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अगले तीन चरण चुनाव नहीं महासमर, कांग्रेस को अवसर तो भाजपा के लिए खोने का डर

Sun, 28 Apr 2019 01:49 PM IST
आसिम खान शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Sun, 28 Apr 2019 01:49 PM IST
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lok sabha elections 2019: BJP and Congress doing election campaign in new way for fifth phase
पीएम मोदी- अमित शाह- राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूरी भाजपा और एनडीए ने बनारस में नामांकन के दौरान हाई वोल्टेज प्रचार अभियान चलाया। पांच मई के बाद भाजपा एक बार इसी दौर में लौटेगी और 17 मई तक हाई वोल्टेज प्रचार अभियान का दौर जारी रहने की उम्मीद है। प्रचार अभियान को लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी कमर कस ली है। राहुल और प्रियंका ने अपने हाव-भाव, सहज स्वभाव को जनता के बीच में ले जाने के लिए वीडियो क्लिप शेयर करना शुरू कर दिया है। दोनों दल नये सिरे से प्रचार की रणनीति को लांच और रीलांच करने जा रहे हैं। बताते हैं ऐसा पांचवे चरण से मिलने और खोने के खतरे के कारण हो रहा है।

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राहुल गांधी के कार्यालय से जुड़े सूत्र का कहना है कि अगले चरणों में 240 सीटों पर मतदान होने हैं। इनमें हमारे खाते 2014 में न के बराबर (नौ) सीटें आई थीं। किसी चरण में दो तो किसी में तीन ऐसे ही सीटें मिल सकी थीं। इसलिए यूपी, बिहार, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र में कांग्रेस के पास अपनी सीटों को बढ़ाने का अवसर है। लिहाजा पार्टी की सोशल मीडिया टीम से लेकर स्टार प्रचारकों तक ने नए तरीके से जनता के बीच में जाने का मन बनाया है।
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गुरूद्वारा रकाब गंज में कांग्रेस पार्टी के लिए काम कर रहे और कभी प्रशांत किशोर को सेवाएं दे चुके सूत्र का कहना है कि पिछले चरणों में 301 सीटों पर चुनाव हुआ है। 2014 में इन सीटों पर कहीं न कहीं विपक्ष का पलड़ा भारी था। इनमें हम 44 में से 30 से अधिक सीटें जीते थे। भाजपा को बहुत अधिक सीटें नहीं मिली थीं। वह 40 प्रतिशत के करीब सीटें जीत सकी थी। जबकि पांचवें, छठवें और सातवें चरण में सत्ता पक्ष को 240 में से 167 सीटें मिल गई थीं। 

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मोदी का असर तो है, पर मनमोहन सरकार विरोधी लहर नहीं

भाजपा महासचिव राम माधव की टीम के लिए काम कर चुके सूत्र का भी मानना है कि अब लड़ाई बेहद कठिन दौर में है। भाजपा के रणनीतिकार भी मान रहे हैं कि 2014 के मुकाबले कुछ सरकार विरोधी लहर है। पश्चिमी यूपी में सक्रिय सूत्र का कहना है कि 2014 में जनता के भीतर मनमोहन सिंह सरकार से नाराजगी और प्रधानमंत्री मोदी की लहर चल रही थी। इस दौहरे असर से यूपी में हर लोकसभा सीट पर हमारी शुरूआत 3.5-4 लाख वोट से हो रही थी। 


इस बार यूपीए सरकार की नाराजगी वाला अंश नहीं है। बल्कि कुछ सरकार विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए यूपी के करीब-करीब हर राज्य में चुनौती है। विनय सह बुद्धे के लिए काम करने वाले युवा सूत्र का कहना है कि करीब 20 प्रतिशत तक नुकसान की भरपाई का आकलन था। सूत्र का भरोसा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसे ध्यान में रखकर रणनीति बनाई है और ठोस प्रचार अभियान, शानदार बूथ प्रबंधन, प्रधानमंत्री की जनता के भीतर साख के सहारे अच्छा नतीज आना चाहिए। 

 

यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र में फंसी है नाक

lok sabha elections 2019: BJP and Congress doing election campaign in new way for fifth phase
बीजेपी कांग्रेस (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

चौथे चरण में महाराष्ट्र की 17 सीटों और राजस्थान की 13 सीटों पर भाजपा की सांस अटकी है। यूपी की 13, मध्यप्रदेश 06, झारखंड की तीन, जम्मू की दो सीटों में का 99 प्रतिशत सीटों पर 2014 में भाजपा का कब्जा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इन सीटों में हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। वहीं भाजपा के रणनीतिकारों को यहां से कुछ हिस्सा खोने खतरा साफ दिखाई पड़ रहा है। 

यूपी में गठबंधन ने मुसीबत बढ़ाई है तो मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, में कांग्रेस के प्रत्याशी टक्कर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर मोदी के सामानांतर या आस-पास कोई नहीं है, लेकिन तमाम अन्य समीकरण उठ खड़े हुए हैं। बिहार, झारखंड में भी चुनाव 2014 वाला नहीं बल्कि 2019 वाला है। भाजपा को सुखदायी खबर की उम्मीद केवल पश्चिम बंगाल से है। अब यहां कितना सीटों में फायदा होगा, इसका आकलन जारी है।

आगे क्या है?

पांचवें चरण में 06 मई को बिहार पांच, झारखण्ड की 04, मध्यप्रदेश की 08, राजस्थान की 12, जम्मू-कश्मीर की दो, यूपी 14 और पश्चिम बंगाल की सात सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें से 2014 में केवल तीन सीट कांग्रेस के पास, 01 पीडीपी और सात सीटें तृणमूल कांग्रेस के पास थीं। शेष सभी सीटें बीजेपी और उसके घटक दलों ने जीती थीं। 39 सीटें अकेले भाजपा के खाते में आई थीं। इस बार रालोसपा भाजपा के साथ एनडीए में नहीं हैं। रालोसपा ने बिहार में सीतामढ़ी सीट जीतने में सफलता पाई थी।

छठवां चरण का चुनाव और दिलचस्प होगा। 59 सीट पर 12 मई को मतदान होगा। 2014 में 45 सीट भाजपा, एक अपना दल, लोजपा एक और चार अकाली दल ने जीती थी। इस तरह से एनडीए के खाते में कुल 51 सीटें एनडीए के पाले में थीं। कांग्रेस को एक सीट, तृणमूल कांग्रेस को 08 और समाजवादी पार्टी को एक सीट पर सफलता मिली थी। इस बार छठवें चरण में दिल्ली की सात, हरियाणा की सभी दस सीटों पर वोट डाले जाएंगे। 

हरियाणा से भाजपा को सात और दिल्ली से सभी सात सीटें मिली थीं। इस बार यहां मुकाबले की स्थिति है। सातवां चरण भी भाजपा का ही था। झारखंड की राजमहल (झारखंड मुक्तिमोर्चा), दुमका (झामुमो), बिहार की नालंदा (जदयू), जहानाबाद और काराकाट (रालोसपा) के पास थी। तब रालोसपा एनडीए में था, अब यूपीए में है। जदयू बाहर थी, अब एनडीए में है। 

नौ सीटों पर तृणमूल कांग्रेस जीती थी। बाकी सभी सीटें भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास थीं। इन 59 सीटों में से 33 पर अकेले भाजपा का कब्जा था। चार आम आदमी पार्टी के खाते में चली गई थीं। कांग्रस को तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। चार सीट अकाली दल ने जीती थीं। इस बार पंजाब की सभी 13, चंडीगढ़ की एक, हिमाचल की चार सीटों पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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