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प्रियंका गांधी वाराणसी से नहीं लड़ेंगी चुनाव, कांग्रेस ने पीएम मोदी को दिया वाकओवर!

Thu, 25 Apr 2019 08:17 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Amit Digital Updated Thu, 25 Apr 2019 08:17 PM IST
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lok sabha elections 2019 Priyanka Gandhi not contesting from varanasi, Is this a walkover to PM Modi
प्रियंका गांधी, नरेंद्र मोदी (सांकेतिक) - फोटो : Amar Ujala Graphics

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में रोड शो कर रहे हैं। शुक्रवार 26 अप्रैल को वे अपना नामांकन दाखिल करेंगे। लेकिन तमाम चर्चाओं के बाद भी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रियंका गांधी को नहीं उतारा, और उनकी जगह अजय राय को वाराणसी से अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी। क्या प्रियंका गांधी को मैदान में न उतारकर कांग्रेस ने मोदी को वाकओवर दे दिया? क्या प्रियंका गांधी पीएम मोदी के सामने चुनाव जीतने की स्थिति में थीं? अगर वे चुनाव न भी जीततीं तो क्या उनकी उम्मीदवारी से कांग्रेस को पूर्वांचल में जमीनी मजबूती नहीं मिलती? इन सवालों पर लोगों की राय अलग-अलग है। 

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'कांग्रेस ने बचाई प्रियंका की इज्जत'

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुग ने अमर उजाला से कहा कि प्रियंका गांधी के मैदान में उतरते ही उनके पति के खिलाफ कथित जमीन के घोटाले का मामला सुर्खियां बन जाता। जनता मोदी जैसे देश की सेवा करने वाले व्यक्ति के सामने एक कथित भूमाफिया की पत्नी को मौका क्यों देती। जाहिर है कि प्रियंका गांधी की जमानत जब्त हो जाती जिससे उनकी किरकिरी होती। इससे उनकी भविष्य की राजनीति पर भी नकारात्मक असर पड़ता। इसलिए कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को मैदान में न उतारकर उनकी इज्जत बचाई है।

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मजबूत ब्राह्मण नेतृत्व की कमी होती पूरी

एक नेता के मुताबिक, भाजपा की राजनीति में ब्राह्मण लगातार हासिये पर जा रहा है। भाजपा के वर्तमान नेतृत्व ने लगातार ओबीसी और दलित केंद्रित राजनीति की तरफ ध्यान केंद्रित किया है। लेकिन सामाजिक समायोजन की इस कोशिश में ब्राह्मणों की सबसे ज्यादा उपेक्षा हुई है। इस बार यूपी में 80 में से सिर्फ 11 ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे गए हैं, उनकी संख्या के लिहाज से बेहद कम है। बिहार में भी ब्राह्मण और भूमिहार उम्मीदवार न के बराबर उतारे गए हैं। 

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नेता के मुताबिक, कांग्रेस के कमजोर होने के बाद ब्राह्मण कभी समाजवादी पार्टी की तरफ तो कभी बहुजन समाज पार्टी की ओर जा रहा है। अगर प्रियंका गांधी इस चुनाव में उतरतीं तो इससे ब्राह्मण वोट बैंक सीधे कांग्रेस के पास आता जो पार्टी के लिए बेहद फायदेमंद होता। 

मुस्लिम वोट बैंक पहले ही प्रियंका गांधी के आने की वजह से कांग्रेस की तरफ आया है जो सपा-बसपा के लिए चिंता का सबब हुआ है। अगर इस लिहाज से देखें तो कांग्रेस थिंक टैंक ने प्रियंका गांधी को सीधे चुनावी राजनीति में न उतारने की सलाह देकर एक गलती की है। 

'विधानसभा चुनाव के लिए मिलती मजबूती'

कांग्रेस के एक शीर्ष नेता ने कहा कि जब प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी थी तो उन्हें नरेंद्र मोदी के खिलाफ मैदान में उतारना चाहिए था। इससे पूरे पूर्वांचल में पार्टी से दूर जा चुके वोटरों को वापस लाने में मदद मिलती। 



नेता के स्वीकार किया कि ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित वोट बैंक जो कांग्रेस की राजनीतिक ताकत की रीढ़ हुआ करता था, मजबूत नेतृत्व और स्थानीय नेताओं के अभाव में उससे दूर जा चुका है। लेकिन प्रियंका के मैदान में उतरने से ये तीनों मजबूत वोट बैंक पार्टी की तरफ वापस आते। अगर प्रियंका को चुनाव में उतारा जाता तो इस चुनाव में उन्हें जीत मिलती या नहीं, यह अलग बात है लेकिन विधानसभा चुनाव तक पार्टी यूपी में बहुत मजबूत हो जाती जो कि राहुल गांधी का लक्ष्य है।

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