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संसदीय समिति के सामने पेश हुए फेसबुक अधिकारी, 10 दिन में चुनाव और डेटा सुरक्षा पर मांगा जवाब
Wed, 06 Mar 2019 02:46 PM IST
Gaurav Pandey
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Wed, 06 Mar 2019 02:46 PM IST
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फेसबुक
आगामी लोकसभा चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सरकार बेहद सतर्कता से काम ले रही है। सूचना प्रोद्यौगिकी पर बनी संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने फेसबुक, व्हॉट्सएप और इंस्टाग्राम के अधिकारियों से सीधे शब्दों में कहा है कि भारतीय चुनाव, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के डेटा की सुरक्षा देश की पहली प्राथमिकता है। कंपनी से इस बाबत 10 दिन के भीतर लिखित जवाब सौंपने को कहा गया है।
संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने फेसबुक के अधिकारियों से पूछा, "आपका मंच समाज के काम आ रहा है या समुदायों को बांटने का काम कर रहा है?"
इस पर फेसबुक ने कहा कि वो एक हायब्रिड कंपनी हैं। फेसबुक की सामग्री, विज्ञापन और मार्केटिंग से जुड़े कामकाज पर कौन सी नीतियां लागू होती हैं, इसका जवाब देने में कंपनी असमर्थ रही।
फेसबुक के वैश्विक नीति प्रमुख ने कुछ कर्मचारियों के पुलवामा हमले और आतंकवाद को लेकर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों पर स्टैंडिग कमेटी से माफी भी मांगी।
कमेटी के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा, "हमने उनसे कहा वो ये सुनिश्चित करें कि उनके मंच का इस्तेमाल समाज को बांटने, हिंसा भड़काने, भारत की सुरक्षा से खिलवाड़ या विदेशी ताकतों के भारतीय चुनाव में दखल को लेकर न हो। उन्होंने माना कि कुछ सुधारों की जरूरत है और वो उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि वो चुनाव आयोग के संपर्क में रहेंगे और संबंधित मंत्रालयों की सूचना पर काम करेंगे।"
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इससे पहले 25 फरवरी को ट्विटर के कॉलिन क्रॉवेल भी अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाले पैनल के सामने पेश हो चुके हैं। पैनल ने ट्विटर अधिकारियों से, चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करने को कहा है। उनसे तमाम मुद्दों को साथ की साथ सुलझाने को कहा गया है।
फेसबुक के वाइस प्रेसीडेंट जोएल कापलान ने संसदीय समिति से मुलाकात के बाद कहा कि हम संसदीय समिति के बेहद आभारी हैं जो उन्होंने हमें यहां आने का और यह बताने का मौका दिया कि हम आगामी लोकसभा चुनाव के लिए किस तरह तैयारी कर रहे हैं और अपने प्लेटफॉर्म पर हम भारतीयों की सुरक्षा में सहायता कर रहे हैं।
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संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने फेसबुक के अधिकारियों से पूछा, "आपका मंच समाज के काम आ रहा है या समुदायों को बांटने का काम कर रहा है?"
इस पर फेसबुक ने कहा कि वो एक हायब्रिड कंपनी हैं। फेसबुक की सामग्री, विज्ञापन और मार्केटिंग से जुड़े कामकाज पर कौन सी नीतियां लागू होती हैं, इसका जवाब देने में कंपनी असमर्थ रही।
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फेसबुक के वैश्विक नीति प्रमुख ने कुछ कर्मचारियों के पुलवामा हमले और आतंकवाद को लेकर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों पर स्टैंडिग कमेटी से माफी भी मांगी।
कमेटी के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा, "हमने उनसे कहा वो ये सुनिश्चित करें कि उनके मंच का इस्तेमाल समाज को बांटने, हिंसा भड़काने, भारत की सुरक्षा से खिलवाड़ या विदेशी ताकतों के भारतीय चुनाव में दखल को लेकर न हो। उन्होंने माना कि कुछ सुधारों की जरूरत है और वो उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि वो चुनाव आयोग के संपर्क में रहेंगे और संबंधित मंत्रालयों की सूचना पर काम करेंगे।"
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फेसबुक के वाइस प्रेसीडेंट जोएल कापलान ने संसदीय समिति से मुलाकात के बाद कहा कि हम संसदीय समिति के बेहद आभारी हैं जो उन्होंने हमें यहां आने का और यह बताने का मौका दिया कि हम आगामी लोकसभा चुनाव के लिए किस तरह तैयारी कर रहे हैं और अपने प्लेटफॉर्म पर हम भारतीयों की सुरक्षा में सहायता कर रहे हैं।