Lok Sabha Election: कांशीराम के साथी गांधी आजाद की बहू और BSP सांसद संगीता हुईं भाजपाई, BJP ने बिछाए मोहरे
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विस्तार
बसपा के कर्ता धर्ता कांशीराम के साथी और बसपा के संस्थापकों में एक गांधी आजाद की बहू संगीता आजाद सोमवार को भाजपा में शामिल हो गईं। आजाद बसपा के टिकट पर 2019 में लालगंज सीट सांसद चुनी गईं। उनके पति भी विधायक रह चुके हैं और सास भी जिला पंचायत अध्यक्ष थीं। इस तरह से भाजपा उत्तर प्रदेश में किसी भी सूरत में 75 सीटों के पार जाने के लिए एक-एक सीट पर मोहरे बिछा रही है। भाजपा के ही जौनपुर के एक बड़े नेता हैं। कहते हैं कि पार्टी ने कृपा शंकर सिंह को उम्मीदवार बनाया है। विपक्षी दल को उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा है। इस बार यह सीट भी निकलनी तय है।
सूत्र का कहना है कि भाजपा के बड़े नेताओं की तरफ से साफ निर्देश हैं कि पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी नहीं चाहिए। लोकसभा चुनाव 2024 को पूरे तालमेल के साथ लड़ना है। नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि इसी गुटबाजी को रोकने के लिए पार्टी ने मुंबई के पूर्व गृहराज्य मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में आए कृपाशंकर सिंह को प्रत्याशी बना दिया। जबकि क्षेत्र में दावेदारी पांच साल से प्रयास कर रहे दूसरे दो बड़े नामों को लेकर थी। गौरतलब है कि बाहुबली नेता के रूप में गिने जाने वाले धनंजय सिंह ने एमपी एमएलए कोर्ट द्वारा खुद को सात साल की सजा और गिरफ्तारी को भी राजनीतिक षडयंत्र बताया था।
संगीता आजाद के भाजपा में आने का मतलब
लालगंज संसदीय क्षेत्र और आजमगढ़ बसपा के नेता और पुराने कार्यकर्ता गांधी आजाद के परिवार की इज्जत करता है। आसपास के जिले में भी गांधी आजाद बसपा के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। सीमा आजाद को बसपा में लाने के लिए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक काफी समय से कोशिश कर रहे थे। गांधी आजाद 1996 से 2008 तक लगातार दो बार राज्यसभा के सदस्य थे। उनके परिवार के सदस्य को भाजपा में शामिल कराने की अहमियत बसपाई रहे बृजेश पाठक को मालूम है। इसी तरह से सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर को भाजपा से जोड़ने में बृजेश पाठक की भूमिका रही है। राजभर ने नोनिया समेत अन्य बिरादरी में पकड़ मजबूत करने के लिए दारा सिंह चौहान को भी भाजपा में लाने का रास्ता तैयार किया। राजभर और चौहान को राज्य सरकार में मंत्री बनाने को भी भाजपा के चुनावी रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। इसी तरह से देश को झकझोर देने वाले निर्भया कांड में पीड़ित पक्ष की वकील सीमा कुशवाहा भी अब भाजपाई हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि छोटी-छोटी जातियों, वर्गों और समुदायों को भाजपा से जोड़ने की इस रणनीति पर सुनील बंसल भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
सभी 80 सीटों पर मोहरे बिछा रही भाजपा
गोरखपुर से गाजियाबाद तक 80 सीटों पर भाजपा विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए उसने अपनी सहयोगी दलों अपना दल और रालोद को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसके साथ-साथ पार्टी के जनाधार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कराकर जमीनी संदेश देने का भी काम जारी है। 2019 के चुनाव में बसपा के 10 सांसद चुनाव जीतकर आए थे। रितेश पांडे पहले ही बसपा को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। आज सीमा आजाद ने भी बसपा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का पटका पहन लिया। सीमा आजाद के नाम ने चौंकाया। क्योंकि सीमा आजाद बसपा के संस्थापक सदस्य, कांशीराम की साइकिल के कैरियर पर बैठकर बसपा की अलख जगाने वाले गांधी आजाद की बहू हैं।
बसपा के एक और सांसद हैं श्याम सिंह यादव, जौनपुर से सांसद। श्याम सिंह यादव का लंबे समय से बसपा प्रमुख और इसके रणनीतिकारों से कोई संवाद नहीं है। दानिश अली से मायावती ने पहले ही बाय-बाय कर ली है। बसपा के सांसद अफजाल अंसारी सपा के टिकट पर गाजीपुर से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। इसी तरह से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेता भी भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ज्ञानेश्वर शुक्ला संघ और भाजपा से जुड़े हैं। हर चुनाव में पार्टी उन्हें प्रचार-प्रसार, उम्मीदवार को जिताने की जिम्मेदारी सौंपती है। बताते हैं कि 2024 में भाजपा गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक एक-एक सीट को ठोक बजाकर परख रही है। राजनीतिक नफा-नुकसान का पूरा आकलन करने के बाद उम्मीदवार उतारने की योजना है। ज्ञानेश्वर कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने 400 के पार जाने का नारा दे दिया है। यह तभी संभव है, जब उत्तर प्रदेश में भाजपा 75 के पार सीटें लेकर आए और यह होगा।