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आसनसोल हिंसा में बेटे को खोने वाले इमाम ने कहा- चुनाव आते-जाते रहेंगे, हमें एकजुट रहना है

Sat, 27 Apr 2019 03:40 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आसनसोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आसनसोल Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 27 Apr 2019 03:40 PM IST
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Lok Sabha Election : Imam who lost his son in Asansol violence appeal people to be united
नूरानी मस्जिद के इमाम इमादुल्लाह रशीदी - फोटो : ANI

पिछले साल पश्चिम बंगाल के आसनसोल में हुए सांप्रदायिक दंगों में अपने बेटे को खो चुके नूरानी मस्जिद के इमाम इमादुल्लाह रशीदी ने चुनावों के बीच आपसी सद्भाव को बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि चुनाव आते-जाते रहेंगे लेकिन हमें लंबे समय तक साथ रहना है और ऐसे में इस तरह का कोई माहौल नहीं बनना चाहिए जिससे कि हमारे बीच असहज स्थिति बने।

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जब इमाम के बेटे की मौत हुई थी तब कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। मगर उस नाजुक वक्त में भी उन्होंने मजबूत फैसला लेते हुए लोगों से इसे सांप्रदायिकता का रंग न देने की विनती की थी और कहा था कि शहर में अमन बहाल करने में मदद करें। आसनसोल में 29 अप्रैल को मतदान होने हैं। शुक्रवार को उन्होंने मस्जिद में दुआ के बाद उपदेश दिया।
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उपदेश में उन्होंने कहा, 'आप सभी किसी को भी वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन इस दौरान हम सभी को एकजुट रहना चाहिए और क्षेत्र में शांति का माहौल बना रहे इसके लिए कोशिश करनी चाहिए। चुनाव आएंगे और जाएंगे मगर हमें एकजुट रहना होगा। चुनाव के बीच किसी भी तरह की बहसबाजी या ऐसा माहौल न बने जिससे कि हमारे बीच में खटास पैदा हो।'
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उन्होंने आगे कहा, 'इस देश में हजारों सालों से हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों का साथ रहने का इतिहास रहा है। हमें कोई भी ऐसा मौका नहीं देना है जिससे कि जाति और धर्म के नाम पर कोई हमें बांटे और हमारी सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचाएं।' इमाम ने सभी राजनीतिक दलों के समर्थको से भी अपील की कि वे एक दूसरे की विचारधाराओं का सम्मान करते हुए शांति बनाए रखें।

सांप्रदायिक हिंसा में खोया था बेटा

पिछले साल मार्च में रामनवमी के बाद भड़की हिंसा में इमाम रशीदी ने अपने 16 साल के बेटे हफीज सबीतुल्ला खो दिया था। उसके शरीर और सिर पर गहरी चोट के निशान थे। इसके बावजूद उन्होंने आरोपी की पहचान करने से इनकार करते हुए लोगों से क्षेत्र में सद्भाव बनाकर रखने की अपील की थी। जिसकी वजह से पुलिस को वहां सांप्रदायिक तनाव पर काबू पाने में काफी मदद मिली थी।

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