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आम चुनाव 2019: यूपी में अपना दल के साथ भाजपा के गठबंधन की मजबूरी और मायने
Fri, 15 Mar 2019 06:33 PM IST
अमित मंडल
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Fri, 15 Mar 2019 06:33 PM IST
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भाजपा और अपना दल में गठबंधन
- फोटो : ANI
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लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखें नजदीक आने के साथ साथ रूठे साथियों को मनाने का दौर तेज हो गया है। 80 सीटों वालों उत्तर प्रदेश में भाजपा की इस बार अग्निपरीक्षा है। सपा-बसपा गठबंधन ने उसकी राह को मुश्किल कर दिया है। मौके की नजाकत को समझते हुए पार्टी ने रूठे नेताओं को मनाना और गठबंधन को मजबूत करना शुरू कर दिया है।
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शुक्रवार को भाजपा ने अपना दल (सोनेलाल) के साथ महत्वपूर्ण गठबंधन का एलान किया। दोनों दल यहां मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अपना दल को दो सीटें दी गई हैं। इसकी जानकारी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर दी। अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से लड़ेंगी। दूसरी सीट पर फैसला चर्चा के बाद होगा।
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अनुप्रिया पटेल की नाराजगी
कुछ समय पहले तक भाजपा और अपना दल में एक तरह से अनबन चल रही थी। सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों में टकराहट लगातार बढ़ रही थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों में अनुप्रिया पटेल के तेवरों में नरमी नजर आई। दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत के बाद आखिरकार फॉर्मूला निकाल लिया गया।
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केंद्र में मंत्री होने के बावजूद अनुप्रिया पटेल भाजपा और यूपी सरकार से नाराज थीं। खासतौर पर आरक्षण के मुद्दे पर बेहद मुखर थीं। जनवरी 2019 को एक बैठक के बाद उन्होंने यूपी सरकार पर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार जातीय जनगणना कराकर पिछड़ों को आपस में लड़ाना चाहती है। उन्होंने कहा था कि हम केंद्र सरकार के साथ हैं लेकिन हमारी समस्याओं का समाधान होना चाहिए, हम अपने कार्यकर्ताओं के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने कहा था कि भाजपा की सरकार में सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं, नेताओं और मंत्रियों की उपेक्षा हो रही है। सरकार उनकी मांगें नहीं सुन रही। उपेक्षा जारी रही तो 2019 का लोकसभा चुनाव गड़बड़ा सकता है।
क्या हैं मायने
दोनों पार्टियों के गठबंधन से भाजपा को बड़ी राहत मिली है। सपा-बसपा गठबंधन के बाद बने हालात में भाजपा को अपना खेमा मजबूत बनाए रखने की जरुरत थी। उसे नाराज अपना दल को मनाकर संकेत दे दिया कि वह छोटे साथियों को भी साथ लेकर चलने की रणनीति पर चल रही है। 2014 चुनाव में अपना दल ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे में उसके लिए इस गठबंधन को बरकरार रखना उसके लिए बेहद जरूरी हो गया था।