Lok Sabha Polls: पंजाब में कांग्रेस-आप नेताओं की उम्मीद क्यों बन रही भाजपा? बंगाल जैसा चमत्कार होने की उम्मीद
किसान नेता रविंदर पाल सिंह चीमा ने अमर उजाला से कहा कि पंजाब के लोगों ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार से ऊबकर आम आदमी पार्टी पर भरोसा किया था। लेकिन पंजाब सरकार अपने किसी भी वादे पर खरी नहीं उतर पाई है। किसानों की समस्याएं अभी भी नहीं समाप्त हुई हैं। किसानों के धरने-प्रदर्शन अभी भी लगातार चल रहे हैं...
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पांच नदियों के जल से सिंचित पंजाब ने पूरे देश का पेट भरा है, लेकिन भाजपा को अब तक यहां सूखे का ही एहसास हुआ है। अकाली दल की बी टीम बनकर लड़ती आई भाजपा यहां दो-तीन लोकसभा सीटों पर ही जीत दर्ज करती रही है। विधानसभा में भी उसकी स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं रही है। यहां की राजनीतिक लड़ाई जो पहले कभी कांग्रेस और अकाली दल के बीच लगभग सीधी लड़ाई हुआ करती थी, अब आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अकाली दल के बीच चतुष्कोणीय लड़ाई के रूप में तब्दील हो चुकी है।
पारंपरिक तरीके से देखा जाए तो यदि कोई नेता-सांसद-विधायक अपनी पार्टी छोड़कर किसी दूसरे विकल्प को अपनाने की कोशिश करे, तो उसके सामने इन्हीं स्थापित दलों में से कोई एक विकल्प हो सकता है। जिस भाजपा के पास अभी भी राज्य से केवल दो सांसद और दो विधायक हैं, वह किसी सत्तारूढ़ दल के वर्तमान सांसद के लिए पहली पसंद नहीं हो सकता। लेकिन ऐसा हो रहा है। पिछले दो दिनों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के दो वर्तमान सांसदों ने अपनी-अपनी पार्टियों का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम है। इसका कारण क्या हो सकता है।
पंजाब सरकार की असफलता ने लोगों को किया निराश
किसान नेता रविंदर पाल सिंह चीमा ने अमर उजाला से कहा कि पंजाब के लोगों ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार से ऊबकर आम आदमी पार्टी पर भरोसा किया था। लेकिन पंजाब सरकार अपने किसी भी वादे पर खरी नहीं उतर पाई है। किसानों की समस्याएं अभी भी नहीं समाप्त हुई हैं। किसानों के धरने-प्रदर्शन अभी भी लगातार चल रहे हैं।
रविंदर पाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के छोटे-छोटे उद्योग कृषि के बाद यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। राज्य की विपरीत परिस्थितियों के कारण यहां के उद्योग आसपास के राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में स्थापित हो रहे हैं। सत्ता में आने के पहले आम आदमी पार्टी ने उद्योगों को मदद उपलब्ध कराने और आर्थिक-तकनीकी सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार के बनने के बाद औद्योगिक समूहों की उम्मीदें कमजोर हो गई हैं। अब उन्हें वर्तमान सरकार से कोई उम्मीद नहीं रह गई है।
अपराध बढ़ने से लोगों में असुरक्षा बढ़ रही
चीमा ने कहा कि राज्य में अपराध बढ़ने से सुखी-शांतिप्रिय पंजाबियों में चिंता बढ़ गई है। कई बड़ी हस्तियों की हत्या होने से पंजाब का माहौल बहुत खराब हुआ है। लोगों में यह संदेश गया है कि यहां उनके रोजगार-उद्योगों के साथ-साथ उनकी संपत्ति की सुरक्षा नहीं रह गई है। इससे लोग एक विकल्प की ओर देखने लगे हैं।
विकल्प नहीं बन पा रही कांग्रेस-अकाली
पंजाब में कांग्रेस लगभग नेतृत्व विहीन हो गई है। पार्टी के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ भाजपा-कांग्रेस में जा चुके हैं, तो अकाली दल पर लगा भ्रष्टाचार का दाग अभी भी कमजोर नहीं हो पाया है। उस पर एक कट्टरपंथी विचारधारा की पोषक होने के नाते भी पंजाब का एक वर्ग उसे वोट देने में हिचक दिखा रहा है। यदि किसानों का मुद्दा सुलझ गया होता तो भाजपा के साथ गठबंधन बनाकर अकाली दल अपनी स्थिति मजबूत कर सकता था, लेकिन कई कारणों से ऐसा नहीं हो पाया।
मजबूत हो रही भाजपा
भाजपा नेता सरदार आरपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि पंजाब में कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण भी भाजपा लोगों के बीच एक उम्मीद बनकर उभर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रवाद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति ने भी भाजपा के दावों को मजबूत करने का काम किया है। केंद्र के साथ रहकर पंजाब के लिए ज्यादा बेहतर करने की चाह ने भी दूसरे दलों के नेताओं को उसकी ओर आने के लिए मजबूर किया है।
राष्ट्रवाद के कारण बन रही पहली पसंद
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राष्ट्रवाद भाजपा की राजनीति का कोर एजेंडा है। जबकि इसी बीच पंजाब में कुछ लोगों की हरकतों से आतंकवाद के एक बार फिर से पनपने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। संभवतः यह भी एक बड़ा कारण है कि लोग अपने उद्योंगों के साथ-साथ अपनी जान की सुरक्षा के लिए भी मजबूत नेतृत्व के साथ जाना चाह रहे हैं। यदि तीन पीढ़ी के कांग्रेसी परिवार से लुधियाना सांसद रवनीत सिंह बिट्टू भाजपा का दामन थाम रहे हैं, तो उसकी जड़ें इसी राष्ट्रवाद और असुरक्षा के मुद्दे में छिपी हुई हैं।
सरदार आरपी सिंह ने कहा कि पंजाब और सिख समुदाय के लिए पीएम मोदी के द्वारा की गई पहल सिख समुदाय के आम लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यदि भाजपा सिख चेहरों को आगे रखकर पंजाब में अपना अभियान आगे बढ़ाती है, तो उसे अच्छी सफलता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस बार पंजाब के चुनाव में हम उसी तरह की सफलता की उम्मीद कर रहे हैं, जैसे पिछले चुनावों में पश्चिम बंगाल में पार्टी को सफलता मिली थी। पिछले चुनावों में लोगों की उम्मीदों से अलग भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल कर सभी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था। इस बार पार्टी को उसी तरह के चमत्कार की आस पंजाब में है।