Lok Sabha: 'लोकसभा चुनाव ब्रांड मोदी और ब्रांड विरोधी के बीच मुकाबला', भारतीय जनता पार्टी का दावा
Lok Sabha: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि लोकसभा चुनाव 'ब्रांड मोदी' और 'ब्रांड विरोधी' के बीच मुकाबला है। उन्होंने कहा कि भारत में भले ही राष्ट्रपति प्रणाली की सरकार नहीं है। लेकिन लोग इसी तर्ज पर वोट देते हैं। लोग चुनावों के दौरान एक नेता के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं।
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आगामी आम चुनाव से पहले सियासी नेताओं की बयानबाजियां तेज हो गई हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि लोकसभा चुनाव 'ब्रांड मोदी' और 'ब्रांड विरोधी' के बीच मुकाबला है। यह राष्ट्रपति पद का मुकाबला बन गया है। नरेंद्र मोदी के साथ लोगों के भावनात्मक जुड़ाव को देखने पर इसमें कोई शक नहीं रह जाता कि कौन जीतेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 370 सीट के घोषित लक्ष्य को दक्षिणी राज्यों और पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ट सीट से मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी तमिलनाडु में सात-आठ सीट जीतेगी, तेलंगाना में आठ, आंध्र प्रदेश में चार और करेल में कुछ सीट जीतना 1000 फीसदी तय है। आलोक का यह चौंकाने वाला दावा है, क्योंकि भाजपा ने वाम दलों और कांग्रेस के वर्चस्व वाले राज्य में कभी भी लोकसभा सीट नहीं जीती है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसकी कोई सीट नहीं है और तेलंगाना में चार सीट हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या उनका अनुमान तमिलनाडु जैसे राज्य को लेकर बहुत आशावादी है, उन्होंने कहा, बिल्कुल नहीं। लोगों में हिंदुत्व की भावना बढ़ी है। द्रविण राजनीति की अपनी सीमा है। उन्होंने कहा कि मोदी के एक दशक लंबे कार्यकाल का असर हिंदुओं में उनके धर्म में पुनरुत्थान के गौरव करने के रूप में आया है। लोग अब अपनी हिंदू पहचान का दिखावा करने में शर्मिंदगी महसूस नहीं करते हैं। हालांकि, हिंदू होना और भारतीय होना एक ही है।
आलोक ने अपने गृह राज्य के बारे में कहा कि वहां भी मोदी की ब्रांड इक्विटी है, जो भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत सुनिश्चित करेगी। उनसे जब पूछा गया कि जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के एनडीए में वापस आने से नीतीश की चुनावी स्थिति राज्य में मजबूत रहेगी, तो उन्होंने ना में जवाब दिया। उन्होंने कहा, यह चुनाव इस तरह हो रहा है कि या तो आप मोदी के साथ हैं या मोदी के खिलाफ हैं। इसमें नीतीश और अन्य लोग चीजों को जोड़ेंगे, लेकिन एक ब्रांड नहीं बन सकते। आलोक ने भाजपा से अपने सियासी करियर की शुरुआत की थी और फिर पार्टी में लौटने से पहले वह जदयू में शामिल हो गए थे।
उन्होंने कहा, भारत में भले ही राष्ट्रपति प्रणाली की सरकार नहीं है। लेकिन लोग इसी तर्ज पर वोट देते हैं। लोग चुनावों के दौरान एक नेता के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं।