अगले 15 दिनों तक 'मोदीमय' रहेगा पूर्वांचल, गढ़ बचाने की कोशिश में भाजपा
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उत्तर प्रदेश देश का प्रधानमंत्री तय करने में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि चुनाव के समय उत्तर भारत के लगभग सभी राजनीतिक दलों के केंद्र में उत्तर प्रदेश आ जाता है। साल 2014 के आम चुनाव की तरह एक बार फिर नरेंद्र मोदी ने इस मोर्चे पर कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री के आगामी कुछ दिनों के कार्यक्रम पर निगाह डालें तो पता चलता है कि वे अगले लगभग पंद्रह दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में डेरा डाले रहेंगे। इससे इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार भी वे वाराणसी से अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।
प्रधानमंत्री 19 फरवरी को वाराणसी में थे। जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने वाराणसी के लोगों को याद दिलाया कि उन्होंने जिन कार्यों का शिलान्यास अपने पीएम बनने के बाद किया था, एक-एक कर वे वाराणसी के लोगों को समर्पित की जा रही हैं। उन्होंने आठ बड़ी योजनाओं के साथ दर्जनों योजनाओं का लोकार्पण किया। एक बंद चीनी मिल को चालू करने को प्रधानमंत्री की तरफ से किसानों को बड़ा तोहफा माना जा रहा है क्योंकि इस चीनी मिल से पूर्वी यूपी के लगभग दो दर्जन जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
किसान मोर्चे को 24 फरवरी को संबोधित करेंगे पीएम
इसी हफ्ते 24 फरवरी को प्रधानमंत्री एक बार फिर पूर्वांचल के अहम जिले गोरखपुर में होंगे जिसे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है। वहां वे भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चे के राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन सत्र में किसानों की एक बड़ी सभा को संबोधित करेंगे। चर्चा है कि प्रधानमंत्री इस अवसर पर किसानों के लिए एक योजना भी पेश कर सकते हैं जिसे लेकर भाजपा चुनाव के समय किसानों के बीच जाएगी। भाजपा ने प्रधानमंत्री की रैली के लिए गोरखपुर के आसपास के 11 जिलों में विशेष अभियान चला रखा है। इसका परिणाम बड़े किसान रैली के रूप में सामने आ सकता है। माना जा रहा है कि चुनाव पूर्व इस आयोजन के माध्यम से भाजपा जनता के बीच एक बड़ा संदेश देने की कोशिश करेगी।
कुंभ दर्शन की योजना
भाजपा सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री इसी महीने के अंत में 27 फरवरी को कुंभ दर्शन के लिए प्रयागराज जा सकते हैं। वे वहां पर संगम में स्नान भी कर सकते हैं। धार्मिक तौर पर कुंभ, प्रयागराज और काशी का घनिष्ठ संबंध है। माना जा रहा है कि चुनाव के पहले वे जनता को एक बड़ा संदेश अवश्य देंगे।
इसके पहले भी प्रधानमंत्री मोदी अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में बहुत सक्रिय रहे हैं। पिछले 21-23 जनवरी को वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ था। कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों को देश से जोड़कर उन्होंने वाराणसी के लोगों के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के मन में भी देश के लिए खास जगह बनाई थी।