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Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2019: Once Congress leaders hesitate of holding Rahul Gandhi public meeting

कभी राहुल गांधी की जनसभा कराने से डरते थे कांग्रेस के नेता

Sat, 23 Mar 2019 09:35 PM IST
Nilesh Kumar शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sat, 23 Mar 2019 09:35 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Once Congress leaders hesitate of holding Rahul Gandhi public meeting
राहुल गांधी - फोटो : Instagram

याद कीजिए 2013 और 2014 का समय। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक बड़े नेता बताते हैं कि उनसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जनसभा के लिए राय मांगी जाती थी तो कुछ भी कहने से डरते थे। सूत्र का कहना है कि दबाव में कांग्रेस के नेता के लिए तब छोटा मैदान खोजा था, क्योंकि जनता आती ही नहीं थी। राहुल गांधी के साथ सक्रिय एक अन्य नेता का कहना है कि वह नोएडा से सटे भट्ठा पारसौल गांव पहुंचे। किसानों की जमीन के लिए आंदोलन शुरू कर दिया, लेकिन राहुल गांधी के इतने बड़े प्रयास के लिए बमुश्किल ही जनसमर्थन ही मिल पाता था। 2014 में अलीगढ़ में हुई जनसभा के आयोजकों में एक का कहना है कि बड़ी मशक्कत के बाद कुछ हजार लोग आए थे। 

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बिहार में तो सपना था, बंगाल छोड़ ही दीजिए

बिहार के शकील अहमद कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता है। राहुल गांधी तब और युवा थे। एंग्री यंग मैन की स्टाइल में राजनीति कर रहे थे, लेकिन इसके बाद भी बिहार में उनकी जनसभा कराना टेढ़ी खीर जैसा था। बंगाल में भी कमोबेश यही स्थिति थी। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से लेकर राहुल गांधी के दफ्तर तक को काफी कुछ करना पड़ता था।  

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लखनऊ में जनसभा को लेकर भाजपा में जा चुकी रीता बहुगुणा जोशी ने भी काफी मशक्कत की थी, लेकिन इसके बाद भी मैदान में कुर्सियां खाली रह गई। मीडिया ने इन खाली कुर्सियों को जमकर दिखाया। कुछ राज्यों में कांग्रेस पार्टी को ढंग का प्रत्याशी तक नहीं मिल पा रहा था। बताते हैं बिहार, म.प्र., राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों में आज पार्टी के पास टिकट चाहने वाले नेताओं की लाइन लगी है।

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सितारों ने बदल ली है चाल

एक कहावत है कि सितारे गर्दिश में हो तो हर कोशिश बैकार है। यह हाल 2014 का था। 2018 आते-आते कांग्रेस आध्यक्ष राहुल गांधी भी बदल गए और उनके सितारे भी। गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर सीधा हमला बोलकर राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगे पप्पू को टोटके को काफी पीछे छोड़ दिया। मुंगेर के कांग्रेस नेता पंकज सिंह कहते हैं कि राहुल गांधी की पटना के गांधी मैदान में जनसभा को सोचा नहीं जा सकता था। 

कितने वर्षों बाद कांग्रेस ने यहां अपने अध्यक्ष को बुलाने का जोखिम उठाया था और गजब का जन सैलाब उमड़ आया। 23 मार्च को पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में भी राहुल गांधी को सुनने काफी लोग आए थे। पश्चिम बंगाल के मालदा में भी राहुल गांधी की रैली थी। बताते हैं लोगों में गजब का उत्साह था। जिधर देखिए लोग खुद चले आ रहे हैं। राहुल गांधी का आकर्षण बढ़ रहा है। अधीर रंजन चौधरी, शक्ति सिंह गोहिल समेत तमाम नेता जनता के बीच में राहुल गांधी के बढ़ रहे आकर्षण से गदगद हैं। 

क्या यह बदलाव का संकेत है?

कभी संघ परिवार के चिंतकों में गिने जाने वाले सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष बहुत सधी हुई राजनीति कर रहे हैं। पहले उनके बारे में ऐसा सोचना थोड़ा मुश्किल था। अब राहुल गांधी शरद पवार, सीताराम येचुरी, चंद्रबाबू नायडू, शरद यादव के साथ बैठकर पार्टी हित के निर्णय ले रहे हैं। वह कांग्रेस को भविष्य की बड़ी और सशक्त रोड-मैप तैयार करने में लगे हैं। 

कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति जनता के प्रचंड आकर्षण के आगे 2017 तक वह अचानक इतने बड़े बदलाव के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। बताते हैं इसी सोच के आधार पर उन्होंने कई बार पार्टी फोरम में भी उत्साह नहीं दिखाया था। लेकिन अब उन्हें सब दिखाई दे रहा है। अब प्रधानमंत्री मोदी अपनी जनसभा में रक्षात्मक स्ट्रोक खेल रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष आक्रामक। 

सूत्र का कहना है कि राजनीति में ऐसा दो सूरत में होता है। पहला सत्ता पक्ष के नेता से लोगों की अपेक्षा को धक्का लगना और दूसरा विरोधी नेता की सूझबूझ। निश्चित रूप से राजनीति में कुछ ऐसा हो रहा है।

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