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इन कारणों से नागपुर ने नितिन गडकरी को दोबारा चुना अपना नेता
Thu, 23 May 2019 09:26 PM IST
Prachi Priyam
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prachi Priyam
Updated Thu, 23 May 2019 09:26 PM IST
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नितिन गडकरी (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
नागपुर
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महाराष्ट्र की नागपुर लोकसभा सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता नितिन गडकरी ने करीब दो लाख वोटों के भारी अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी नाना पटोले को हरा कर अपना झंडा बुलंद किया।
नागपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी दोबारा मैदान में थे। नागपुर को संघ का गढ़ माना जाता है। क्योंकि संघ का मुख्यालय भी यहीं हैं, लेकिन एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि यहां सबसे अधिक चुनाव कांग्रेस ने जीते हैं। इस बार कांग्रेस ने गडकरी के सामने नाना पटोले को उतारा था। वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की ओर से अब्दुल करीम और बसपा की ओर से मोहम्मद जमाल को टिकट दिया गया था।
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इन कारणों से जीते नितिन गडकरी-
- नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। यहां संघ के प्रभाव से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलना स्वभाविक है।
- नितिन गडकरी भाजपा के बड़े चेहरे और केंद्रीय मंत्री हैं। यहां उनकी छवि 'विकास पुरुष' की है।
- नितिन गडकरी नागपुर लोकसभा सीट से पहली बार 2014 में चुनाव लड़े थे और भारी समर्थन के साथ जीते थे।
- इसके बाद उनका नाम पार्टी के सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस वाले नेताओं में गिना जाता है।
- यह सवर्ण और दलित बाहुल्य सीट है, लेकिन यहां सवर्णों का असर ज्यादा दिखता है। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला है।
- उनके प्रतिद्वंदी नाना पटोले ने खैरलांजी दलित हत्याकांड के बारे में विवादित टिप्पणी की थी जिससे दलित समुदाय उनसे नाराज हो गया था।
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