फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2019: Sheila Dikshit does not want alliance in Delhi because of these reasons

गठबंधन कर यूपी की तरह कांग्रेस को ऊंट के बल नहीं बिठाना चाहतीं शीला दीक्षित

Tue, 05 Mar 2019 11:04 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Tue, 05 Mar 2019 11:04 PM IST
विज्ञापन
Lok Sabha Elections 2019: Sheila Dikshit does not want alliance in Delhi because of these reasons
शीला दीक्षित (फाइल फोटो)

शीला दीक्षित जितनी सहज और सरल दिखती हैं, राजनीति की चतुराई और बारीकियों में उतनी ही माहिर हैं। 15 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने जहां न तो भाजपा को पनपने दिया वहीं कांग्रेस के अपने विरोधियों को भी न ही चैन की सांस लेने दी। शीला ने राजनीति की शतरंज पर फिर मोहरे बिछाने की तैयारी कर ली है और वह दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत दिखाना चाहती हैं। आम आदमी पार्टी से गठबंधन के राजी न होने के पीछे उन्हें ही अपनी पार्टी में भी सबसे बड़ा गतिरोध माना जा रहा है। शीला के करीबी बताते हैं कि गठबंधन करके उत्तर प्रदेश की तरह दिल्ली में कांग्रेस को ऊंट के बल नहीं बिठाना चाहती।

विज्ञापन


सूत्र का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अस्सी के दशक में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार थी। नब्बे के दशक में शुरूआती चुनाव में भी पार्टी की दशा बहुत खराब नहीं थी। लेकिन नब्बे के ही दशक में बसपा के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस राजनीतिक गठबंधन की पार्टी बन गई और धीरे-धीरे प्रदेश का संगठन ऊंट की तरह बैठ गया। अस्सी साल की शीला इस बारीकी को बखूबी समझती है।
विज्ञापन


क्यों नहीं चाहती शीला गठबंधन

-दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद से शीला दीक्षित ने कभी भी गठबंधन के पक्ष में अपनी राय नहीं दी। वह मानती हैं कि गठबंधन होने का मतलब है आधी या कुछ इससे अधिक की दिल्ली पर चुनाव लडऩा। यानी राजनीतिक ताकत को पहले से घटा हुआ मान लेना। इसका असर पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं पर सीधा पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


-लोकसभा चुनाव में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस है। आम आदमी पार्टी पीछे है। शीला की शुरू से रणनीति रही है कि वह दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत दिखाते रहना चाहती हैं। 1998 में भी शीला दीक्षित ने मजबूती के साथ कांग्रेस को खड़ा दिखाकर भाजपा से सत्ता छीनी थी। वह इस रणनीति को बनाए रखने के पक्ष में हैं।

-शीला दीक्षित का मानना है कि 2013 में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह यूपीए-2 सरकार के खिलाफ देश भर में फैलाया गया प्रोपैगैंडा था। कॉमन वेल्थ गेम समेत अन्यको लेकर प्रोपैगैंडा उनकी तत्कालीन सरकार के खिलाफ भी फैलाया गया। शीला का मानना है कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री थी और दिल्ली में केन्द्र सरकार के खिलाफ फैलाएगए प्रोपैगैंडा का असर ज्यादा पड़ा। इसलिए 2013 के विधानसभा चुनाव में नकारात्मक परिणाम आए। जबकि करीब छह साल बीत जाने के बाद उनकी सरकार पर लगे कोईआरोप साबित नहीं हो पाए।

-दिल्ली में 1998-2013 तक हुए विकास कार्य को लोग याद कर रहे हैं। शीला के नेतृत्व वाली तीन सरकार ने राजधानी की सड़कों को जाम से मुक्ति दिलाई और दिल्ली कोमहानगर का रूप दिया। शीला दीक्षित का मानना है कि उन्होंने बहुत ही कठिन समय में कांग्रेस अध्यक्ष की बागडोर संभाली है। उन्हें जनता और पार्टी के नेता, कार्यकर्ता से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है।

-दिल्ली में कांग्रेस की सरकार के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई, लेकिन लोकसभा चुनाव में सात सीटों पर जीत के अलावा भाजपा को कोई बड़ी सफलतानहीं मिली। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा ने दिल्ली में अपने संगठन में प्रयोग करके अपनी स्थिति काफी कराब कर लिया है। इसका भी फायदा कांग्रेस को मिलना तय है।

Lok Sabha Elections 2019: Sheila Dikshit does not want alliance in Delhi because of these reasons
शीला दीक्षित

लड़ेगी तभी तो जीतेगी कांग्रेस

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री राजनीति में राजनीतिक लड़ाई की पक्षधर हैं। उनका मानना है कि राजनीति में जीत-हार लगी रहती है। पार्टी लड़ेगी तभी तो जीतेगी। शीला के एककरीबी रणनीतिकार के अनुसार जब पार्टी आधे पर पूरे ताकत से लड़ेगी तो आधे से कम पर सफलता की संभावना रहेगी। लेकिन जब पूरी दिल्ली पर पूरी ताकत से लड़ेगी तोआधे से अधिक सीटों पर लड़ाई की उम्मीद बरकरार रहेगी। इससे न केवल जनता बल्कि पार्टी के कार्यकर्ता में भी अच्छा संदेश जाएगा।

आम आदमी पार्टी का दावा खोखला

कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल जनता का जो विश्वास हासिल करके सत्ता में आए थे, अब वह बात नहीं है। दिल्ली की एक बड़ी आबादी अरविंद केजरीवाल को गंभीर नेता नहीं मानती। आम आदमी पार्टी के तमाम दावे खोखले साबित हुए हैं। कांग्रेस पार्टी के एक प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के अनुसार अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद और उसकी गरिमा को बनाए रख पाने में नाकाम रहे हैं। वैसे भी अगले साल कांग्रेस को दिल्ली में विधानसभा चुनाव लडऩा है। वहां पार्टी का सीधा मुकाबला भाजपा और आम आदमी पार्टी से होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed