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Lok Sabha Election: यूपी में कांग्रेस की 17 सीटों पर कौन-कौन लड़ेगा चुनाव? देखें संभावित उम्मीदवारों की सूची

Thu, 22 Feb 2024 08:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 22 Feb 2024 08:01 PM IST
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सार
रायबरेली लोकसभा सीट से सोनिया गांधी ने चुनाव न लड़ने का एलान पहले ही कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का अनुमान है कि प्रियंका गांधी को यहां से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। ऐसा करने से पार्टी न केवल अपनी पंरपरागत सीट बचाने में कामयाब हो सकती है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी कांग्रेस को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिल सकती है...
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Lok Sabha Election: Who will contest on 17 Congress seats in Uttar pradesh? See list of probable candidates
UP Congress: Lok Sabha Election - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हो गया है। समझौते में कांग्रेस को अमेठी-रायबरेली सहित 17 सीटें मिली हैं, जबकि सपा और अन्य सहयोगी दल 63 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाएंगे। कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में सबसे बड़ा नाम स्वयं राहुल गांधी का है। कांग्रेस उन्हें अमेठी से दोबारा चुनावी मैदान में उतार सकती है। जयराम रमेश के बयानों से भी इसी बात के संकेत मिले हैं।

रायबरेली लोकसभा सीट से सोनिया गांधी ने चुनाव न लड़ने का एलान पहले ही कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का अनुमान है कि प्रियंका गांधी को यहां से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। ऐसा करने से पार्टी न केवल अपनी पंरपरागत सीट बचाने में कामयाब हो सकती है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी कांग्रेस को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिल सकती है।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेताओं का मानना है कि अमेठी-रायबरेली में आम जनता को सीधे गांधी परिवार के करीबी संपर्क में रहने की आदत बन गई है। वे कांग्रेस के किसी अन्य नेता को एक नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर पाते। यही कारण है कि इस परंपरागत सीट पर मतदाताओं से अपना लगाव बरकरार रखने के लिए कांग्रेस अपने दोनों बड़े चेहरों को यहां से मैदान में उतार सकती है।

मोदी के सामने कांग्रेस से कौन

वाराणसी की सीट भी कांग्रेस के खाते में आई है। यहां से पार्टी के दो बड़े नेता अजय राय और राजेश मिश्रा अपनी किस्मत आजमाते रहे हैं। राजेश मिश्रा को एक बार यहां से प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिल चुका है। बदली परिस्थितियों में अजय राय उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। उन्हें यहां से चुनाव मैदान में उतारकर पार्टी अपने चुनावी अभियान को मजबूती देने की कोशिश कर सकती है।

राजेश मिश्रा को भी वाराणसी सीट पर दावेदार माना जा रहा है, लेकिन अजय राय के कारण उनकी संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं। जबकि राजेश मिश्रा ने सीटों के बंटवारे के बाद इशारों-इशारों में अजय राय पर करारा हमला किया है। ऐसे में उन्हें मैदान में उतारने से पार्टी परहेज कर सकती है। हालांकि, उनके बारे में एक चर्चा यह भी है कि वे चुनाव से पहले कांग्रेस का साथ छोड़ सपा के टिकट पर भदोही से किस्मत आजमा सकते हैं।   

कांग्रेस किसी बाहरी बड़े लोकप्रिय चेहरे को लाकर भी पीएम नरेंद्र मोदी को वाराणसी में टक्कर देने की कोशिश कर सकती है। इसके लिए पार्टी की विचारधारा से सहमत किसी बड़े स्टार के नाम की तलाश पर गहराई से विचार किया जा रहा है।

डॉली फिर मैदान में

गाजियाबाद से डॉली शर्मा कांग्रेस से सबसे मजबूत उम्मीदवार मानी जा रही हैं। वे टीवी चैनलों पर पार्टी की ओर से तेज तर्रार बहस करते हुए देखी जाती हैं। प्रियंका गांधी की करीबी डॉली शर्मा को पिछले चुनाव में भी अवसर मिला था, लेकिन वे जीत हासिल नहीं कर सकी थीं, लेकिन बदली परिस्थितियों में वे कांग्रेस की मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकती हैं।

पूनिया की विरासत संभालेगा बेटा

बाराबंकी सीट कांग्रेस के दिग्गज दलित नेता पीएल पूनिया के गृह क्षेत्र के रूप में जानी जाती है। 2009 में वे यहां से जीत भी दर्ज कर चुके हैं। पार्टी इस बार भी उन्हें मैदान में उतार सकती है। हालांकि, चर्चा है कि पीएल पूनिया अब अपने बेटे तनुज पूनिया को राजनीति में सेट करने की कोशिश में जुटे हैं। इसलिए वे अपनी सीट अपने बेटे को दे सकते हैं। युवा तेज तर्रार दलित नेता तनुज पूनिया कांग्रेस को जीत दिला सकते हैं।

इमरान की विवादित छवि से कांग्रेस को लाभ की उम्मीद

इमरान मसूद अभी भी कांग्रेस के लिए एक बड़े ब्रांड हैं। पार्टी मुस्लिम-दलित बहुल क्षेत्र सहारनपुर से उन्हें मैदान में उतार सकती है। कानपुर से श्री प्रकाश जायसवाल अभी भी सबसे बड़े चेहरे साबित हो सकते हैं, लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते संभावना जताई जा रही है कि इस बार वे स्वयं चुनाव में न उतरें। ऐसे में उनके परिवार से कोई अन्य सदस्य अपनी किस्मत आजमा सकता है। हालांकि, कांग्रेस के एक अन्य नेता अजय कपूर अभी भी शहर में पार्टी के बड़े चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। यदि सभी समीकरण ठीक रहे, तो उन्हें यहां से जीत मिल सकती है।

कांग्रेस में आने का कारण होगा सफल

दानिश अली को अब राहुल गांधी के भरोसेमंद नेता के रूप में उभरता हुआ नया चेहरा माना जाता है। चर्चा यह भी है कि कांग्रेस में शामिल होने के लिए वे पहले ही फील्डिंग करने में जुट गए थे। यही कारण है कि मायावती ने उन्हें बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। लेकिन दानिश अली कांग्रेस के लिए एक असेट साबित हो सकते हैं। पार्टी अमरोहा से उन्हें मैदान में उतार सकती है।

फतेहपुर सीकरी से कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। चर्चा है कि राज बब्बर को एक बार फिर यहां से मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि, स्थानीय उम्मीदवार रामनाथ सिकरवार भी पार्टी के लिए वोट बटोरने का काम कर सकते हैं। पूर्व आर्मी मैन की उनकी छवि उन्हें अपने क्षेत्र में लोकप्रिय बनाती है। विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता भले ही नहीं मिली थी, लेकिन बडी़ संख्या में वोट खींचकर उन्होंने अपनी क्षमता साबित कर दी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस सिकरवार पर दांव खेल सकती है।

प्रयागराज में कौन

प्रयागराज की सीट अपने आप में लखनऊ-वाराणसी की तरह बहुत प्रतिष्ठित सीट मानी जाती है। मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज भाजपा नेता यहां से चुनाव लड़ते रहे हैं। रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में यहां से अपनी किस्मत आजमाती रही हैं। कांग्रेस के लिए प्रयागराज से अनुग्रह नारायण सिंह अभी भी सबसे बड़े उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। स्थानीय जनता पर सीधी पकड़ उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बल पर वे अपनी राजनीति करते रहे हैं। जिस समय कांग्रेस और राहुल गांधी को जनता के सीधे संपर्क की आवश्यकता है, अनुग्रह नारायण सिंह जैसे नेता उनके लिए एक असेट साबित हो सकते हैं।

हालांकि, प्रयागराज से प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा मोना को भी संभावित उम्मीदवारों के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के बचे हुए बड़े चेहरों में आराधना मिश्रा का नाम भी शामिल है। वे पिता प्रमोद तिवारी की राजनीतिक विरासत बहुत अच्छे से संभाल रही हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें भी यहां से मैदा्न में उतार सकती है। उनके अलावा संजय तिवारी का नाम भी प्रयागराज में संभावित उम्मीदवारों के रूप में देखा जा रहा है।

सुप्रिया का मैदान में उतरना तय

कांग्रेस की तेज तर्रार नेता-प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत भी अपने पूर्व सांसद पिता हर्षवर्धन सिंह की राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं। उनकी तैयारियों को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस उन्हें महाराज गंज से मैदान में उतार सकती है। वे एक जिताऊ उम्मीदवार साबित हो सकती हैं।

देवरिया में टक्कर

देवरिया में कांग्रेस के पास दो बड़े नेता मौजूद हैं। पार्टी के प्रभावी वक्ता अखिलेश प्रताप सिंह कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। वे भी गांधी परिवार के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। जबकि, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू देवरिया से पार्टी के सबसे भरोसेमंद उम्मीदवार हो सकते हैं।

झांसी से पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य जैन, बांसगांव से कमल किशोर कमांडो उम्मीदवार हो सकते हैं। वहीं, पूर्व कांग्रेसी नेता महावीर प्रसाद की बेटी विमला को भी बांसगांव की संभावित दावेदार माना जा रहा है। बुलंद शहर से प्रशांत बाल्मीकी या अंबरीश गौतम को भाग्य आजमाने का मौका मिल सकता है। मथुरा की सीट पर कांग्रेस अपने पुराने भरोसेमंद नेता प्रदीप माथुर को मैदान में उतार सकती है। सीतापुर से राकेश राठौर को मौका मिल सकता है।

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