:38 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 28 Nov 2022 06:38 PM IST
सार

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारी परंपराएं और संस्कृति जीवन के सभी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन करती हैं। हमारे संविधान के संस्थापकों ने हमारे लोगों की नियति का मार्गदर्शन करने के लिए संसदीय लोकतंत्र पर निर्णय लिया क्योंकि यह शासन का सबसे अच्छा रूप है और प्रारम्भ से ही भारत अन्य देशों के लिए संसदीय लोकतंत्र का मार्गदर्शक रहा है।
 

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Lok Sabha Speaker Om Birla described India as guide to parliamentary democracy for other countries
36वें संसदीय इंटर्नशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को संसद भवन परिसर में लोक सभा सचिवालय द्वारा आयोजित 36 वें संसदीय इंटर्नशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया। संसदीय इंटर्नशिप कार्यक्रम में 17 देशों के 44 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि, लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्य हमारी जीवन शैली है। भारत ने अपने संविधान के माध्यम से लोकतंत्र की समृद्धि सुनिश्चित की है।

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लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि, हमारी परंपराएं और संस्कृति जीवन के सभी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन करती हैं। हमारे संविधान के संस्थापकों ने हमारे लोगों की नियति का मार्गदर्शन करने के लिए संसदीय लोकतंत्र पर निर्णय लिया क्योंकि यह शासन का सबसे अच्छा रूप है और प्रारम्भ से ही भारत अन्य देशों के लिए संसदीय लोकतंत्र का मार्गदर्शक रहा है।
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भारत की विविधता का किया जिक्र
भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए लोकसभा स्पीकर बिरला ने कहा कि, यह विविधता ही हमारी ताकत है और हमारा लोकतंत्र इसी विविधता पर फल-फूल रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान होने के साथ साथ भारतीय संविधान ने लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बल पर भारत की विविधता और लोकतंत्र को साथ रखा है। 17 से अधिक आम चुनावों और 300 से अधिक राज्यों के चुनावों में सत्ता का सुचारू हस्तांतरण भारत के संसदीय लोकतंत्र और इसकी नागरिक केंद्रित संवैधानिक प्रणाली की ताकत को दर्शाता है।
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लोक सभा सचिवालय के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना की
लोक सभा सचिवालय (प्राइड) द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि, शिक्षण-प्रशिक्षण एक आजीवन प्रयास है और विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान के साथ-साथ सक्रिय चर्चा से संस्थानों में अधिक जवाबदेही एवं पारदर्शिता आती है। उन्होंने कहा कि, विचार-विमर्श यह सुनिश्चित करता है कि शासन और संसदीय प्रणाली से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं को सभी प्रतिभागी आत्मसात करें।

लोक सभा की रिकॉर्ड उत्पादकता के संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि, संसद में उच्च स्तर की बहस और चर्चा के कारण पूरे देश में बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन हुआ है। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपनी शासन प्रणाली में अपने अनुभवों और प्रथाओं को साझा करें ताकि ज्ञान और सूचना से लोकतांत्रिक संस्थाएं और मजबूत बनें। इस अवसर पर महासचिव लोक सभा उत्पल कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया और लोक सभा सचिवालय में संयुक्त सचिव सिद्धार्थ महाजन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 भाषाई विविधता हमारी ताकत- लोकसभा अध्यक्ष बिरला  
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को हिंदी पखवाड़ा-2022 के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए। कार्यक्रम का आयोजन लोक सभा सचिवालय द्वारा संसद भवन परिसर में किया गया था। विजेताओं को बधाई देते हुए लोकसभा स्पीकर बिरला ने कहा कि, हिंदी पखवाड़ा हिंदी भाषा का उत्सव है। हिंदी भाषा लोगों को जोड़ती है। भाषाई विशिष्टता को पहचान का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए, लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि, भाषाई विविधता भारत की ताकत है। भाषाएं हमें एक दूसरे के साथ भावनात्मक निकटता बनाने और राष्ट्र को एकजुट करने में मदद करती हैं।

लोक सभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका और दायित्वों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि, लोक सभा सचिवालय के कर्मचारियों की संसद सदस्यों द्वारा क्षमता अनुसार उनकी भाषा में उनके कर्तव्यों का निर्वहन सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण दायित्व है। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने इस बात की सराहना की कि संविधान की 8वीं अनुसूची में वर्णित भाषाई विविधता लोक सभा सचिवालय के कर्मचारियों के प्रयासों से नियमित रूप से सुस्थित है।


महात्मा गांधी के सिद्धांतो का दिया उदाहरण
लोकसभा अध्यक्ष ने महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित स्वभाषा, स्वदेशी और स्वराज के तीन सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम ने स्वदेशी भाषाओं, विशेष रूप से हिन्दी को हमारे सामूहिक संघर्ष की नींव के रूप में स्थापित किया। बिरला ने आजादी के बाद देश में आए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में हिन्दी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि, अमृत काल में भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में समर्पित प्रयासों से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

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