लोकसभा चुनाव 2019: भरपूर फसल देती रही है राष्ट्रवाद की बयार
- 1967 चुनाव में 65 का भारत-पाक युद्ध और 1999 में करगिल जंग ने इंदिरा और अटल को पहुंचाया फायदा
- 1971 युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर इंदिरा अपने पक्ष में जबरदस्ता राजनीतिक माहौल बनाने में रहीं कामयाब
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सत्ताधारी दल के लिए राष्ट्रवाद की बयार अच्छी चुनावी फसल देती रही है। देश के चुनावी इतिहास में 1967 में इंदिरा गांधी और 1999 चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रवाद के बने माहौल का राजनीतिक लाभ उठा चुके हैं। इतना ही नहीं 1971 में कांग्रेस में मची गंभीर अंदरुनी कलह के बावजूद मार्च में हुए चुनाव में इंदिरा ने किसी तरह अपनी सरकार बचा ली थी। लेकिन करीब आठ महीने बाद हुए युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर इंदिरा ने अपने पक्ष में जबरदस्त राजनीतिक माहौल बना लिया था। 71 चुनाव में जीत के बाद सरकार बनते ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल सैम मानिकशॉ को बांग्लादेश के गठन के ब्लू प्रिंट पर काम करने का आदेश दे दिया था।
अब 2019 चुनाव में मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार बेरोजगारी, आर्थिक और विकास जैसे मुद्दे को पीछे रख राष्ट्रवाद का माहौल बनाने में जुटी है। भारत के राजनीतिक रिकार्ड में दर्ज है कि 1962 के भारत चीन युद्ध की वजह से देश पर जबरदस्त आर्थिक बोझ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री इससे उबर भी नहीं पाए थे कि 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया। जय जवान जय किसान के नारे के साथ शास्त्री ने पाकिस्तान के दांत तो खट्टे कर दिए थे लेकिन आर्थिक व्यवस्था चड़माड़ा गर्इ थी।
इसके बाद ताशकंद समझौते के दौरान उनकी अकस्मात मौत हो गई और कांग्रेसे की कमान इंदिया गांधी के हाथ में आ गई। 1961-66 की पंचवर्षीय योजना में आर्थिक वृद्धी के 5.6 फीसदी के लक्ष्य के बदले सिर्फ 2.4 की वृद्धी हासिल की जा सकी। उधर कांग्रेस अंदरुनी कलह के चलते टूट की कगार पर पहुंच गया था। तब इंदिरा ने 1967 के चुनाव में कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में 65 युद्ध में शानदार जीत का कार्ड खेला। जिसका सीधा फायदा उन्हें मिला।
इसी तरह 1999 में सितंबर-अक्टूबर में हुए चुनाव के कुछ महीने पहले ही करगिल युद्ध समाप्त हुआ था। उस साल अप्रैल में विश्वास प्रस्ताव में अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली 13 महीने की मिली जुली सरकार एक वोट से गिर गई थी। उस राजनीतिक अस्थिरता के बीच अटल बिहारी को चुनाव में करगिल युद्ध की जीत से बने राष्ट्रवाद के माहौल का खासा फायदा हुआ था। 1999 चुनाव की जीत के बाद अटल सहयोगियों की मदद से पांच साल सरकार चलाने में कामयाब रहे थे।