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सांसदों को नसीहत: लोकसभा स्पीकर बोले- सदन के भीतर और बाहर शालीनता के उच्चतम मानदंडों का पालन करें
Wed, 15 Sep 2021 05:44 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 15 Sep 2021 05:44 PM IST
सार
81वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘सर्वोच्च जनतांत्रिक संस्था होने के नाते हम देश की अन्य संस्थाओं के लिए आदर्श हैं और हमें अपने कार्यों में अनुशासन और शालीनता के उच्चतम प्रतिमानों को बनाए रखना चाहिए।’’
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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
- फोटो : ANI
विस्तार
संसद और विधान मंडलों में अनुशासन और शालीनता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि सर्वोच्च जनतांत्रिक संस्था होने और अन्य संस्थाओं के लिये आदर्श बनने के नाते जनप्रतिनिधि अपने कार्यों में और सदन के भीतर तथा बाहर शालीनता के उच्चतम मानदंडों का पालन करना चाहिए।
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81वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते सदस्य का एक प्रतिष्ठित दर्जा होता है। जहां सदस्यों को अपने संसदीय कर्तव्यों को निर्बाध रूप से संपन्न करने के लिए विशेषाधिकार दिए गए हैं, वहीं इन विशेषाधिकारों के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं।’’
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उन्होंने कहा ‘‘सर्वोच्च जनतांत्रिक संस्था होने के नाते हम देश की अन्य संस्थाओं के लिए आदर्श हैं और हमें अपने कार्यों में अनुशासन और शालीनता के उच्चतम प्रतिमानों को बनाए रखना चाहिए।’’
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बिरला ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि हाल के वर्षों में जनप्रतिनिधियों के अशोभनीय व्यवहार की घटनाएं बढ़ी हैं और कहा कि इससे इन संस्थाओं की छवि धूमिल होती है। उन्होंने कहा कि विधान मंडलों की विश्वसनीयता उनके सदस्यों की भूमिका और आचरण से जुड़ी होती है और इसलिए उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे विधानमंडल के अंदर और बाहर शालीनता के उच्चतम मानदंडों का पालन करें।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जनप्रतिनिधि के आचरण के मानदंडों के बारे में विचार और मंथन हो।’’ इस सम्मेलन में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों ने भी भाग लिया। बिरला ने कहा कि इस विषय पर वर्ष 1992, 1997 और 2001 में अलग-अलग सम्मेलन आयोजित किए गए थे और उन सम्मेलनों में लिए गए संकल्पों एवं निर्णयों के क्रियान्वयन के संबंध में पीठासीन अधिकारियों, सभी दलों के नेताओं और सचेतकों द्वारा सामूहिक और समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आगामी 4-5 दिसम्बर, 2021 को लोक लेखा समिति का शताब्दी वर्ष समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, 81वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को अंतर संसदीय संघ (आईपीयू) के अध्यक्ष डुआर्टे पाचेको, ऑस्ट्रिया की राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष वोल्फगैंग सोबोटका, गुयाना की संसद के अध्यक्ष मंजूर नादिर ने भी संबोधित किया।
इसमें मालदीव के पीपुल्स मजलिस के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद, मंगोलिया के स्टेट ग्रेट हुरल के अध्यक्ष गोम्बोजाविन ज़ंदनशतर, नामीबिया की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष प्रो. पीटर काटजाविवी, श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अबेवर्धना, ज़िम्बाब्वे की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जैकब फ्रांसिस मुडेंडा, मॉरीशस की संसद के उपाध्यक्ष नाज़ुरली मोहम्मद जाहिद ने भी अपने विचार साझा किए।