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Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2019: UP BSP MLA Chandra Prakash Mishra joins BJP

क्या बसपा छोड़ भाजपा में आए चंद्रप्रकाश मिश्रा की किस्मत इस बार खुलेगी?

Wed, 20 Mar 2019 07:56 PM IST
अमित मंडल अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Wed, 20 Mar 2019 07:56 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: UP BSP MLA Chandra Prakash Mishra joins BJP
चंद्रप्रकाश मिश्रा - फोटो : ani

अमेठी के गौरीगंज से वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए चंद्रप्रकाश मिश्रा भी आज भाजपा के 'चौकीदार' बन गए। भाजपा में उनके शामिल होने के समय केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मंच पर मौजूद थीं जो राहुल गांधी को अमेठी से उखाड़ फेंकने के लिए 2014 से ही जोर आजमाइश कर रही हैं। 

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मिश्रा को भाजपा की सदस्यता दिलाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी सामने आए। उन्होंने मिश्रा के भाजपा में शामिल होने पर खुशी जाहिर की और इसे कांग्रेस के लिए अमेठी में खतरे की घंटी बताया। लेकिन जानकार बताते हैं कि चंद्रप्रकाश मिश्रा का भाजपाई खेमे में जाना प्रतीकात्मक ज्यादा है और जमीनी स्तर पर इसका कोई बड़ा महत्व नहीं है। 
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सत्ता से पूछिए सवाल

विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पर हमेशा लोकतंत्र के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते रहे हैं। भाजपा भी इसी तरह के आरोप विपक्ष पर लगाती रही है। खुद प्रधानमंत्री ने भी इसी तरह का ब्लॉग लिखकर कांग्रेस पर हमला बोला है। आज भाजपाई खेमे में शामिल होने वाले चंद्रप्रकाश मिश्रा ने लगभग हफ्ते भर पहले ही ट्वीट कर कहा था कि जिस दिन आप में सत्ता से सवाल पूछने की हिम्मत आ जाएगी, उस दिन सही मायने में आप देशभक्त होंगे। सरकार चाहे किसी भी दल की क्यों न हो। अब भाजपा में आने के बाद उनका रुख किस प्रकार का होगा, यह देखने वाली बात होगी। 
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दरअसल, चंद्रप्रकाश मिश्रा की किस्मत उस समय अचानक खुल गई थी जब मायावती ने 2007 के विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को आजमाया। ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में मिश्रा को बसपा का टिकट मिला और मायावती की लहर में जीत हासिल कर वे लखनऊ विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे। लेकिन अगले ही चुनाव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी और वे अपनी सीट नहीं बचा सके। 

हालांकि इसके बाद भी वे बसपा के साथ बने रहे लेकिन उन्हें भी एक 'दमदार' साख की जरूरत थी जहां वे अपना घरौंदा बना सकें। मिश्रा की चाह अब भाजपा में आकर खत्म होती जान पड़ती है। लेकिन, भाजपा के एक नेता के मुताबिक मिश्रा जमीनी नेता नहीं हैं और उनके पार्टी में आने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। यह जमीनी कम, लेकिन अपने राजनीतिक विरोधियों पर दबाव डालने का मनोवैज्ञानिक खेल ज्यादा है। 

दो दिन पहले तक मायावती के साथ थे

चंद्रप्रकाश मिश्रा के ट्विटर हैंडल पर दो दिन पहले ही मायावती के दो ट्वीट रिट्वीट किए गए हैं जो यह बताते हैं कि अंतिम समय तक वे बसपा के सच्चे सिपाही होने का दम भरते रहे। हालांकि, इसी दिन वे सच्चे राजनेता होने का आभास देते रहे और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि देते नजर आए। 


हालांकि, इसके पहले वे सत्ता के छलावापूर्ण व्यवहार से काफी व्यथित दिखे और लोगों को सत्ता के व्यवहार को समझने की दुहाई देते दिखे। भाजपा की आलोचना में भी वे पीछे नहीं रहे और उसके भगवान राम पर नीति का विरोध करते रहे।  
 

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