कानों देखी : राहुल और प्रियंका का लोकतंत्र, क्या जूतेबाज सांसद को मिलेगा टिकट
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प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव बनाए जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी के नेताओं को अब निर्णय के लिए बड़ा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, लेकिन अब राहुल और प्रियंका के लोकतंत्र के कारण लोगों का इंतजार बढ़ गया है। यूपी में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी निर्णय गया है। प्रमोद तिवारी, जतिन प्रसाद या ललितेश पति त्रिपाठी .....में कौन? राजबब्बर.....पर क्या? ऐसे ही हरियाणा में कहां अशोक तंवर और कहां भूपेन्द्र हुड्डा? यूपी में कुछ और सीटों पर लोकसभा प्रत्याशी को लेकर राहुल और प्रियंका की राय जुदा-जुदा है। राहुल की टीम के तीन दमदार चेहरे हैं। राहुल पीएल पुनिया की काफी सुनते हैं। अलंकार की रिपोर्ट पर भी ध्यान देते हैं। के. राजू को भी राहुल गांधी का विश्वास हासिल है। प्रियंका सुनती सबकी है, निर्णय अपने हिसाब से करती हैं। कुछ मामलों में राय का मेल न होने पर देर हो जा रही है।
क्या जूताबाज सांसद को टिकट मिलेगा?
भाजपा के भीतर भी यह बड़ा सवाल है। कोई कुछ नहीं बोलता लेकिन शीर्ष स्तर माना जा रहा है कि सांसद-विधायक की जूतम पैजार ने पार्टी की काफी भट्ट पिटवा दी है। हालांकि पार्टी के गोरखपुर क्षेत्र के नेता इस मामले को लेकर दो खेमें में बंटे हैं। पार्टी का बड़ा धड़ा विधायक और सांसद दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के पक्ष में है। लेकिन अभी विधानसभा का चुनाव तो हो नहीं रहा। इसलिए विधायक पर इतना बड़ा खतरा नहीं है। अलबत्ता सांसद पर टिकट न मिलने की तलवार लटकी हुई है। जूताबाज सांसद स्थिति की गंभीरता को देखकर को कड़ी मेहनत कर रहे हैं। बताते हैं इस मामले में अंतिम निर्णय भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रजामंदी पर ही टिकेगा।
शीला दिक्षित ने बिगाड़ा बना हुआ काम
कभी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को बहुत खांसी आती थी। इस बार शीला दिक्षित ने खांस दिया और बना काम बिगड़ गया। शरद पवार और चंद्र बाबू नायडू भी कोशिश भी काम नहीं आई। हालांकि केजरी टीम के एक सदस्य को लग रहा है कि अभी दिल्ली में कांग्रेस से गठबंधन की उम्मीद का दिया बुझा नहीं है। बताते हैं अजय माकन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चहेते हैं। वह दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के प्रबल पक्षधर हैं। केजरीवाल भी लोकसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति को तौल चुके हैं। इसलिए वह भी गठबंधन के लिए तैयार हैं। तीन सीट कांग्रेस, तीन सीट आप और एक सहयोगी का फार्मूला तैयार भी हो गया। अजय माकन पूरी तैयारी के साथ बैठे। वहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित भी बैठी थीं। बताते हैं माकन ने प्रस्ताव की पुरजोर वकालत की लेकिन शीला दिक्षित ने इसका खुलकर विरोध कर दिया।
महारथी हैं नितिन गड़करी
केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी सच में महारथी हैं। आजकल गड़करी की हर अदा पर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की टीम निगाह लगाए हैं। गड़करी जी रह-रहकर कुछ ऐसा बोल देते हैं कि संघ की टॉप लीडरशिप मुस्करा देती है। लेकिन टीम मोदी-शाह पसीने से तर-तर हो जाती है। बताते हैं इसका कारण शाह और संघ, प्रधानमंत्री मोदी और संघ के बीच में तालमेल कुछ फंस रहा है। आरएसएस प्रमुख ने भले ही एयरस्ट्राइक पर वायुसेना की तारीफ की, लेकिन वह केन्द्र सरकार की कश्मीर और पाकिस्तान की नीति से संतुष्ट नहीं हैं। इसी तरह से तमाम ,सामाजिक मुद्दों को लेकर वह चिंतित हैं। झंडेवालान सूत्रों को भी लग रहा है कि 11 अप्रैल तक एयर स्ट्राइक और राष्ट्रवाद के मुद्दे की हवा निकल सकती है। वैसे भी पहले के कई मुद्दे टॉय टॉय फिस्स हो चुके हैं। संघ के कार्यकर्ताओं, व्यापारियों की नाराजगी बढ़ी हुई है। ऐसे में संवाद भी पहले से काफी घटा है। माना जा रहा है कि नितिन गड़करी इसे समझते हैं और मौका देखकर चुप चाप अपना पक्ष रख देते हैं। गड़करी पिछले कुछ समय से लगातार कह भी रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री की दौड़ में नहीं है। उनके मुंह से यह शब्द पार्टी के कुछ नेताओं को शोला नजर आने लगते हैं।
साइकिल पर न तो हाथी बैठ सकती है और न ही हाथी पर साइकिल
यूपी में साइकिल और हाथी साथ चल रही है। लेकिन हाथी कब बिदक जाए, कहा नहीं जा सकता। हाथी को साइकिल के टायर में हवा भी कम नजर आ रही है। हालांकि दोनों ही दलों में सीटों का बंटवारा हो गया है। प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी पूरी होने जा रही है। लेकिन थोड़ी बहुत खुस्स...फुस्स बनी हुई है। बताते हैं अखिलेश यादव ने प्रत्याशी के चयन में कुछ सलाह देने की कोशिश की तो मायावती अपने अंदाज में आ गई। बताते हैं 80 सीटों वाले यूपी में 38 सीटों पर चुनाव लडऩा भी मायावती को बड़ी मुश्किल से रास आ रहा है। प्रचार अभियान को लेकर अभी बहुत कुछ साफ नहीं है। मंच का साझा या बसपा के साथ तालमेल वाले चुनाव प्रचार अभियान का सस्पेंस खत्म होने के बाद ही बहुत कुछ साफ होने की उम्मीद है। वैसे बसपा सुप्रीमो बहन जी का स्वभाव और राजनीति दोनों है। वह अपने सार्वजनिक तौर पर बराबरी में कम लोगों को खड़े होने का अवसर देती हैं।
सबकुछ भाजपा के पास, फिर भी परेशान
प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता भले बढ़ी है, लेकिन भाजपा की चिंता अभी कम नहीं हुई है। यह चिंता लोकसभा चुनाव में अबकी बार फिर मोदी सरकार और अबकी बार 400 के पार को लेकर है। जबकि पार्टी के पास धन, तकनीक, संसाधन लबालब है। भाजपा अध्यक्ष ने मैडिसन मीडिया को मीडिया, सोशल मीडिया में प्रचार का जिम्मा सौंपा है। पीयूष पांडे और प्रसून जोशी की बोद्धिकता इसे काफी रोचक रूप दे सकती है। रेल मंत्री पीयुष गोयल के पास फिर बड़ी जिम्मेदारी है। राज्यसभा सांसद विनय सह बुद्धे, भाजपा महासचिव राम माधव की टीम के सदस्यों ने भी कड़ी मेहनत की है और लगातार काम कर रहे हैं। आईटी के प्रमुख अमित मालवीय की टीम नए तेवर के साथ तैयार हैं। इसके अलावा करीब 350 सीटों पर भाजपा के सौकड़ों वालेंटियर की टीम लगी हुई है। अंत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोई भी गणित अचानक बदलने की माद्दा रखते हैं। जबकि विपक्षी दलों के पास न तो धन है, न संसाधन और न ही तकनीक का प्रचुर इस्तेमाल की स्थिति। कांग्रेस पार्टी के पास धनवान नेता जरूर हैं, लेकिन पार्टी का कोष सूखा है।
राहुल गांधी और आंटी का ख्याल
राहुल गांधी को एक घटना से समझिए। मोहसिना किदवई एयरपोर्ट पर मिल गईं। राहुल गांधी भी वहां थे। दुआ-सलाम हुआ। मोहसिना आगे बढने को हुईं कि राहुल ने झुककर मोहसिना का बैग उठा लिया। एसपीजी का एक सदस्य आगे बढ़ा तो राहुल ने मना करते हुए कहा कि उनकी आंटी हैं। राहुल ने कुछ लेने का प्रस्ताव रखा। मोहसिना जी ने कोल ड्रिंक्स पर सहमति जताई। कांग्रेस अध्यक्ष आगे बढ़े तो एसपीजी के सदस्य ने वहां भी सक्रियता दिखाई। कांग्रेस अध्यक्ष ने फिर मना कर दिया। कहा आंटी हैं। राहुल को जानने वाले बताते हैं कि वह रिश्तों का बहुत ख्याल रखते हैं। आम लोगों के बीच में पार्टी अध्यक्ष बन जाते हैं और निजी भेंट में आंख का पानी साफ दिखाई देता है। कोई चाहे तो इसे भी शीला दीक्षित से पूछ ले।
अब एयरस्ट्राइक संभालेगी भाजपा की मिशन कोलकाता
पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का उत्साह कभी उछाल मार रहा था, इधर जोश थोड़ा ठंडा पड़ गया है। भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने भी पिछले कुछ समय से राज्य में आक्रामक राजनीति में संभलकर चलने का रास्ता अपनाया है। जनवरी, फरवरी में भाजपा ने घोषणा बहुत की लेकिन योजना फलीभूत नहीं हो पाई। अचानक कोलकाता पुलिस और सीबीआई अधिकारियों के झगड़े में काफी कुछ पटरी से उतर गया। हालांकि राज्य में भाजपा की स्थिति पहले से काफी अच्छी है। अब प्रदेश भाजपा की टीम के सदस्य कह रहे हैं कि एयरस्ट्राइक बालाकोट ने काफी कुछ ठीक कर दिया है। बस इंतजार कीजिए 23 मई का।